" /> चीन पर आग बबूला हुए विद्यार्थी, चीनी उत्पादनों के बहिष्कार का लिया संकल्प

चीन पर आग बबूला हुए विद्यार्थी, चीनी उत्पादनों के बहिष्कार का लिया संकल्प

चीन की नीतियों का समर्थन न करें
भूतपूर्व सैनिक राजदेव पांडेय ने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री ने जवानों का मनोबल बढ़ाने व चीन को कड़ा संदेश देने के लिए लद्दाख का दौरा किया। इसमें उन्होंने ग्यारह हजार फीट की ऊंचाई से चीन को स्पष्ट संदेश दिया कि हम बांसुरी वाले श्रीकृष्ण को पूजते हैं तो सुदर्शन चक्रधारी श्रीकृष्ण की भी पूजा-अर्चना करते हैं। उनका यह वक्तव्य ये बताने के लिए काफी है कि ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए भारत हमेशा तैयार है। आज भारत को चीन के किसी भी नीतियों का समर्थन नहीं करना चाहिए। चाहे उसकी आर्थिक नीतियां हों या विस्तारवादी नीतियां। हमें सभी मोर्चों पर चीन के पुरजोर विरोध की नीति अपनानी चाहिए। चीनी सामानों का बहिष्कार देश में सशक्त सरकार होने की गवाही देता है। देशवासी सरकार के सहयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

चीनी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का सिलसिला पूरे देश में जारी है। हर क्षेत्र व तबके के लोग चीन का विरोध कर रहे है। इसी कड़ी में अब देश के विद्यार्थी भी चीन के खिलाफ आग बबूला होकर सड़क पर उतर आए है। विद्यार्थियों ने चीनी उत्पादनों के बहिष्कार का संकल्प लिया हैं। विद्यार्थियोेंं का मानना है कि अब समय आ गया है कि भारत चीन के साथ सभी प्रकार के संबंधों को खत्म करे तथा हर मोर्चे पर उसका विरोध हो।
महात्मा गांधी केविवि में गांधियन पीस स्टडीज की छात्रा अनुराधा कुमारी का कहना है कि चीन की चालाकी का मुंहतोड़ जवाब देना बहुत जरूरी हो गया है। भारत कभी स्वाभिमान से समझौता नहीं करता है और ना कभी करेगा। कोई भी अगर गलत नजर से देखने की हिमाकत करेगा तो देश की शक्तिशाली सेना उसको उसी की भाषा में जवाब देगी। बीकॉम के छात्र आदित्य पटेल का कहना है कि चीनी व विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करके हम भारत को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। इसके लिए सिर्फ सरकार हीं नहीं बल्कि हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। इससे देशवासियों को रोजगार के साथ हीं स्वदेशी वस्तुएं इस्तेमाल हेतु प्राप्त होंगी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के उजाला कुमार का कहना है कि चीन की सबसे बड़ी ताकत उसका व्यापार है। ऐसे में हम सभी भारतवासी चीन को आर्थिक क्षेत्र में सबक सिखाते हुए चीनी वस्तुओं का पूर्णत: बहिष्कार कर चीन को सबक सिखा सकते हैं। इसके लिए देशवासियों को संकल्प लेना होगा कि चीनी उत्पादों का इस्तेमाल बंद करेंगे और स्वदेशी वस्तुएं हीं खरीदेंगे। सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले विद्यार्थी विभाष राय ने बताया कि चीन को सबक सिखाने के लिए सबसे पहले उसकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करना होगा। हमारे देश की सशक्त सरकार ने ५९ चानी ऐप को बैन करने का घोषणा कर दिया है, जो बहुत सराहनीय कदम है। इसके साथ हीं चीन निर्मित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का भी बहिष्कार होना चाहिए।
चीनी सामान के बायकॉट का निर्णय
सुगौली नगर पंचायत के मुख्य बाजार में सुगौली व्यवसायी संघ ने बैठक कर चीनी सामानों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। संघ के प्रखंड अध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि चीनी सेना की ओर से गलवान घाटी में किए गए कृत्य के विरोध में शहर के सभी व्यापारियों का गुस्सा है। हमें अपनी सेना के साथ खड़ा होकर देश को मजबूती प्रदान करना चाहिए। इसको देखते हुए चाइनीज वस्तुओं की खरीद-बिक्री का बहिष्कार कर हम सभी देश सेवा में अपना अपना योगदान देंगे।

अपनो के टैलेंट को बढ़ावा दें
अपने-अपने स्तर पर कोशिश ये होनी चाहिए कि जहां तक संभव हो, चीनी उत्पादों से दूर रहें और अपने परिजनों को भी यही संदेश दें। किसी भी राष्ट्र की आधारशिला उसकी आर्थिक व्यवस्था होती है। ये अक्लमंदी बिल्कुल नहीं है कि चीन के उत्पादों का इस्तेमाल कर हम उनकी आर्थिक व्यवस्था को सशक्त करें। जब चीन खुद गूगल, व्हॉट्सऐप, उबेर, फेसबुक जैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स का बहिष्कार कर सकता है तो हमें भी इस संदर्भ में आत्मनिर्भर बनते हुए अपने लोगो के टैलेंट को बढ़ावा व सहयोग देना चाहिए। – रफीक शेख

पहले सरकार आयात बंद करे
सबसे पहले सरकार को चाहिए कि वह खुद चीन से व्यापार बंद करे। सैकड़ों-हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट सरकार उन्हें देती है और आम जनता ४० रुपए के झालर और ५० रुपए की पिचकारी खरीदे कि नहीं इसको लेकर असमंजस में रहती है। सरकार ही क्यों नहीं चीन से आनेवाले सामानों पर रोक लगा देती? चीनी वस्तुओं से आयात पर रोक लगा देनी चाहिए। चीन से आयात लाइसेंस व अनुबंध आदि रद्द होने चाहिए। -एम. ए. खालिद

हिंदुस्थान सक्षम है
हिंदुस्थान-चीन की सीमा लद्दाख में २० भारतीय जवानों के बलिदान के बाद देश की जनता का खून खौल उठा है। चीन दोगला है और दोगले चीन को उसी की भाषा में जबाब देना होगा। चीन अब भी हिंदुस्थान को सन १९६२ का हिंदुस्थान समझ रहा है। उसे ये मालूम होना चाहिए कि ये १९६२ का नहीं, २०२० का हिंदुस्थान है। चीन को सबक सिखाने में अब हिंदुस्थान सक्षम है। उसे मुंहतोड़ जबाब देना ही होगा। – यास्मीन हुसैन

हम आत्मनिर्भर बनेंगे
चीन के लिए भारत एक बहुत बड़ा बाजार है, जिससे वो हर साल लाखों करोड़ों का सौदा करता है। भारत के लगभग हर सेक्टर में चीन का सामान मौजूद है, लेकिन अब इस मौजूदगी को घटाने के लिए देश में कई बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। खुद देश का व्यापारी समूह चीन के खिलाफ एकजुट होकर एक बहुत बड़े अभियान का आगाज करने जा रहा है। हम प्रतिज्ञा लेते हैं कि हम आत्मनिर्भर बनेगें और चीनी सामान का बहिष्कार करेंगे और इस युद्ध में हिस्सा लेकर भारत को जीत दिलवाएंगे। – शबनम डिसूजा

विकल्प खोजना होगा
हम चीनी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान कर रहे हैं लेकिन क्या हमारे पास इसका कोई विकल्प है? उदाहरण के लिए कल मैं अपने बच्चों के लिए खिलौने खरीदने गया था। चीनी निर्मित खिलौने भारत द्वारा बनाए गए खिलौनों की तुलना में आधी कीमत के थे। यह आश्चर्य की बात है कि भारत में निर्मित सामान स्वयं भारतीयों के लिए महंगा है। भारत को चीनी उत्पाद की तरह सस्ती वैकल्पिक व्यवस्था ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए। फिर चीनी उत्पादों व सेवाओं पर प्रतिबंध लगाना या उनका बहिष्कार करना आसान होगा। – दीपक गुप्ता

चीन को दूसरी भाषा में समझाओ
चाइना को आम भाषा में चीनी कहते हैं। जब चीनी जरूरत से ज्यादा हो जाती है तो मधुमेह का रूप ले लेती है। उसी प्रकार चाइना हमारे लिए मधुमेह बनता जा रहा है। जब मर्ज दवा-दारू से ठीक ना हो तो अंग काटने पड़ते हैं। चाइना जब बातचीत की भाषा नहीं समझता तब दूसरा रास्ता अपनाना ही देश हित है। भारत सनातन देश है। सदैव सबको साथ लेकर चला है और हमारी पहले आक्रमण ना करने की नीति है। इसका दुरुपयोग चीन जैसे धूर्त देश करते हैं। समय आ गया है कि चीन की आर्थिक नाकाबंदी करके उसे कमजोर किया जाए। सरहद पर तो हमारे सिपाही काफी हैं ही। – राकेश राजभर

जवाब देने का समय आ गया है
हमें लगता है कि अब चीन को मुंहतोड़ जवाब देने का समय आ गया हैं। इसके लिए केंद्र सरकार को चीन से समस्त व्यापारिक संबंध समाप्त कर लेना चाहिए। साथ ही हमारा भी दायित्व है कि हम आज से ही चीन निर्मित वस्तुओं का बहिष्कार करें। साथ ही सेना को खुली छूट भी मिलनी चाहिए कि वो जरूरत के हिसाब से बल का प्रयोग कर सके। – राहुल सरकार

सैनिकों की शहादत बर्दाश्त नहीं
सरकार किसी की भी हो , हम देश के साथ हैं। चीन की तानाशाही बढ़ती जा रही है। हमारा देश कमजोर नहीं है। चीन को भी बार बार १९६७ याद रखना चाहिए। भारतीय सीमा में घुसपैठ और सैनिकों की शहादत बर्दाश्त से बाहर होती जा रही है। – जाफर शेख

हिंदुस्थान जवाब देगा
चीन की गलती की सजा उसे मिल चुकी हैं। चीनी सेना पीछे लौट चुकी हैं। इसे हिंदुस्थान की ताकात कहते हैं। आगे जब भी चीन गलती करेगा इसी प्रकार उसे हिंदुस्थान जवाब देगा। – संकेत गंभीरे

चीन की सेना पानी कम
हिंदुस्थान के सामने चीन की बौनी सेना कुछ मिनट भी ढेर हो जाएगी। चीन भले ही हथियार के मामले में हिंदुस्थान से आगे हो लेकिन हिंदुस्थानी सेना के सामने चीन की सेना पानी कम है। – प्रवीण सोनार

हिंदुस्थान के सामने चीन कुछ नहीं
चीन ने आखिरकार अपने कदम पीछे हटा लिए है। यह साबित करता है कि चीन की ताकत हिंंदुस्थानी ताकत के आगे कुछ भी नहीं है।
– प्रियंका पाटील

हमें सजग रहना चाहिए
पिछले कुछ महीनों से एलएसी पर तनातनी चालू थी। उसको ध्यान में रखते हुए हमें और सजग रहना चाहिए था क्योंकि १९६२ की लड़ाई को हमें भूलना नहीं चाहिए उन्होंने तब भी गद्दारी की थी आज भी गद्दारी किए हैं। इसमें हमारे जवान शहीद हुए। शहीद हुए सभी जवानों को नमन करता हूं।भारत सरकार से अपील करता हूं कि सेना को खुली छूट दी जाए। – अफजल खान

खत्म हम करेंगे
चीन ने भारत को समझ क्या रखा है। शुरू उसने किया है खत्म भारत के जवान करेंगे। एक बार सरकार आर्मी को छूट दे दे उसके बाद हमारे जवान बता देंगे की इंडियन आर्मी क्या चीज है। आइंदा चीन वाले हिम्मत नहीं करेंगे भारत के सर जमीन पर कदम रखने की।
– फिरोज खान