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 चीन सीमा के कई क्षेत्रों में अभी भी तनाव कायम 

लद्दाख में चीन से सटी एलएसी पर अभी भी कई इलाकाें में दोनों पक्षों के बीच तनातनी का माहौल है। समझौतों के बावजूद चीनी सेना आक्रामक रूख अपनाते हुए उकसाने वाली कार्रवाईयां कर रही है। दरअसल दोनों सेनाओं के बीच हुए समझौतों के बावजूद चीन ने फिलहाल उन क्षेत्रों को पूरी तरह से खाली नहीं किया है जहां विवाद चल रहा है। कई इलाकों में वह कुछ मीटर पीछे हट कर जम गई थी। तो कई इलाकों में वह आ-जा रही है।

एक सेनाधिकारी के बकौल, भारतीय पक्ष भी समझौता तोड़ने पर मजबूर हो सकता है क्योंकि लद्दाख के कई इलाकों मंें चीनी सेना की मौजूदगी भारतीय पक्ष के लिए खतरा साबित हो सकती है। वे मानते थे कि चीनी सेना की इन हरकतों और समझौतों का पालन न करने की परिस्थिति में भारतीय सेना ने भी अब सर्दियों में भी लद्दाख के इन सेक्टरों में डटे रहने और भारतीय सीमा की रक्षा करने की तैयारियां आरंभ कर दी हैं।

इन तैयारियों के लिए सियाचिन व करगिल में इस्तेमाल किए जाने वाले तम्बुओं को गाड़ा जा चुका है जो सैनिकों को शून्य से 40 डिग्री नीचे के तापमान में भी गर्मी का अहसास करवाते हैं। ठीक इसी प्रकार के बंकरों का निर्माण भी तेज किया जा चुका है।

सेना के मुताबिक, लद्दाख सेक्टर में करीब आठ स्थानों पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच टकराव की स्थिति अभी भी है। दरअसल चीनी सेना इन स्थानों से पीछे हटने पर हुए समझौतों के बावजूद टालमटोल की रणनीति अपनाए हुए है। पैंगांग झील के पीछे के किनारांे पर 8 फिंगर अर्थात हाथों की 8 अंगुंलियों की तरह वाली पहाड़ी श्रृंख्ला पर चीनी सेना काबिज है। इन्हें भारतीय सेना पीपी के नाम से पुकारती है अर्थात पैट्रोलिंग प्वाइंट और चीनी सेना फिंगर 1 से 8 के नाम से।
दौलत बेग ओल्डी की ओर जाने वाली सड़क के किनारों पर भी चीनी सेना लगातार गश्त करते हुए भारतीय इलाकों के लिए खतरा पैदा कर रही है जबकि देपसांग तथा कुछ और इलाकों में वह पूरी तरह से मोर्चाबंदी किए हुए है। रक्षाधिकारी मानते थे कि चीनी रवैये से यही लगता है कि लद्दाख सीमा का विवाद लंबा चलेगा और ऐसे में यही कारण था भारतीय सेना ने बंकर बनाने, खंदकें खोदने तथा बैरकों के निर्माण के कार्य में तेजी लाई है। हालांकि उनकी सबसे बड़ी चिंता टैंकों और तोपखानों की है जिन्हें भयानक ठंड से बचाने की खातिर उनकी लगातार फायरिंग प्रैक्टिस कैसे की जाए, यह सवाल उनके लिए यक्ष प्रश्न बन गया था।

ऐसे विवाद कई पैट्रोलिंग प्वाइंटों पर हैं। कई इलाकों में हालांकि समझौतों के अनुरूप चीनी सेना ने कदम पीछे हटाए जरूर, पर वे नगण्य ही माने जा सकते हैं। गलवान वैली में वह एक किमी पीछे तो गई पर उसने बफर जोन बनवा कर एलएसी को ही सही मायने में एक किमी भारतीय क्षेत्र में धकेल दिया।

फिंगर 4 के इलाके को ही लें, चीनी सेना मात्र 800 मीटर पीछे हट कर पहाड़ियों पर लाभप्रद स्थिति में आ डटी और वहां से गुजरने वाल भारतीय सेना के गश्ती दल उसके सीधे निशाने पर आ गए। नतीजा सामने है। सेना के शब्दों में गश्त फिलहाल अस्थाई तौर पर स्थगित की गई है। उनके मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया ताकि चीनी सेना समझौते का पालन कर सके और उनकी वापसी की कार्रवाई के दौरान किसी पक्ष की ओर से कोई उकसावे वाली कार्रवाई न हो सके।
ऐसा ही दौलत बेग ओल्डी तक जाने वाली सड़क पर भी है। वहां भी भारतीय गश्त नहीं है। चीनी सेना पहले ही इस सड़क पर होने वाली भारतीय सेना की गश्त से खुश नहीं थी। वह कई बार इस पर आपत्ति जता चुकी थी। और अब जबकि चीनी सेना को पीछे हटाने के लिए हुए समझौतों के अनुरूप, भारतीय सेना को भी कई इलाकों में पीछे हटना पड़ा पर चीनी सेना नहीं हटी।