" /> चीनी उद्योग को संकट से उबारने के लिए मोदी को पवार ने लिखा पत्र

चीनी उद्योग को संकट से उबारने के लिए मोदी को पवार ने लिखा पत्र

वित्तीय सहायता देने की है मांग
कोरोना संकट के कारण देश में तालाबंदी की घोषणा की गई है, जिसके कारण कई उद्योग एवं व्यवसायों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आर्थिक चक्र पूरी तरह से ठप्प हो गया है। ऐसा कहते हुए राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि तालाबंदी के कारण राज्य में चीनी उद्योगों के सामने एक बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है। पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चीनी मिलों को वित्तीय सहायता देने की मांग की है।

शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि 2018-19 और 2019-20 तक प्रलंबित निर्यात प्रोत्साहन भत्ते और बफर स्टॉक क्लियरिंग निधि के प्रावधान की मांग की है। साथ ही, चीनी की गारंटीकृत कीमत को ग्रेडवार बढ़ाए जाने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि यह 3,450 रुपए से 3,750 रुपए के बीच होना चाहिए और पिछले दो वर्षों में गन्ने की पिराई के लिए 650 रुपए प्रति टन की औसत से सब्सिडी प्रदान की जानी चाहिए। ऐसी मांग पवार ने की है। मित्रा समिति द्वारा सुझाए गए दो वर्षों के लिए ऋण की चुकौती को स्थगित करने के साथ-साथ कार्यशील पूंजी के बकाया को लघु अवधि के ऋणों में परिवर्तित करें, साथ ही दस वर्षों के लिए सभी प्रकार के ऋणों का पुनर्गठन करें। ऐसा पवार ने मोदी को लिखे पत्र में कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों को 2018 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित ‘लोन सबवेंशन कैंपस स्कीम’ के अनुसार इथेनॉल परियोजनाओं को भी वित्तीय सहायता देना चाहिए। ऐसा पत्र में पवार ने उल्लेख किया है।