जब बोली पायल, खुला कत्ल का राज

प्रेमिका की बिंदी, कंगन, पायल, झुमके आदि कुछ कहते हैं, ऐसा हमें फिल्मी गीतों में देखने और किस्से कहानियों में सुनने को मिलता रहा है लेकिन असल जिंदगी में भी पायल बोल सकती है, ऐसा पहली बार देखने में आया है। बोलनेवाली उक्त पायल एक अज्ञात मृत महिला की थी, जिसका शव पांच महीने पहले पुलिस को रेल पटरियों पर मिला था। उक्त लाश की शिनाख्त के लिए पुलिस के पास मृतका की पायल के अलावा और कुछ नहीं था लेकिन कहते हैं कि हर गुनहगार गुनाह करते समय कोई न कोई सबूत छोड़ता ही है। जरूरत सिर्फ इतनी होती है कि पुलिस उन सबूतों को कितनी देर में परख पाती है। पुलिस ने मृतका की पायल को वह सबूत मानकर जांच शुरू की। पुलिस की मेहनत रंग लाई और मृतका की पायल ने कत्ल का राज खोल दिया। तीन राज्यों में ६ हजार किलोमीटर तक का सफर करने के बाद पुलिस ने मृतका के पति को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है।
२९ मई, २०१९ को एक अज्ञात महिला की लाश वसई-दिवा रेल खंड़ स्थित कोपर रेलवे स्टेशन के करीब रेल पटरियों के पास मिली थी। महिला की गला चीरकर हत्या की गई थी। रामनगर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करके मृतका की शिनाख्त एवं हत्यारे की तलाश शुरू की। मृतका के शरीर पर कपड़ों एवं एक पायल के अलावा ऐसा कुछ नहीं था जिससे उसकी शिनाख्त हो सके।
पुलिस ने मृतका की पायल की बारिकी से जांच की तो उस पर वह पायल बनाने व बेचनेवाले ज्वेलर्स का मार्का मिला, जो कि तमिल भाषा में `मलार’ लिखा था। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजू जॉन के मार्गदर्शन में कल्याण क्राइम ब्रांच की टीम ने इंटनेट पर उक्त ज्वेलर्स के बारे में छानबीन शुरू की और जल्द ही पुलिस की मेहनत रंग लाई। तमिलनाडु के तिरुवन्नमलाई इलाके में उक्त ज्वेलर्स के होने की जानकारी टीम को मिल गई, जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम तमिलनाडु पहुंच गई। वहां टीम कड़ी मशक्कत के बाद उस ज्वेलर्स की दुकान में पहुंच गई। ज्वेलर्स ने पायल तो पहचान ली लेकिन वह पायल कब और किसे बेची गई थी इस बारे में सटीक जानकारी नहीं मिल सकी थी। हालांकि ज्वेलर्स से पुलिस को इतना पता चल गया कि जैसी पायल मृतका के पैर में मिली थी वैसी पायल मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं। लिहाजा पुलिस ने तमिलनाडु पुलिस की मदद से मृतका के पोस्टर बनवाकर उस क्षेत्र में चस्पां करवा दिए और पुलिस की यह युक्ति कारगर सिद्ध हुई, जिसके बाद तमिलनाडु के राधापुरम गांव से कुछ लोगों ने कल्याण क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से संपर्क किया। खुद मृतका का रिश्तेदार बतानेवाले उन लोगों ने मृतका की शिनाख्त ५० वर्षीय शबिरा खान के रूप में की, जो कि पति खलील शेख की पत्नी थी और वह खलील के साथ मुंबई के मस्जिद बंदर इलाके में रहती थी। पुलिस जब खलील के घर पहुंची तो पता चला कि खलील की मौत हो चुकी है तथा शबिरा १६ मई से लापता थी। खलील के परिजनों ने इसकी शिकायत पायधुनी पुलिस थाने में दर्ज कराई थी। परिजनों ने यह भी बताया कि खलील की मौत के बाद शबिरा घाटकोपर निवासी मंसूर रहमान इसाअली उर्फ मंसूर इसा आली शेख के संपर्क में थी तथा शबिरा की गुमशुदगी के बाद से मंसूर भी लापता था।
पुलिस ने जब शबिरा खान के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल और लोकेशन निकलवाई तो वह १४ से १६ मई के बीच कोपर रेलवे स्टेशन के आसपास मिली। उसके बाद शबिरा का मोबाइल फोन बंद हो गया था। उस दौरान पुलिस को पता चला कि शबिरा, मंसूर शेख के संपर्क में थी। मंसूर को मुख्य संदिग्ध मानकर पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की तो वह नदारद था। परिचितों ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल के मालदा स्थित अपने गांव गया होगा। पुलिस ने जब मंसूर के मोबाइल की लोकेशन जांची तो वह लगातार केरल के कोट्टायम भाग में मिली। कल्याण क्राइम ब्रांच के अधिकारी केरल पहुंच गए। वहां केरल पुलिस की मदद से वेश बदलकर उन्होंने ४२ वर्षीय मंसूर की तलाश शुरू की और बंदाकुरी गांव से उसे ढूंढ़ निकाला। मंसूर वहां रहमान नाम से रह रहा था। इसी के साथ पांच साल पहले मिली महिला की लावारिश लाश की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली। पूछताछ में मंसूर ने बताया कि वह पहले से ही शादीशुदा है, उसके बच्चे भी हैं। खलील की मौत के बाद शबिरा ने गुप्त रूप से उससे दूसरी शादी कर ली थी लेकिन निकाह के बाद वह मंसूर पर अपनी पहली पत्नी को तलाक देने तथा नया घर लेकर अपने साथ रहने के लिए दबाव डाल रही थी। मंसूर इसके लिए तैयार नहीं था। इस बात पर दोनों में काफी तकरार हुई थी। शबिरा जब अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं हुई, इसलिए मंसूर ने उसे जान से मारने का मन बना लिया और फिर वह मकान दिखाने के बहाने शबिरा को कोपर इलाके में ले गया था। वहां शबिरा की हत्या के बाद लाश रेल पटरियों के पास फेंक दी थी।