चिंदी चीनी!, चुरा रहा है हमारी मछलियां

चीनी की सेना हो या फिर उनके मछुआरे, दोनों ही चिंदीगीरी से बाज नहीं आ रहे हैं। पहले चीनी सेना हिंदुस्थान की सीमा में घुसने की हिमाकत करती थी और अब इनके मछुआरे हमारे समुद्र में आकर हमारी मछलियां चुरा रहे हैं। हाल ही में चीन से हिंदुस्थान के सागरी क्षेत्र में आई १० घातक नौकाओं को सीज कर उसमें सवार २०० लोगों से तटरक्षकों ने पूछताछ शुरू कर दी है।
बता दें कि ७ जून को ‘वायु’ चक्रवात से बचने के लिए १० मछली मारनेवाली चीनी नौकाओं ने अनुमति लेने के बाद रत्नागिरी के समुद्र में शरण ली थी। जान-माल का नुकसान न हो इसलिए उन्हें शरण दिया गया लेकिन वो कहते हैं न कि जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया। इन चीनी नौकाओं ने मछली मारना शुरू कर दिया जो कि सरासर नियमों का उल्लंघन है। चिंदी चीनियों को मछली मारते देख स्थानीय मछुआरों ने इसकी शिकायत कोस्ट गार्ड से की, जिसके बाद उनसे पूछताछ और छानबीन शुरू कर दी गई है। उक्त नौकाओं पर चीन, इंडोनेशिया और फिलीपींस के नागरिक सवार हैं। मेरीटाइम जोन्स ऑफ इंडिया ऑफ फिशिंग बाय फॉरेन वेसल्स एक्ट १९८१ के तहत कोई भी अन्य देश की नौका का हिंदुस्थानी समुद्र में आकर विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में मछली पकड़ना गुनाह है। ‘राष्ट्रीय पर्ससिएन फिशरमैन वेलफेयर एसोसिएशन’ के अध्यक्ष गणेश नखावा ने कहा, ‘चीनी नौकाओं में मछली मारने के ऐसे घातक उपकरण लगे हैं, जिनके इस्तेमाल पर कई देशों ने पाबंदी लगाई है। इसी के साथ बोट में डॉल्फिन को भांपनेवाले उपकरण भी लगाए गए हैं। मछलियों के लिए ऐसी नौकाएं बहुत ही घातक हैं और समुद्री जीवों जैसे शार्क, कछुए, डॉल्फिन के बीच असंतुलन बढ़ाने का कार्य करते हैं। न तो इनके पास वैध पासपोर्ट है और न ही मछली मारने की अनुमति, फिर भी इनकी हिम्मत देखो। इन पर सरकार को नियमों का उल्लंघन करने के जुर्म में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जांच में अब तक १९ क्रू मेंबर के पास वैध पासपोर्ट न होने की बात सामने आई है। पकड़ी गई नौकाएं फू युआन यू फ्लीट हैं।