जब रुक गया वक्त

वक्त क्या है? इसका कब से कब तक का नाता है? वह कब गुजर गया? कहां जाएगा? वह बीत रहा है? क्या बीत रहा है? क्या जो बीत गया वो वक्त है? जो हमेशा चलता रहता है वो कहां से आया था? कहां जा रहा है? क्या वो हर खुशबू में है? हर मुस्कान, हर दर्द में है? वह ठोस है या द्रव है? किसे पता वो क्या है? जो हो चुका वह हो रहा है, जो होनेवाला है वह होकर रहेगा। सारे एहसास वक्त से होते हैं। वह किसी का गुलाम नहीं होता। वह पानी के झरनों जैसा होता है। नदियों की तरह हमेशा बहता रहता है। वह गुजर गया था, थमा है। वो सदियों से चला आ रहा है। इन्हीं सब विषय को लेकर फिल्म निर्माता बी.आर. चोपड़ा ने ६० के दशक में फिल्म ‘वक्त’ का निर्माण किया। यह फिल्म उस जमाने की मल्टी स्टार फिल्म थी। इस फिल्म में उस समय के स्टार सुनील दत्त, शशि कपूर, शर्मिला टैगोर, बलराज साहनी सहित कई दिग्गज कलाकारों ने काम किया था। इस फिल्म के सभी गाने सुपरहिट थे। चाहे फिल्म का टाइटल सॉन्ग हो ‘वक्त के दिन और रात वक्त से कल और आज…’, ‘कौन आया है कि निगाहों में चमक जाग उठी…’, ‘जब हम सिमट के आपकी बांहों में आ गए…’ चेहरे पर खुशी आ जाती है और ‘ऐ मेरी जोहरा जबीं मुझे मालूम नहीं तू अभी तक है हंसी और मैं जवान तुझ पे कुर्बान मेरी जान मेरी जान…।’ ये गीत उस समय देखने और सुनने को मिलता है जब किसी की पत्नी की जन्मदिन पार्टी होती है या उन दंपतियों जो अपना षष्ठपूर्ति समारोह मना रहे होते हैं। फिल्म ‘वक्त’ बनकर तैयार हो गई। हिंदुस्थान के सभी राज्यों में रिलीज होने जा रही थी। किसी-किसी थिएटरों में तो प्रिंट भी पहुंच चुके थे। इस फिल्म की एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी थी। तभी १९६५ में हिंदुस्थान तथा पाकिस्तान की लड़ाई छिड़ गई। देश में कर्फ्यू लग गया। शाम होते ही बिजली बंद कर दी जाती थी ताकि दुश्मन के जहाज वहां हमला न कर दें। लड़ाई के दरमियान इस तरह का नियम लागू होता है। पाकिस्तान से लड़ाई शुरू होने की खबर से सभी सिनेमाघर के मालिक तथा वितरक परेशान हो गए थे कि अब क्या होगा? उस समय सभी थिएटर मालिकों तथा वितरकों को तार द्वारा सूचित किया गया कि ‘वक्त’ को रोक दो। किसी को ट्रंक कॉल करके सूचना दी गई। कहा गया कि फिक्र करने की कोई बात नहीं है और डरने की भी कोई बात नहीं है। जो घाटा, नुकसान होगा उसे हम पूरी कर देंगे। उसकी भरपाई कर दी जाएगी। हिंदुस्थान-पाकिस्तान का युद्ध हुआ। उसमें पाकिस्तान की करारी हार हुई तथा हिंदुस्थान की विजय। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच ताशकंद समझौता हुआ। उसके बाद ‘वक्त’ फिर अपनी राह पर चलने लगा और यह फिल्म हिंदुस्थान में बहुत हिट हुई।