" /> जम्मू में बंद हुआ आधा ‘दरबार’, इस बार दोनों राजधानियों में खुलेगा नागरिक सचिवालय

जम्मू में बंद हुआ आधा ‘दरबार’, इस बार दोनों राजधानियों में खुलेगा नागरिक सचिवालय

कोरोना ने तोड़ डाली 193 साल पुरानी ‘परंपरा’

पिछले 193 सालों की परंपरा को इस बार कोरोना ने तोड़ डाला है। इस बार राजधानी शहर जम्मू में आधा ‘दरबार’ बंद हुआ है। अब यह 6 जुलाई को श्रीनगर में खुलेगा। पहली बार ऐसा होगा कि दोनों राजधानी शहरों में नागरिक सचिवालय कार्य करेगा।

जम्मू में आज दरबार मूव से संबंधित सचिवालय के सभी कार्यालय बंद हो गए। सचिवालय से बाहर अन्य कार्यालय कल बंद होंगे। इसके बाद यह कार्यालय छह जुलाई को सचिवालय और प्रदेश प्रशासन के प्रमुख विभागीय कार्यालयों के श्रीनगर में खुलने के साथ ही ग्रीष्मकालीन राजधानी में दरबार पूरी तरह बहाल हो जाएगा। हालांकि श्रीनगर में दरबार के बहाल होने के बावजूद जम्मू में दरबार बंद नहीं होगा और यह पहली जुलाई को फिर से क्रियाशील हो जाएगा। इस बार सभी कार्यालय और विभाग श्रीनगर नहीं जा रहे हैं। श्रीनगर में 19 विभाग और जम्मू में 18 विभागों के कार्यालय गतिशील रहेंगे। जानकारी के लिए जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को हटाए जाने के बावजूद ‘दरबार मूव’ की प्रथा जारी है, जिसके तहत हर छह महीने के बाद राजधानी बदल जाती है। इसी परंपरा के तहत इस बार पहले यह निर्देश जारी हुआ था कि नई परंपरा के तहत दरबार मूव को स्थगित करते हुए दोनों राजधानी शहरों में अलग-अलग सचिवालय काम करते रहेंगें। परंतु कश्मीरी नेताओं के विरोध के बाद प्रशासन ने अपने आदेश को वापस ले लिया था।

4 अप्रैल को जारी निर्देश के अनुसार, पहले इसे आंशिक तौर पर स्थगित करते हुए यह कहा गया था कि फिलहाल शीतकालीन राजधानी जम्मू में दरबार बंद नहीं होगा। 4 अप्रैल के आदेश के अनुसार, 4 मई से 15 जून तक सचिवालय और दरबार मूव कार्यालयों के कर्मचारी श्रीनगर व जम्मू दोनों जगहों पर काम करते रहेंगें। लेकिन कश्मीरियों द्वारा इसका प्रबल विरोध किए जाने का परिणाम है कि अब इसकी तारीख को ही 15 जून तक आगे बढ़ाने के साथ ही यह निर्देश जारी किया गया कि अब पूरा दरबार मूव होगा। लेकिन अब फिर आधे से ही काम चलाया जाएगा। यह सच है कि प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने की मुहिम के बीच सरकार ने कश्मीरी नेताओं के विरोध के आगे घुटने टेकते हुए दरबार खोलने संबंधी अपना फैसला पलट दिया। जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में सरकार का दरबार अब 6 जुलाई से खुलेगा लेकिन श्रीनगर सचिवालय में 4 मई से आंशिक रूप से कामकाज शुरू हो चुका है।

जानकारी के लिए तंगहाली के दौर से गुजर रहे जम्मू-कश्मीर में दरबार मूव पर सालाना खर्च होनेवाला 600 करोड़ रुपए वित्तीय मुश्किलों को बढ़ाता है। सुरक्षा खर्च मिलाकर यह 900-1200 करोड़ से अधिक हो जाता है। दरबार मूव के लिए दोनों राजधानियों में स्थाई व्यवस्था करने पर भी अब तक अरबों रुपए खर्च हो चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में दरबार मूव की शुरुआत महाराजा रणवीर सिंह ने 1872 में बेहतर शासन के लिए की थी। कश्मीर, जम्मू से करीब 300 किमी दूरी पर था, ऐसे में यह व्यवस्था बनाई कि दरबार गर्मियों में कश्मीर व सर्दियों में जम्मू में रहेगा। 19वीं शताब्दी में दरबार को 300 किमी दूर ले जाना एक जटिल प्रक्रिया थी व यातायात के कम साधन होने के कारण इसमें काफी समय लगता था। अप्रैल महीने में जम्मू में गर्मी शुरू होते ही महाराजा का काफिला श्रीनगर के लिए निकल पड़ता था। महाराजा का दरबार अक्टूबर महीने तक कश्मीर में ही रहता था। जम्मू से कश्मीर की दूरी को देखते हुए डोगरा शासकों ने शासन को ही कश्मीर तक ले जाने की व्यवस्था को वर्ष 1947 तक बदस्तूर जारी रखा। जब 26 अक्टूबर, 1947 को राज्य का देश के साथ विलय हुआ तो राज्य सरकार ने कई पुरानी व्यवस्थाएं बदल लीं लेकिन दरबार मूव जारी रखा था।