चोरी-चोरी-चुपके चुपके: सरकारी बैंकों ने साढ़े तीन साल में उड़ाए १० हजार करोड़

वर्ष २०१४ लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और उसके पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को अच्छे दिन तथा खाते में १५ लाख रुपयों के आने का सपना दिखाया था। इन सपनों में खोए करोड़ों लोगों ने मोदी सरकार के कहने पर थोक में जनधन खाते खुलवा लिए। लोगों के खाते में १५ लाख रुपए तो नहीं आए लेकिन अलग-अलग नियमों एवं सेवाओं  के नाम पर बैंकों ने ग्राहकों के खाते से करोड़ो रुपए जरूर उड़ा लिए।
बता दें कि संसद भावन में पेश किए गए डाटा के मुताबिक़ सरकारी बैंकों ने करीब साढ़े तीन साल में लोगों के खाते से १०,००० करोड़ रुपए की वसूली की है। बैंकों ने ये वसूली उन ग्राहकों से ही है, जिन्होंने अपने बैंक में निर्धारित न्यूनतम राशि से कम की राशि रखी है। इसी के साथ बैंकों ने उन एटीएम धारकों से भी पैसे वसूले हैं, जिन्होंने बैंक द्वारा निर्धारित मुफ्त ट्रांसेक्शन की संख्या से ज्यादा बार पैसे निकाले हैं। गौरतलब हो कि सांसद दिब्येंदु अधिकारी के एक सवाल के जवाब में ये आंकड़ें सदन में पेश किए गए हैं। इस मामले में मंत्रालय का कहना है, ‘भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को उनके बोर्ड की मंजूरी के हिसाब से विभिन्न सेवाओं के बदले एक निश्चित राशि वसूलने का अधिकार दिया हुआ है। बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा वसूल की जानेवाली राशि उचित हो न कि सेवाओं को प्रदान करने की औसत लागत से अधिक।’ मंत्रालय ने इस बारे में बताया कि रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार देश के ६ महानगरों- मुंबई, नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बंगलुरु और हैदराबाद में एटीएम से पैसे निकालने के लिए अपने ही बैंक के एटीएम से ५ बार ५ ट्रांजैक्शन प्रâी रखे गए हैं, वहीं अन्य बैंक से ३ ट्रांसेक्शन ही मुफ्त हैं। इस नियम के आधार पर भी बैंक ने मुफ्त ट्रांसेक्शन के बाद किए ट्रांसेक्शन पर प्रति ट्रांसेक्शन २० रुपए की वसूली की है।