" /> चीन की कुलबुलाहट!, ट्रंप का मजाक!!

चीन की कुलबुलाहट!, ट्रंप का मजाक!!

एक ओर जहां देश कोरोना संकट से जूझ रहा है, चीनी सैनिक सीमा पर हमला कर रहे हैं। यह चीन का हमेशा का काम है। संकट का फायदा उठाते हुए चीन हमेशा सीमा पर लड़ना शुरू कर देता है। चीन के राष्ट्राध्यक्ष को गुजरात बुलाकर हमारे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनकी अच्छी मेहमाननवाजी की गई थी। उन्हें ढोकला और शेव-गाठिया आदि खिलाकर खुश कर दिया गया था। चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ झूले पर झूलते हुए तस्वीरें प्रकाशित हुई थीं। इससे एक ऐसा माहौल बना कि मानो चीन का संकट हमेशा के लिए टल गया है। ये कैसा झूठ था, ये फिर साबित हो गया है। चीनी सेना लद्दाख और सिक्किम में नियंत्रण रेखा पर हिंदुस्थान की नियमित गश्त में बाधा डाल रही है। अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ जारी ही रहती है। चीनी बंदर सिक्किम के डोकलाम में भी हमले करते रहते हैं। अब एक बार फिर उन्होंने लद्दाख सीमा पर बंदूकें तान दी हैं। पूर्वी लद्दाख में ५ मई को चीनी और हिंदुस्थानी सेना के बीच झड़प हुई। इसके बाद से दोनों पक्षों में तनाव बढ़ रहा है। इन झड़पों में दोनों तरफ के सैकड़ों सैनिक घायल हो गए, यह तस्वीर अच्छी नहीं है। अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि दोनों देशों ने लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में नियंत्रण रेखा पर अपना सैन्यबल बढ़ा दिया है। चीन का दावा है कि हिंदुस्थानी सैनिकों ने लद्दाख में हमारी सीमा में घुसपैठ की है, जबकि हमारी सेना का मानना ​​है कि जिस हिस्से में हम गश्त कर रहे हैं, वह हमारा है। इस विवाद में सबसे बड़ा मजाक ये है कि हिंदुस्थान-चीन सीमा विवाद में डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थ की भूमिका अदा करने की इच्छा जताई है। ‘मैं दोनों देशों के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार हूं’, ट्रंप ने ऐसी घोषणा कर डाली। ट्रंप की मध्यस्थता करने की इच्छा हास्यास्पद है। दरअसल, कोरोना वायरस संकट के कारण चीन और अमेरिका के बीच ही सबसे बड़ा तनाव पैदा हुआ है। ट्रंप घोषित तौर पर आरोप लगाते हैं कि चीन की प्रयोगशाला में कोरोना वायरस बना और दुनिया पर आक्रमण किया गया। ट्रंप ने कोरोना वायरस को ‘चीनी वायरस’ कहा है। इसलिए चीनी राष्ट्राध्यक्ष बहुत गुस्से में हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन के हाथ की कठपुतली है, ऐसा कहते हुए ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की सहायता में कटौती कर दी है। क्या यह मजाक नहीं है कि ऐसा बोलनेवाले ट्रंप हिंदुस्थान-चीन के बीच मध्यस्थता की बात करते हैं? सच कहें तो फिलहाल चीन और अमेरिका के बीच ही मध्यस्थता करने की नौबत आन पड़ी है, उनके बीच के संबंध इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं। चीन के कई प्रांत अभी-अभी कोरोना वायरस के संकट से उबरे हैं, लेकिन अमेरिका में कोरोना वायरस का कहर खत्म नहीं हुआ है। सवाल यह है कि अपने देश में इस तरह के संकटों का सामना करते समय चीन को सीमा पर दबंगई और अमेरिका को मध्यस्थता की बात कैसे सूझती है? अमेरिका यहां चीन और हिंदुस्थान के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार है। वहीं, ट्रंप संयुक्त राष्ट्र में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में चीनी कब्जे वाले तिब्बत को मान्यता देने के लिए एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। अगर यह दांव सफल रहा तो यह चीन के लिए बड़ा झटका होगा। हिंदुस्थान-चीन संघर्ष में तिब्बत भी एक मुद्दा है। चीन की सोच अमानवीय है। चीनी चमगादड़, छिपकली, सांप और कॉकरोच खाते हैं। इसलिए उनके दिमाग में यह जहर उबल रहा होता है। चीन के साथ हमारी सीमा लगभग पांच हजार मील लंबी है। कश्मीर से लेकर ब्रह्मदेश तक। इसलिए झगड़े और विवाद के मुद्दे एक सिरे से दूसरे सिरे तक समय-समय पर उबलते रहते हैं। कश्मीर-लद्दाख के १२,००० वर्ग मील के क्षेत्र पर दमन और लफंगेगिरी करके चीन ने कब्जा किया हुआ है। दूसरी तरफ ब्रह्मदेश अर्थात म्यांमार के पास भूटान से लेकर ब्रह्मदेश तक की सीमा को मैकमोहन रेखा का नाम दिया गया है। इस सीमा मामले को चीन ने हमेशा लटका कर रखा और यह विवादित रहा। जिस समय तिब्बत स्वतंत्र था, तिब्बत ने इस सीमा को स्वीकार किया था, लेकिन चीन ने हिंदुस्थान के सामने तिब्बत को निगल लिया। इसलिए तिब्बत दोनों देशों के बीच एक नए विवाद का विषय बन चुका है। तत्कालीन चीनी तानाशाह माओ ने तिब्बत में लाल सेना लेकर आक्रमण किया और उस पर कब्जा कर लिया। दुनिया हाथ मलती रह गई। कोरोना संकट के कारण अमेरिका, हिंदुस्थान और यूरोप जैसे देशों की अर्थव्यवस्था चरमराई लेकिन चीन के मामले में ऐसा नहीं है। ऐसी खबरें हैं कि चीन से अमेरिकी कंपनियां अपना व्यवसाय समेट रही हैं। सही या गलत साबित होना बाकी है, लेकिन कोरोना की अर्थी पर से उठे चीन की कुलबुलाहट बनी हुई है। ऐसे में कि जब दुनिया कोरोना के साथ संघर्ष कर रही है, उस देश का साम्राज्यवाद और कट्टरता का कीड़ा कायम है। ऐसे में ट्रंप द्वारा मध्यस्थता का ‘ऑफर’ तीसरे दर्जे का मजाक है। ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर भी मध्यस्थता करने की पेशकश की थी। हिंदुस्थान ने वो नहीं सुना। ट्रंप पहले अपने देश को कोरोना संकट से बचाएं। चीन को रह-रहकर इस तरह के झटके आते रहते हैं। इसके लिए हिंदुस्थानी सेना सक्षम है। हिंदुस्थान-चीन सीमा पर वास्तव में क्या हो रहा है, हमारे रक्षा मंत्री को एक बार जनता को विश्वास में लेकर बताना चाहिए!