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चीनी पुड़िया’ से पकाया जा रहा है कच्चे आमों को

इन दिनों बाजार में फलों के राजा आम की भरमार है। आंध्र प्रदेश के साथ-साथ अब मंडी में कानपुर और मलिहाबाद से भी आम की आवक शुरू हो गई है लेकिन सभी जगहों से कच्चे आम यहां आ रहे हैं। मंडी में इन्हें पकाया जा रहा है और सुर्ख पीला रंग दिया जा रहा है। जी हां, फल कारोबारियों के बीच महज पांच रुपए की ‘चीनी पुड़िया’ के नाम से मशहूर रसायन के जरिए आमों का रंग रूप बदला जा रहा है। बादामी आम हो या तोतापरी, मंडी में सभी प्रकार के आम हरे और कच्चे पहुंच रहे हैं। यहां इनके रंगरोगन का इंतजाम किया जाता है। यहां ट्रकों से पहुंचनेवाले आमों को पहले पकाया जाता है और उसके बाद इसे बाजार में उतारा जाता है। सुर्ख पीले रंग का गदराया हुआ आम हाथोंहाथ बिक जाता है। 50-60 रुपए प्रति किलो की दर से अलग-अलग किस्मों का आम बाजार में उपलब्ध है, जो घर-घर में पहुंच रहे हैं।

ऐसे पकाए जाते हैं आम
बीस किलोग्राम कच्चे आमों को प्लास्टिक की क्रेट में रखा जाता है। क्रेट में अलग-अलग स्थानों पर चार चीनी पुड़िया बगैर खोले रख दी जाती हैं। इस क्रेट को चारों ओर तथा ऊपर-नीचे से कागज से सील कर दिया जाता है। इससे बाहर की हवा अंदर नहीं जा पाती है और न ही अंदर की बाहर आ पाती है। तीन दिन बाद जब क्रेट खोली जाती है तो कच्चे हरे आमों का रंग रूप बदलकर एकदम सुर्ख पीला हो जाता है। हालांकि पहले कार्बाइड से आम पकाए जाते थे लेकिन इसमें समय ज्यादा लगता था और रंग भी एकदम सुर्ख पीला नहीं आ पाता था। इसके अलावा कार्बाइड का घोल तैयार करने में पानी की भी आवश्यकता होती थी लेकिन चीनी पुड़िया से आसानी से आम पक जाते हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग अनजान
चीनी पुड़िया का बड़े पैमाने पर आम पकाने में इस्तेमाल हो रहा है। बावजूद इसके खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को इसकी जानकारी नहीं है। विभाग के अभिहित अधिकारी राजेश कुमार दि्वेदी ने बताया कि अभी इस पुड़िया के बारे में जानकारी नहीं है लेकिन अब पता किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इथेलिन से फल पकाने की इजाजत है लेकिन खाद्य पदार्थ को इस रसायन के सीधे संपर्क में नहीं आना चाहिए। जांच की जाएगी कि चीनी पुड़िया में किस सॉल्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

आसानी से मिल जाती है पुड़िया
कारोबारियों को आम पकानेवाली पुड़िया आसानी से मिल जाती है। गोविंद चौराहे के पास तीन-चार दुकानों पर ये बेची जाती हैं। इसके अलावा मंडी के इर्द-गिर्द भी इसे बेचा जाता है। पहले ये आठ रुपए की आती थी परंतु अब महज पांच रुपए में मिल जाती है। मंडी कारोबारियों के अनुसार उन्हें नहीं मालूम कि इस पुड़िया में क्या है, परंतु बेहद कारगर है इसलिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।