चाय के बाद अब डिनर पर चर्चा!, ‘सुबह’ की भूल का रात में ‘मंथन’

सत्ता बदली, काल बदला तो भाजपा की चाल भी बदल गई। जिस ‘चाय पर चर्चा’ को भाजपा ने सुबह नुक्कड़ और चौराहों पर आयोजित कर संवाद का जरिया बनाया था, वह अब साढ़े चार साल बाद सत्ता की ‘रात’ करीब आते ही ‘डिनर पर चर्चा’ के रूप में बदल चुकी है। तीन राज्यों में सत्ता गंवाने के बाद भाजपा की इस मुहिम को ‘सुबह’ की भूल का ‘रात’ में मंथन माना जा सकता है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अपने सांसदों से ‘डिनर पर चर्चा’ करेंगे। यह चर्चा पीएम मोदी के सात रेसकोर्स स्थित सरकारी आवास पर हर रात होगी। जो रात ८:०० बजे से १०:०० बजे की बीच चलेगी। डिनर पर चर्चा का सत्र आज से शुरू होकर ३ दिसंबर तक चलेगा। इसके लिए पार्टी की तरफ से सभी सांसदों को कहा गया है कि वे केंद्र, राज्य और अपने संसदीय क्षेत्र की ग्राउंड रिपोर्ट व सुझाव तैयार करके लाएं। वैसे देखा जाए तो केंद्र में भाजपा के सत्ता काल का चतुर्थ चरण चल रहा है (जैसे साढ़ेसाती के चार चरण होते हैं)। सत्ता के शुरुआती काल में पूरे जोश से शुरू की गई ‘चाय पर चर्चा’ का ‘काल’ भी अब बदल गया। भाजपा ने २०१४ में लोकसभा चुनावों का बिगुल बजने के बाद प्रमुख चौक-चौराहों पर ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम चलाया था। इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों से उनकी समस्याएं और नई सरकार से उम्मीदें जानने के लिए सीधा संवाद साधा जाता था। इस कार्यक्रम के जरिए बड़े-बड़े वादे किए गए, बड़े इरादे बताए गए थे। लिहाजा जनता ने भी उन पर भरोसा करते हुए ‘उम्मीदों’ का बटन दबा दिया, जिसका परिणाम हुआ कि केंद्र में भाजपा की सत्ता आ गई। इस बीच भाजपा के वादों से लोगों को पंद्रह लाख खाते में आने की आस बनीं तो कभी नौकरियों की बयार में ठंडी आह भरने का इंतजार मतदाता करने लगे। कुल मिलाकर समय बीतता गया। साढ़े चार साल पूरे हो गए। लेकिन पंद्रह लाख का इंतजार कायम है, नौकरी की बयार का भी इंतजार है, जबकि नोटबंदी ने पेटबंदी की नौबत ला दी और उससे बचे तो जीएसटी ने जोरदार झटका दिया। जब-जब मौका आया, इन साढ़े चार सालों में जनता ने सरकार को वादों की याद भी दिलाई लेकिन बात पहुंच गई ‘जुमलों’ पर कि जो कहा गया था वो जुमला था। आखिरकार जनता-जनार्दन ने भी धैर्य छोड़ दिया और तीन राज्य जिन्हें हिंदी हार्टलैंड कहा जाता है, वहां से भाजपा की सत्ता साफ हो गई। पार्टी में अंदरखाने खीझ साफ झलकने लगी लेकिन बड़े नेताओं ने इसे दबाने में चेहरे को भी आवरण दे दिया लेकिन अब सत्ता के अंतिम चतुर्थ चरण यानि रात्रिकाल में डिनर पर चर्चा की युक्ति सामने आई है, जिसमें पीएम सांसदों से ‘डिनर पर चर्चा’ करेंगे। लेकिन अब सांसद भी सांसत में हैं। उनकी सांसत है कि वे रिपोर्ट क्या दें यानि जमीनी हकीकत को बतातें हैं तो सरकार की नाकामियों का पिटारा मोदी के सामने खोलना पड़ेगा। और झूठ का पुलिंदा लेकर पीएम का महिमामंडन करते हैं तो चुनावों में खुद भी साफ हो जाएंगे यानि सांसदों के एक तरफ कुंआ है तो दूसरी तरफ खाई की गति बन गई है।