" /> छूट की पेशकश से बढ़ सकती है मांग, लॉकडाउन से अनलॉक की ओर

छूट की पेशकश से बढ़ सकती है मांग, लॉकडाउन से अनलॉक की ओर

सरकार ने धीरे-धीरे लॉकडाउन को अनलॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लगभग सभी राज्यों ने रियायतों का दायरा बढ़ा दिया है। छोटे एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) ने भी अनेक राज्यों में काम करना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश में अब तक २३ लाख छोटे एवं मझोले उद्योगों ने फिर से उत्पादन करना शुरू कर दिया है। मामले में बड़े उद्योग भी पीछे नहीं हैं। मारुति-सुजूकी ने कारों का उत्पादन शुरू कर दिया है। भारतीय मोबाइल निर्माता कंपनियां जैसे लावा, माइक्रोमैक्स, आईबाल आदि ने भी फिर से मोबाइल हैण्डसेट का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। अब इन कम्पनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तैयार माल बेचने की है। वर्तमान में कोरोना महामारी की वजह से लोग गैर-जरूरी सामानों पर खर्च करने से परहेज कर रहे हैं। वे गैर-जरुरी सामान तभी खरीद सकते हैं, जब उन्हें यह लगे कि खरीददारी उनके लिये फायदेमंद होगा। कंपनियां उपभोक्ताओं के मनोविज्ञान को अच्छी तरह से समझती हैं। इसलिये, गैर-जरूरी सामान बनाने वाली उपभोक्ता कंपनियां आकर्षक योजनाओं की मदद से ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं। फिलवक्त, वाहन, प्रिâज, मोबाइल हैंडसेट और रियल एस्टेट कंपनियां उपभोक्ताओं को छूट के अलावा किफायती दर पर ऋण योजना की पेशकश करने के लिये बैंकों एवं वित्त कंपनियों से गठजोड़ कर रही हैं।
कोरोना काल में बैंक कर्जदारों को आर्थिक रूप से मदद करने के लिये भारतीय रिजर्व बैंक ने विगत २ महीनों में रेपो दर में १३५ आधार अंकों की कटौती की है। रेपो दर वह दर होता है, जिसपर बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेता है। केंद्रीय बैंक ने रेपो दर के अलावा रिवर्स रेपो दर में भी कटौती की है। रिवर्स रेपो दर में इसलिये कटौती की गई है, ताकि बैंक, बैंकिंग प्रणाली में प्रवाहित की गई सस्ती पूँजी का इस्तेमाल आमजन और कारोबारियों को ऋण देने के लिये करें। बैंक जिस दर पर भारतीय रिजर्व बैंक को कर्ज देते हैं, को रिवर्स रेपो दर कहा जाता है। रिवर्स रेपो दर में कटौती करने से बैंक, रिजर्व बैंक में पैसा जमा करने की जगह ग्राहकों को ऋण देने के लिये प्रेरित होते हैं, क्योंकि ग्राहकों को ऋण ज्यादा ब्याज दर पर देने से उनके मुनाफे में वृद्धि होती है।
लॉकडाउन की वजह से आवश्यक सेवा से जुड़े लोगों को आजकल अपने वाहनों से आवागमन करना पड़ रहा है। जिनके पास खुद के वाहन नहीं हैं, उन्हें डयूटी करने में परेशानी हो रही है। इसलिये, वाहन कंपनियां इस अवसर का इस्तेमाल वाहन बिक्री को बढ़ाने में करना चाहती है। ग्राहकों को गाड़ी खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए वाहन कंपनियां वाणिज्यिक बैंकों और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) के साथ करारनामा भी कर रही हैं। ऐसा करने से किफ़ायती ऋण दर पर ग्राहकों को वाहन बेचा जा सकता है, क्योंकि विगत २ महीनों में केंद्रीय बैंक ने रेपो दर में १३५ आधार अंकों की कटौती की है। साथ ही साथ रिवर्स रेपो दर और सीआरआर में भी कटौती की गई है। इस आलोक में वाहन निर्माता कंपनी मारुति-सुजूकी ने ईएमआई योजना शुरू की है, जिसके तहत कार खरीदार को कर्ज अदायगी के समय में राहत दी जायेगी और शुरू में कम ईएमआई लिया जायेगा, जिसे बाद में क्रमबद्ध तरीके से बढ़ाया जायेगा। साथ ही, ऋण दर भी कम होगी, जिससे कार खरीददारी की लागत कम होगी। मारुति के कार्यकारी निदेशक शशांक श्रीवास्तव के अनुसार कोरोना महामारी के कारण ग्राहकों की खरीद क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। अस्तु, उन्हें इस तरह के ऑफर देने की सख्त जरुरत है।
मारुति-सुजूकी के तर्ज पर वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने ‘अभी खरीदो और २०२१ में चुकाओ’ नाम से एक योजना शुरू की है, जिसके तहत कंपनी ग्राहकों को किस्त देने में ९० दिनों की मोहलत देगी। कंपनी महिला ग्राहकों को ज्यादा छूट दे रही है। कोरोना योद्धाओं के लिए यह कंपनी १०० प्रतिशत ऑन-रोड ऋण, आठ साल की ऋण अवधि आदि लाभ दे रही है। कंपनी बीएस-६ मॉडलों को कम कीमत पर बेच रही है। कुछ बीएस-६ मॉडलों को बीएस-४ मॉडल की कीमत पर यह कंपनी बेच रही है।
गोदरेज अल्पायंसेज कंपनी भी लंबी अवधि की आकर्षक ऋण योजना, कैशबैक, ज्यादा अवधि की वारंटी, एक्सचेंज ऑफर, सालाना मरम्मत अनुबंध पर छूट आदि फायदे देने की पेशकश कर रही है। एलजी इंडिया प्री-ऑर्डर पर १०,००० रुपये तक की छूट दे रही है. हालांकि, मोबाइल हैंडसेट कंपनियां मुफ्त उपहार एवं छूट देने से बच रही हैं, क्योंकि लॉकडाउन से ठीक पहले मोबाइल हैंडसेट पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर को १२ प्रतिशत से बढ़ाकर १८ प्रतिशत कर दिया गया था, जिसके कारण मोबाइल हैंडसेट की कीमतों में कटौती करना या ग्राहकों को किसी तरह का ऑफर देना मोबाइल कंपनियों के लिये संभव नहीं है। कुछ मोबाइल कंपनियों ने हैंडसेट की कीमतों में बढ़ोत्तरी भी की है। श्याओमी ऐसी कंपनियों में से एक है। बावजूद इसके, मोबाइल हैंडसेट कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिये दूसरे उत्पाद बनाने वाली कंपनियों से पीछे रहना नहीं चाहती हैं। अतः ग्राहकों को लुभाने के लिए मोबाइल कंपनियां ग्राहकों को सस्ती ऋण दर मोबाइल हैंडसेट बेचने की पेशकश कर रही हैं। सैमसंग इंडिया ने डीएमआई फाइनैंस के साथ मिलकर सैमसंग फाइनैंस प्लस योज़ना शुरू की है। आवास विकासक भी ग्राहकों को लुभाने के लिये तरह-तरह की योजनायें पेश कर रहे हैं। मुंबई की रियल एस्टेट कंपनी ओबेरॉय रियल्टी ने एक ऐसी योज़ना पेश की है, जिसके तहत फ्लैट की कीमत का २५ प्रतिशत पैसा जमाकर ग्राहक फ्लैट में रहना शुरू कर सकते हैं और शेष ७५ प्रतिशत राशि का भुगतान ५ किस्तों में हर साल १५ प्रतिशत चुकाकर कर सकते हैं। इन ५ वर्षों के दौरान लगने वाली ब्याज राशि का भार भी कंपनी उठायेगी। कहा जा सकता है कि लॉकडाउन को अनलॉक करने के बाद अगर सभी कंपनियाँ तुरंत उत्पादन कार्य शुरू कर भी देती हैं तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती तैयार माल को बेचने की होगी, क्योंकि कोरोना महामारी की वजह से करोड़ों लोगों की नौकरियाँ चली गई हैं। जिनकी नौकरियाँ बच गई हैं, वे सोच-समझ कर खर्च कर रहे हैं। मौजूदा समय में कोई भी गैर-जरूरी उत्पादों पर पैसे खर्च करना चाहता है। ऐसे में कंपनियों को उत्पादों को बेचने के लिए ग्राहकों को ढेर सारी छूट और सस्ती दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध करानी होगी।