" /> जय श्रीराम

जय श्रीराम

लेना है तो लो सिर्फ एक ही नाम
सिर्फ एक बार बोलो जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम।
जिसने शिव धनुष को जोड़ा-तोड़ा
जिसने अति बलशाली का वध किया।
सुग्रीव को राजा बनाया
जिसने महाप्रतापी त्रिलोकीनाथ खुद को
कहलानेवाले घमंडी राक्षसराज
तामसी सीता का हरण करनेवाले
रावण का वध किया, समूल नाश किया।
जिसने मायावी मारीच जैसे
अनेक राक्षसों का वध किया
लक्ष्मण के साथ जिसने ऋषि मुनियों के यज्ञ का रक्षण किया
जिसने अपने पिता दशरथ महाराज के
वचन के लिए राज्य वैभव का त्याग कर वनवास जाना स्वीकारा
जिसने शबरी के झूठे बेर खाकर
अपने भक्तों के प्रति
प्रेम आदरभाव सहृदयता का सबूत दिया।
जिसने अपने शरणागत विभीषण को लंका का राजा बनाया।
जिसने अयोध्या में भव्य राम मंदिर
का निर्माण कर अपने भक्तों को
अपने अस्तित्व का एहसास दिलाया।
उसका जय जयकार करो दिल से
प्यार से बोलो एक ही बार जय श्रीराम।
वो प्रभु कर देंगे सबका बेड़ा पार।।
-अनिल कुमार विष्णु जोशी, ठाणे

एक दूजे के लिए
खुद से बात कर लेता हूं मैं
दीवारों से बतिया लेता हूं।
जब तू नहीं रहती मेरे सामने
तेरी यादों में भी जी लेता हूं मैं।।
तब अंधियारे में दीप नहीं जलाता
तारों की रोशनी में ही कविताएं लिख लेता हूं मैं।
थाली में पानी भरकर तेरे मुखड़े का दीदार कर लेता हूं मैं।
अंधियारी रात में फूल कहां से लाऊं?
कागज के फूल बनाकर एक सुंदर गजरा बना लेता हूं मैं।
कभी उसे चूमता हूं अभी हाथ की कलाई में बांधकर नाचता-झूमता हूं मैं।
तेरी यादों के सहारे कुछ-न-कुछ करता रहता हूं मैं।
तू चिंता मत करना नहीं अकेला हूं मैं।
तेरे न रहने पर भी हर वक्त तू मेरी निगाहों में बसती है
मेरे दिल के अरमानों में फूलों की तरह मिलती है।।
तू मेरी है मैं तेरा हूं
बस ये क्या कम है।।
कहीं भी रहें हम इस जहां में
एक दूजे के संग-संग हैं।।
-विजय कुमार अग्रवाल, वसई, मुंबई

उनका क्या?
जिनके जीवन ‘धूप’ अंधियारे
उनका क्या?
खटिया, मचिया न दीप द्वारे
उनका क्या?
ओझिल-बोझिल किस्मत के तारे
उनका क्या?
जो शिक्षा नहीं मांगते भिक्षा
उनका क्या?
कांटों भरी हैं जिनकी राहें
उनका क्या?
बिछुड़े जिनके प्रियजन प्यारे
उनका क्या?
मात-पिता जो बच्चों से हारे
उनका क्या?
बन न सके जो राजदुलारे
उनका क्या?
भटक गया क्या युवा देश का
उनका क्या?
नहीं सोच कुछ जिनके मत्थे है
उनका क्या?
चिल्ल-पों चौपहिया करती
उनका क्या?
श्वेत श्याम है धुआं फेंकती
उनका क्या?
मन अशांत हालात दुखांत
उसका क्या?
परेशान जो बहन-बेटियां
उसका क्या?
न्याय प्रक्रिया धीमी गति से
उसका क्या?
जो विचार हम छोड़ चुके हैं
उसका क्या?
जिनके जीवन धूप-अंधियारे
उनका क्या?
-विद्यासागर यादव, सानपाड़ा, नई मुंबई