चीन-पाकिस्तान के लिए  काल बनेगा काली!

पुलवामा आतंकी हमले के बाद हिंदुस्थान ने इस बार कड़ा रुख क्या अपनाया पाकिस्तान खौफजदा हो गया है। पहले ऐसे मौकों पर पानी पी-पी कर परमाणु बम की धमकी देनेवाला पाकिस्तान अब सुलह-समझौते के लिए रिरिया रहा है। पाकिस्तान के पीएम इमरान बार-बार समझौते की पेशकश कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कह दिया है कि ‘भारत इस बार कुछ बड़ा करनेवाला है! ’आखिर ऐसा क्या हो गया जो पाकिस्तानी फौज के साथ ही मीडिया में भी हड़कंप मचा हुआ है? कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स पर यकीन करें तो भारत के पास इस समय एक ऐसा घातक हथियार आ चुका है जो अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों के पास नहीं है। इस संहारक गोपनीय हथियार का नाम ‘काली’ बताया जा रहा है।
अमेरिका ने लेजर आधारित हथियारों का विकास किया है जो अचूक है। पर ‘काली’ कोई लेजर हथियार नहीं बल्कि एक शक्तिशाली इलेक्ट्रॉन माइक्रोवेब हथियार है। खबरों के अनुसार इसे डीआरडीओ और बार्क ने मिलकर विकसित किया है। यह काफी शक्तिशाली तरंगे पैदा करता है और दुश्मन के किसी भी लड़ाकू विमान और हमलावर मिसाइल को नष्ट कर सकता है।
पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दे दी है कि बस बहुत हो गया। हालांकि सरकार ने युद्ध या हमले की कोई बात नहीं की है पर इस बार भारत के कड़े तेवर देखकर न सिर्फ पाकिस्तान के होश फाख्ता हो गए हैं बल्कि उसकी पतलून भी गीली हो चुकी है। आतंक की पैâक्ट्री पाकिस्तान अब आतंकवाद पर बातचीत की पेशकश करने लगा है। उसकी वो हेकड़ी हवा हो चुकी है जब उफा घोषणापत्र के बाद एनएसए स्तर की बातचीत टूट गई थी। आखिर इस खौफ का कारण कहीं ‘काली’ जैसा घातक गोपनीय हथियार तो नहीं जिसका जिक्र कुछ मीडिया व सोशल मीडिया में किया जा रहा है? यह एक ऐसा घातक गोपनीय हथियार है जो दुश्मनों की कहानी खत्म करने में सक्षम है।
काली हथियार दुश्मन के किसी भी हमले को न सिर्फ मार गिराने में सक्षम है बल्कि यह दुश्मन के क्षेत्र में हमला भी कर सकता है। काली का पूरा नाम ‘किलो एंपीयर लीनियर इंजेक्टर’ है। यह शक्तिशाली इलेक्ट्रॉन तरंगों से अपने लक्ष्य पर स्ट्राइक करता है। आज का वॉर हाइटेक हो गया है और काली की शक्तिशाली तरंगे दुश्मन के किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को नष्ट करने में सक्षम बताई जाती हैं। इससे दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला भी करके उसे तहस-नहस किया जा सकता है।

‘हां, ये सच है कि यह सवाल पूछा गया था पर रक्षामंत्री ने इस बारे में न तो स्वीकार किया था और न ही इनकार किया था। बाकी सारा अंदाजा लगानेवाली बात है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि इस क्षेत्र में हम सोच से कहीं काफी आगे बढ़ चुके हैं। जहां तक हथियारों के विकास की बात है तो आज हम दुनिया के टॉप ३ देश में हैं जो नए-नए शोध करके हथियारों का विकास कर चुके हैं या कर रहे हैं। ऐसा दुनिया के सभी बड़े व सक्षम देश करते हैं पर कोई यह बात बताता नहीं क्योंकि ये चीजें गोपनीय होती हैं।

 -स्क्वॉड्रन लीडर 
अनिल सहगल

 

कुछ लोगों का कहना है कि ऐसा कोई हथियार नहीं है और यह कुछ लोगों की बकवास है। मगर दावा है कि इस बारे में २०१५ में संसद में सवाल भी पूछा गया था और तब रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने गोपनीय सुरक्षा मामलों का हवाला देकर न तो इसे स्वीकार किया था और न ही इनकार। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि ऐसा कोई गोपनीय हथियार हिंदुस्थान के पास है, जिससे दुश्मन खौफ में है।

अदृश्य हथियार
काली के बारे में दावा किया गया है कि यह जब स्ट्राइक करती है तो कोई परछाई तक नहीं दिखती। दुश्मन के इलाके में दबे पांव ऐसे घुसती है कि उसको न तो दुनिया का कोई रडार ही पकड़ पाता है और न ही कोई इसके कदमों की आहट सुन पाता है। दुश्मन के इलाके में तबाही मचाने के बाद यह वहां अपनी मौजूदगी के सबूत तक नहीं छोड़ती है।
हिंदुस्थान से ज्यादा काली की चर्चा पाकिस्तान में होती है क्योंकि जब यह अपना रौद्र रूप धारण करती है तो वह जगदंबा काली से कम संहारक नहीं होती।

काली का कोहराम!
इस बात का दावा किया जाता है कि काली हथियार अपने एक गोपनीय परीक्षण में सियाचिन में कोहराम मचा चुका है। ५ अप्रैल २०१२ में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के सियाचिन स्थित ग्यारी सेक्टर में भयानक हिमस्खलन हुआ था और ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा गिर गया था, जिसमें पाकिस्तान आर्मी का बेस वैंâप पूरी तरह तबाह हो गया था और उसके करीब १४० सैनिक भी मारे गए थे। कुछ पाकिस्तान के रक्षा वैज्ञानिकों का दावा है कि बर्फ का इतना बड़ा पहाड़ तब तक नहीं गिर सकता था, जब तक कि उसको काटा न जाए। उनका शक हिंदुस्थान पर है कि उसने अपने ‘काली’ हथियार के जरिए इसको काटकर गिराया है। बताया जाता है कि उस वक्त विमान से काली के जरिए ग्लेशियर पर इलेक्ट्रॉन तरंगें डालकर ३०० किमी प्रति घंटे का तूफान पैदा किया गया था जबकि पाकिस्तानी सेना का दावा है कि पूरा ग्लेशियर एकाएक पिघल कर नीचे आ गिरा, जो आमतौर पर नहीं होता है।

कितना घातक?
गोपनीय हथियार विमान और मिसाइल के इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिक सर्किट और चिपों को इलेक्ट्रॉन माइक्रोवेव तरंगों के शक्तिशाली प्रहार से फेल कर सेकंडों में गिरा सकता है। यही नहीं, इसकी तरंगों के जरिए यूएवी और सेटेलाइट को भी गिराया जा सकता है।
हिंदुस्थान १९८९ से इस गोपनीय काली मिशन पर अनुसंधान कर रहा है। वर्ष १९८५ में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. आर. चिदंबरम ने इसकी योजना बनाई थी। डीआरडीओ इस मिशन में बार्क के साथ मिलकर काम कर रहा है। फिलहाल इस तकनीक का इस्तेमाल अन्य कार्यों में हो रहा है। भविष्य में इस तकनीक के जरिए अंतरिक्ष में जासूसी की जा सकेगी और दुश्मन के संचार और रॉकेट मिसाइल तंत्र को घर बैठे ठप किया जा सकेगा।

माइक्रोवेब गन
काली का पूरा नाम है ‘किलो एंपीयर लीनियर इंजेक्टर’। यह ‘एसीलिरेटर इलेक्ट्रॉन’ की ऊर्जा को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन में बदल इसे हाई एनर्जी वाली तरंगों में बदल देता है। ‘काली’ लेजर गन नहीं बल्कि यह हाई पावर माइक्रोवेव गन है, जो २०० गीगावाट ऊर्जा पैदा कर सकती है। इसके कुछ प्रोटोटाइप तैयार भी किए जा चुके हैं। काली १००० और काली ५००० बन चुके हैं और काली १०००० का काम चल रहा है। पूरी हथियार प्रणाली का विकास अभी भी जारी है। यह ऐसा हथियार है कि अदृश्य तरंगों के जरिए दुश्मनों के लड़ाकू विमानों, रॉकेट और मिसाइलों को पल में खाक कर देगा। कहा तो यह तक जा रहा है कि इस तकनीक से अंतरिक्ष में तैर रहे उपग्रहों को भी निशाना बनाया जा सकेगा।

सोशल मीडिया व कुछ सोशल मीडिया पर दावा
गोपनीय हथियार है ‘काली’
पूरा नाम ‘किलो एंपीयर लीनियर इंजेक्टर’
लेजर गन नहीं बल्कि हाई पावर माइक्रोवेब गन
२०० गीगावॉट ऊर्जा पैदा करने में सक्षम
‘काली’ ५००० तैयार, ‘काली १०००० का विकास जारी
अदृश्य तरंगों से करता है अटैक