जनता का फैसला

जनता का जो रहा फैसला
जी सर आंखों पर।
लोकतंत्र का भोंपू बाजा
असर ‘झट’ लाखों पर।
चलोगे लंबी-लंबी कहां तक?
जाओगे किस ओर बताओ।
साथ हैं हम भी हम भी।
अजी तुम्हारी हर नीयत की
खोज-खबर रखती है
ये भारत की जनता है।
सियासत खूब समझती है।
जुमले की परिभाषा प्यारे
क्या खूब सिखाई।
पर भारत की जनता को न
तनिक भी भाई।
आखिर इतनी क्रूर चतुराई
न काम में आई।
अब भी है वह दर्द
बनी खोजती अपनी पाई-पाई।
लोकतंत्र के हर पहलू को
समझ लो भाई।
वादा करके मुकर गए
कर लो भरपाई।
समझ-बूझकर करो
फैसला वरना बांटो लाई
सर आंखों पर जिस
पब्लिक ने थी बैठाई।
आज उसी ने कटु
अनुभव से फटकार लगाई है।
-विद्यासागर यादव, सानपाड़ा, नई मुंबई