चौथी बोट किसकी? डूब गई नाव, प्रशासन में कांव-कांव

अरब सागर में प्रस्तावित छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक की आधारशिला में शरीक होने जा रही एक बोट परसों शाम बुधवार को पलट गई थी। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कुल चार बोट गई थीं। इसमें से चौथी बोट ‘एमआरएम-१’ चट्टानों से टकराकर डूब गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की जान भी चली गई। दुर्घटना में डूबी इस बोट को लेकर अब प्रशासन में कांव-कांव शुरू हो गई है। कार्यक्रम के लिए तीन ही बोट ली गई थी पर वहां चौथी बोट भी आ गई थी जो डूब गई। यह चौथी बोट किसकी थी? इस पर सवार लोग कौन थे? इसकी जांच अब शुरू हो गई है। बोटकांड की यह जांच पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा उठाए गए सवालों पर शुरू हुई है। पीडब्ल्यूडी ने इस कार्यक्रम के लिए सिर्फ २ बोट ही तैनात की थी जबकि तीसरी बोट मेरीटाइम बोर्ड द्वारा वीआईपी सहित सरकारी अधिकारियों के लिए मुहैया कराई गई थी। हालांकि राज्य के मुख्य सचिव डी.के. जैन कार्यक्रम में ४ बोट होने का दावा तो कर रहे हैं लेकिन चौथी बोट सरकार द्वारा मुहैया कराने या फिर किसी नेता द्वारा उपलब्ध कराए जाने की बात का स्पष्ट उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। पीडब्ल्यूडी ने अब कोस्टगार्ड, मेरीटाइम बोर्ड और मुंबई पोर्ट ट्रस्ट से चौथी बोट का खुलासा मांगा है।
चौथी बोट सुरक्षा में सेंध!
अरब सागर में प्रस्तावित छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक की आधारशिला कार्यक्रम में जा रहे एक बोट के डूबने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सरकार ने कार्यक्रम के लिए ३ ही बोट लिए थे पर वहां कुल चार बोट मौजूद थे। इन्हीं में से एक बोट डूब गया जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। चौथी बोट को लेकर उठे सवाल पर एक बार फिर सुरक्षा में सेंध का प्रश्न खड़ा हो गया है?
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई हमेशा आतंकियों की सॉफ्ट टारगेट पर रही है। मुंबई में २६/११ आतंकी हमला भी समुद्री मार्ग से हुआ था। समुद्री सुरक्षा की खामियों की ओर सरकार का ध्यान मछुआरे कई बार आकर्षित करा चुके हैं। बता दें कि पर्यावरण विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद बुधवार से अरब सागर में छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक के निर्माणकार्य की औपचारिक रूप से शुरुआत होनेवाली थी। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चार बोट पर सवार होकर अधिकारियों सहित ४० लोग जा रहे थे। इन्हीं में से एक बोट चट्टान से टकरा गई और डूब गई। इस बोट में शिव संग्राम के कार्यकर्ता सहित कुछ अधिकारी शामिल थे। दुर्घटनाग्रस्त हुई इस बोट के कार्यक्रम में उपस्थिति को लेकर खुद सार्वजनिक निर्माणकार्य मंत्री चंद्रकांत पाटील के पीडब्ल्यूडी विभाग ने उठाई है। पीडब्ल्यूडी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की बातों पर अगर भरोसा करें तो इस कार्यक्रम के लिए मुंबई पोर्ट ट्रस्ट से ७० यात्रियों की क्षमतावाली दो बोट की अनुमति ली गई थी। मानस-३ और मानस-४ इन दो बोट में से मानस-३ में तकनीकी खराबी आने के कारण उसे कार्यक्रम स्थल पर नहीं ले जाया गया। इसके बदले पत्रकारों के लिए `मालदार’ नामक बोट का इस्तेमाल किया गया। तीसरी बोट महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड द्वारा प्रोटोकॉल के तहत सरकारी अधिकारियों और वीआईपी की लिए मुहैया कराई गई थी। हादसे के समय वीआईपी बोट और पीडब्युडी की दोनों बोट सुरक्षित थी जबकि चौथी बोट एमआरएम-१ दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें करीब २५ लोग सवार थे। बताया जाता है कि दुर्घटनाग्रस्त हुई बोट में सुरक्षा के लिहाज से सभी सुरक्षा उपकरणों का अभाव था। इस हादसे का सारा ठीकरा अब बोट के कप्तान पर डाला जा रहा है। २ इंजिनवाले इस बोट के कप्तान के पैâसले की भूल के कारण दुर्घटना होने का आरोप लग रहा है। बताया जाता है कि जिस इलाके में हादसा हुआ है उस इलाके को प्रांग्स रीफ लाइट हाऊस के नाम से जाना जाता है और यह चट्टानी इलाका है। इसलिए छत्रपति शिवाजी के प्रस्तावित स्मारक तक पहुंचने के लिए कप्तान लंबे मार्ग को चुन सकता था लेकिन कप्तान ने ऐसा नहीं किया।