जरूरत!, ऑटो रिक्शाचालक बना देवदूत

पैसे की जरूरत किसे नहीं होती है? लेकिन पैसे की जरूरत तब ज्यादा महसूस होती जब घर में बेटी की शादी हो या हमारा कोई अपना बीमार हो और हमारे पास पर्याप्त पैसे न हों। ऐसे समय में हम एक-एक रुपया जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करते हैं। दोस्तों रिश्तेदारों के सामने हाथ पैâलाते हैं। उस पर जुटाए गए पैसे गुम हो जाए या फिर चोरी हो जाए तो उस पीड़ित परिवार खासकर उसके मुखिया पर क्या गुजरती होगी यह तो वही महसूस कर सकता है, जिस पर ऐसा बीता होगा। मुंबई की एक महिला को ऐसे ही मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। पुणे में बीमार पिता के लिए उसने कर्ज लेकर २० हजार रुपए जुटाए थे लेकिन उक्त रकम ऑटोरिक्शा में छूट गई लेकिन ऑटो रिक्शाचालक ने देवदूत की तरह पीड़िता को उसके पैसे लौटा दिए।
मुंबई सहित महाराष्ट्र का महापर्व गणेशोत्व धूमधाम से संपन्न हो गया। ११ दिन तक चले इस महापर्व के दौरान जब लोग भगवान गणेश की भक्ति में लीन थे उसी समय मुंबई निवासी प्राजक्ता गोले नामक महिला के लिए एक
ऑटो रिक्शाचालक देवदूत बन गया। दरअसल, प्राजक्ता के पिता को पक्षाघात का दौरा पड़ा था, जो कि पुणे के पिंपरी-चिंचवड स्थित रूपी नगर इलाके में रहते हैं। इलाज के लिए उन्हें कर्नाटक के किसी विशेषज्ञ डॉक्टर के पास तत्काल ले जाना बेहद जरूरी था लेकिन पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लिहाजा प्राजक्ता परेशान हो गई। उसने परिचितों-रिश्तेदारों से थोड़े-थोड़े करके २० हजार रुपए जुटाए और वह रूपी नगर पहुंच गई। वहां तक जाने के लिए वह पुणे के तिलक चौक से निगडी तक ऑटोरिक्शा में गई थी लेकिन हड़बड़ाहट में वह रुपयोंवाला बैग ऑटोरक्शिा में ही भूल गई। जब प्राजक्ता को रुपए ऑटोरिक्शा में छूटने का आभास हुआ तो वह ऑटो रिक्शाचालक को ढूंढ़ने के लिए दुबारा तिलक चौक स्थित उस ऑटोरिक्शा स्टैंड पर पहुंच गई लेकिन वह, वहां नहीं मिला। अपने स्तर पर ऑटो रिक्शा चालक को ढूंढ़ने का हर संभव प्रयास करके थकने के बाद प्राजक्ता मदद के लिए निगड़ी पुलिस पहुंच गई।
प्राजक्ता द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस अज्ञात ऑटो रिक्शाचालक को ढूंढ़ ही रही थी लेकिन उसी दौरान ऑटो रिक्शाचालक महेंद्र अरवडे खुद पुलिस थाने पहुंच गया। उसने पुलिस को ऑटोरिक्शा में मिले प्राजक्ता के रुपए सौंप दिए और पूरी घटना उन्हें बता दी। महेंद्र ने पुलिस को बताया कि अपने स्तर पर पीड़िता को ढूंढ़ने का हर संभव प्रयास किया लेकिन वह नहीं मिली इसलिए ऑटोरिक्शा में मिले रुपए जमा कराने वह खुद पुलिस थाने पहुंचा था।
निगडी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुनील टोनपे को मिली तो उन्होंने तुरंत प्राजक्ता को इसकी सूचना दी और उसे पुलिस थाने बुला लिया। महेंद्र के पुलिस थाने पहुंचने और रुपए जमा कराने की बात जब प्राजक्ता को पता चली तो वह बहुत खुश हुई। प्राजक्ता के लिए महेंद्र किसी देवदूत जैसा ही था। पुलिस ने प्राजक्ता को उसके रुपए सौंप दिए। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुनील टोनपे ने पुष्पगुच्छ देकर महेंद्र को उसकी ईमानदारी के लिए सम्मानित किया।