जख्मी जंग, औरत का यलगार नपुंसक बना डालो!

निर्भया कब तक मरती रहेगी, कब तक उसका दमन होता रहेगा? सरकारें बदलीं, निजाम बदला पर औरतों को न्याय दिलाने की नीयत नहीं बदली। उन्नाव, कठुआ के पहले महिलाओं के खिलाफ कई नृशंस वारदातें हुई हैं। बीते वर्ष यमुना एक्सप्रेस-वे पर ४ महिलाओं के साथ बंदूक की नोक पर सामूहिक बलात्कार। इसके अलावा शिमला में स्कूली छात्रा के साथ गैंगरेप और दिल्ली के अमन विहार में १९ साल की युवती १० दिनों तक एक युवक के हवस का शिकार होती रही। महाराष्ट्र के कोपर्डी गांव में मासूम बच्ची के साथ गैंगरेप और हत्या की घटना ने देश को दहला दिया था। कांग्रेस शासनकाल की बात करें तो निर्भया कांड जैसे गैंगरेप के २३६१ मामले हुए थे। निरंतर हो रही इन घटनाओं से महिलाएं पूरी तरह से आहत हैं। वे अब सड़क पर उतर गई हैं। वर्तमान में इन दिनों चर्चित फिल्म ‘जख्मी औरत’ में फिल्माए गए दृश्यों जैसा माहौल बन गया है। फिल्म में जिस तरह एक साहसी महिला इंस्पेक्टर बलात्कार की शिकार होने के बाद उसे जब न्याय नहीं मिलता है तब वह जख्मी महिलाओं का समूह बनाकर बलात्कारियों को नपुंसक बनाने की सजा देने निकल पड़ती है। इसी तरह का यलगार सड़क पर उतरी महिलाओं ने बलात्कारियों के खिलाफ बोला है। इन्होंने अपनी आवाज बुलंद करते हुए नालायकों को सरेआम नपुंसक बनाने के लिए जोर दिया है। ताकि कोई ऐसा घिनौना काम न कर सके।
उन्नाव-कठुआ कांड से भड़कीं महिलाएं
कठुआ और उन्नाव बलात्कार कांड की आग मुंबई में भी भड़क उठी है। महज एक दिन में मुंबई के विभिन्न इलाकों में कई सामाजिक संस्थानों ने सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कल एक मुख से इन घटनाओं का निषेध करते हुए दोषियों को फांसी देने की मांग की है।
बता दें कि कल मुंबई में ही सिर्फ एक दिन में दर्जनभर धरना-प्रदर्शन हुए हैं। कल जमात-ए-इस्लामी हिंद की ओर से भी कुर्ला और अंधेरी में धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें दो हजार से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर इन घटनाओं पर अपना विरोध दर्शाया। इस प्रदर्शन में `जमात-ए-इस्लामी हिंद’ के साथ कई महिला संस्थाएं भी जुड़ी थीं। महिला संस्था की प्रतिभाताई ने कहा कि निर्भयाकांड हो या कोपर्डी कांड या फिर उन्नाव या कठुआ। इन सभी हादसों को मजहब से नहीं जोड़ना चाहिए। इन हादसों में शिकार बेटी और मां होती है। उन्होंने कहा कि बलात्कारियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। गरीमा संस्था की यासमीन फारुख ने कहा कि ऐसे मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। `हिंद’ के हुमायूं शेख ने भी कहा कि ये शर्मनाक घटनाएं हैं। आज देश में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। तार-तार आबरू और खत्म होती इंसानियत को यह चंद लाइनें बयां कर देती हैं।
लूट कर उस मासूम की आबरू,
जालिमों तुम्हें नींद कैसे आई होगी?
तड़पा कर उस खिलते फूल को तुमने,
बहन-बेटियों से नजरें कैसे मिलाई होगीं?
क्या कसूर था, कोई खता भी तो नहीं थी,
कलेजा नहीं फटा तुम्हारा, जब वो चिल्लाई होगी?
तुम इतने बेरहम कैसे हो नराधमों,
सोचता हूं तालीम ही `गंदी’ पाई होगी?