" /> छत्रपति की शान का प्रतीक शिवनेरी किला

छत्रपति की शान का प्रतीक शिवनेरी किला

अगर आप किला घूमने के साथ ही उसके इतिहास को देखना और समझना चाहते हैं तो महाराष्ट्र में इनकी कोई कमी नहीं। बेशक इनमें से बहुत सारे किले अब जर्जर हो चुके हैं लेकिन कई किले ऐसे भी हैं, जिनकी खूबसूरती आज भी बरकरार है। इन्हीं में से एक है शिवनेरी किला। पहाड़ी पर बना ये किला महाराष्ट्र राज्य के पुणे में जुन्नर गांव के पास है। जुन्नर के आस-पास पहाड़ों में लगभग १०० गुफाएं हैं।
महाराष्ट्र के महाआराध्य छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती (तिथि के अनुसार) दो दिन पहले पूरे राज्य में धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर शिवनेरी किले के बारे में बताते हैं, जो कि वास्तुकला की शैली तथा महाराज के जन्म स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्म के समय उनके पिता शहाजी राजे ने अपनी पत्नी जीजाबाई की सुरक्षा के लिए इस किले को बनवाया था। सन १६३० में छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म यहां हुआ। छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्म के बाद तकरीबन १० साल तक शिवाजी का पालन-पोषण यहीं शिवनेरी किले में हुआ था। उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण भी यही प्राप्त किया। मुख्य किले में प्रवेश करने से पहले सात फाटकों को पार करने के विचार से पर्यटक अचंभित हो जाते हैं। किले के परिसर में पानी का एक छोटा तालाब भी है जिसे बादामी तालाब भी कहा जाता है तथा यह किले के केंद्र में स्थित है। शिवाजी की मां जीजाबाई और शिवाजी की मूर्ति यहां देखी जा सकती है। किले के पास ही एक मंदिर है।
मंदिर के अंदर जीजाबाई और शिवाजी के बचपन की मूर्तियां बनी हुई हैं। साथ ही शिवाजी का नाम देवी शिवाई के नाम पर रखा गया था, जिनका मंदिर भी किले के अंदर ही बना हुआ है। किला चारों ओर से बड़ी-बड़ी चट्टानों से घिरा हुआ है। किले के बीचों-बीच एक बड़ा-सा तालाब है जिसे `बादामी तालाब’ कहते हैं। मंदिर में पीने के लिए पानी के दो स्त्रोत है जिसे गंगा-यमुना कहा जाता है। इस किले से जमीन को ३६० डिग्री तक आराम से देखा जा सकता है। सैनिक यहां से दुश्मनों के आक्रमण का जायजा लेते थे।
आसपास घूमनेवाली जगहें
जुन्नर गुफाएं- महाराष्ट्र के संभाजी नगर जिले में स्थित जुन्नर गुफाएं एक प्रमुख आकर्षक पर्यटन स्थल हैं। लगभग दूसरी और तीसरी शताब्दी में मिली ये गुफाएं पुरातत्वविदों और इतिहास प्रेमियों के बीच प्रसिद्ध स्थान है जो विभिन्न गुफाओं, मूर्तियों और छवियों का पता लगाने के लिए यहां आते हैं। जुन्नर गुफाओं को जिन तीन प्रमुख भागों में बांटा गया है वे हैं – मनमोदी हिल समूह, गणेश लेना समूह और तुलजा लेना समूह। मनमोदी हिल समूह पहाड़ी पर स्थित है, जिसका नाम समान है और यह अपने वास्तुकला के कार्य और डिजाइन के लिए प्रसिद्ध है जबकि तुलजा लेना समूह अपने चैत्य हॉल के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी छत गोलाकार डोम के आकार की है। गणेश लेना समूह जुन्नर से दक्षिण की ओर लगभग ४ किलोमीटर की दूरी पर है और अनेक विहारों और कक्षों से मिलकर बना है-छठवीं चैत्य गुफा और गणेश लेना गुफा अधिक प्रसिद्ध हैं। यहां घूमने आने के लिए सर्दियों का मौसम यानी सितंबर से मार्च तक का समय अच्छा होता है। उस दौरान आप आराम से पूरे किले की सैर कर सकते हैं। गर्मियों में बढ़ते तापमान की वजह से घूमना मुश्किल होता है। ट्रैकिंग के लिए भी ये जगह टूरिस्टों के बीच काफी मशहूर है लेकिन मॉनसून में यहां आना अवॉयड करें क्योंकि उस दौरान पहाड़ों पर बहुत ज्यादा फिसलन होती है।
गणेश जी का मंदिर– यहां अष्टविनायक का मंदिर है तो यहां आकर इस मंदिर के दर्शन जरूर करें।
कुकदेश्वर मंदिर- शिवनेरी से आधे घंटे की ड्राइव करके आप इस मंदिर में पहुंच सकते हैं। कुकड़ी नदी के किनारे १२वीं सदी में बने इस मंदिर में बहुत सी खूबसूरत कलाकृतियां देखने को मिलती हैं।
वाइन टेस्ट करें – नासिक, जिसे महाराष्ट्र का वाइन डिस्ट्रिक्ट कहा जाता है। यहां के वाइनयार्ड्स आकर आप अलग-अलग वेराइटी की वाइन को भी ट्राय कर सकते हैं।
मालशेज घाट- शिवनेरी के अलावा आसपास घूमनेवाली जगहों में शामिल है मालशेज घाट। जहां का नजारा और मौसम वीकेंड एन्जॉयमेंट के लिए है परफेक्ट।
ऐसे पुहंचे-
हवाई मार्ग- अगर आप फ्लाइट से आने का प्लान कर रहे हैं तो पुणे यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है।
रेल मार्ग- पुणे रेलवे स्टेशन यहां तक पहुंचने का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। जहां से बस और टैक्सी की सुविधा अवेलेबल रहती है।
सड़क मार्ग- लगभग सभी बड़े शहरों से पुणे तक के लिए बसें चलती हैं। इसके बाद शिवनेरी पहुंचने के लिए आपको टैक्सी या ऑटो लेना पड़ता है।