" /> जादूगर गहलोत!

जादूगर गहलोत!

गहलोत को राजस्थान की राजनीति का जादूगर कहा जाता है। वैसे उनका रिश्ता जादूगरी से इसलिए रहा भी है, क्योंकि उनके पिता बाबू लक्ष्मण सिंह गहलोत वास्तव में एक पहुंचे हुए जादूगर थे। पिता से गहलोत ने भी जादूगरी के गुर सीखे। हालांकि, उन्‍होंने इसे पेशा नहीं बनाया। मगर उनके राजनीतिक दांव-पेंच जादूगरी ही कहलाए। राजस्थान की राजनीतिक गलियारों में गहलोत की जादूगरी के किस्से चटखारे लेकर सुनाए जाते हैं। २००८ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को २०० में से ९६ सीटें मिली थीं। गहलोत ने बसपा के छह विधायकों को कांग्रेस में मिला लिया। बसपा सुप्रीमो मायावती के आदेश पर स्‍थानीय नेतृत्‍व ने विधायकों को अयोग्‍य करार देने की अपील की। तब यह जुमला खूब हिट हुआ था, `जादूगर ने फिर दिखाया कमाल। राजस्‍थान से हाथी हुआ गायब।’ इसके बाद गहलोत की सरकार पांच साल तक बिना किसी संकट के चली और जब इन विधायकों पर फैसला गहलोत के खिलाफ आया तब तक सरकार का कार्यकाल पूरा होने के कगार पर था। वैसे तो गहलोत की पहचान गांधीवादी नेता के रूप में होती है लेकिन अपने विरोधियों को निपटाना भी गहलोत की एक पहचान है। राजनीतिक गलियारों के जानकार और गहलोत को करीब से जानने वालों का कहना है कि वे अपने विरोधियों की सभी बातें याद रखते हैं। वे कभी भी खुलकर नहीं बोलते हैं लेकिन चुपचाप अपना काम कर देते हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे इतने सजग नेता हैं कि उन्‍हें कोई दूध पिलाने की कोशिश करे तो वह उसका पहला घूंट किसी बिल्‍ली को पिलाए बिना खुद नहीं पिएंगे। गहलोत काफी लो प्रोफाइल रहते हैं लेकिन कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटते। २०१२ में आसाराम बापू की बलात्कार मामले में गिरफ्तारी और २००३ में विहिप के पूर्व तेजतर्रार नेता प्रवीण तोगड़िया को जेल में डालना इसके उदाहरण हैं। गहलोत राजनीतिक विरोध के बावजूद भैरो सिंह शेखावत का खूब सम्‍मान करते हैं। शेखावत के निधन के बाद गहलोत हरेक बरसी पर उनको श्रद्धांजलि देनेवाले सबसे पहले नेता होते हैं। कई बार तो भाजपा नेताओं से पहले शेखावत को याद कर वे भाजपा को क्‍लीन बोल्‍ड कर देते हैं।
बैंड बाजा नोटिस
गली में दरवाजे के सामने बज रहा बैंड और पुलिस देखकर लगता है किसी वीआईपी के घर पर कोई मांगलिक कार्यक्रम चल रहा है। अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो सरासर गलती कर रहे हैं। बिहार के भागलपुर जिले के बबरगंज थाने के अंतर्गत महेशपुर के मड़वा गांव में इस बैंड बाजे का कारण यह है कि पिछले कई सालों से चंदन यादव नामक अपराधी फरार चल रहा है। बार-बार पुलिस यह कोशिश कर रही है कि वह आत्मसमर्पण कर दे। आखिर कानूनी कार्रवाई के तहत चंदन के घर पर पहुंचकर दरवाजे पर नोटिस चिपकाने के लिए पुलिस धूम-धाम से गाजे-बाजे के साथ उसके दरवाजे पर पहुंची। शुक्र अस्त चल रहा है ऐसे में बिना लग्न के ही मुहल्ले में बैंड बाजे की आवाज आई तो लोग उत्सुकतावश देखने पहुंचे तो पता चला कि भागलपुर पुलिस बैंड बाजे के साथ चंदन यादव के घर पर पहुंची है। इस दौरान पुलिस ने चंदन के घरवालों से उसके बारे में पूछताछ भी की फिर जल्द से जल्द आत्मसमर्पण करवाने को भी कहा। पुलिस ने गांववालों को बताया कि अगर समय सीमा के अंदर चंदन यादव ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया तो उसके घर की कुर्की भी की जाएगी। अब देखना यह है कि बारात तो वापस लौट गई है, चंदन ससुराल कब जाएगा।
पाप धुले
वैतरिणी में डुबकी लगाते ही सारे पाप धुल जाते हैं। भारत की वर्तमान राजनीति में भारतीय जनता पार्टी इसी तरह की वैतरिणी है, जिसमें डुबकी लगाते ही जातक (नेता) के पूर्व राजनीतिक दल में रहते किये गये सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और वह स्वर्ग अर्थात सत्ता सुख का अधिकारी हो जाता है। मंत्रिमंडल विस्तार के ११वें दिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब मंत्रियों के विभाग का बंटवारा किया तब कांग्रेस से भाजपा में आए सभी विधायकों की तरह बिसाहू लाल भी देवतुल्य हो गए। अब उन्हें वही विभाग दिया गया है, जिसके लिए भाजपा उन पर घोटाले का आरोप लगाती रही है। कमलनाथ सरकार के दौरान कांग्रेस विधायक रहे बिसाहूलाल सिंह पर गरीबों का राशन डकारने का आरोप लगा था। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने तत्कालीन कांग्रेस विधायक व वर्तमान खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री बिसाहूलाल सिंह और उनके परिवार पर अन्नपूर्णा योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे परिवारों को एक रुपए प्रति किलो के हिसाब से मिलने वाले गेहूं और चावल लेने का आरोप लगाया था। आरटीआई के जरिए जो जानकारी आई थी उसके मुताबिक बिसाहूलाल सिंह २०१३ से गरीबों का राशन ले रहे थे। हालांकि उन आरोपों पर बिसाहूलाल सिंह ने कहा था कि उनका परिवार आर्थिक रूप से सक्षम है। उन्होंने गरीबी रेखा से नीचे रहनेवाले लोगों के हिस्से का राशन कभी नहीं लिया। कमलनाथ सरकार में मंत्री नहीं बनाए जाने से बिसाहूलाल सिंह नाराज थे। उन्होंने सिंधिया समर्थक चेहरों के साथ दल बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बदले शिवराज सरकार में उनको मंत्री बनाया गया। मंत्री बनाए जाने के बाद बिसाहूलाल सिंह को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अहम जिम्मेदारी दी गई है।
असली नीरज
अपने नाम के अनुसार ही नीरज सक्सेना अभाव, गरीबी, अव्यवस्था के कीचड़ में शिक्षा का नीरज खिला रहे हैं। बैलगाड़ी पर किताबों का अंबार लादकर स्कूल तक पहुंचने/पहुंचाने में नीरज को कोई गुरेज नहीं है। नीरज मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के भोजपुर इलाके के ग्रामीण क्षेत्र सालेगढ़ में पढ़ाते हैं। सालेगढ़ की इस प्राथमिक शाला का उन्होंने कायाकल्प कर दिया है। स्कूल की व्यवस्था और साफ-सफाई प्राइवेट स्कूलों की तरह है। पर्यावरण के प्रति जागरूक नीरज ने स्कूल के आस-पास चारों तरफ पेड़-पौधे लगाए हैं। बच्चों की जानकारी और सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए पेड़ों पर लटकी तख्तियों पर तरह-तरह की जानकारी लिखी गई है। स्कूल में शिक्षा के प्रति बेहतर माहौल का ही परिणाम है कि बारिश-पानी और कड़कती ठंड हो या गर्मी, बच्चे खुशी-खुशी यहां पढ़ने आते हैं। उनकी उपस्थिति रिकॉर्ड करने लायक रहती है। कोरोना संकट के कारण पूरे देश की तरह यहां भी अभी स्कूल बंद हैं। लेकिन नीरज ईटखेड़ी संकुल केंद्र से किताबें लेकर ५ किलोमीटर दूर प्राथमिक शाला सालेगढ़ पहुंच गए। बारिश के दिन हैं और सड़क नहीं हैं इसलिए रास्ते कीचड़ भरे हैं। ऐसे हालात में भी नीरज सक्सेना ने अपनी जिम्मेदारी पूरी की। उन्होंने बैलगाड़ी में किताबें रखीं और खुद उसे चलाकर स्कूल तक पहुंच गए, ताकि जब भी स्कूल खुले, बच्चों को तुरंत किताबें मिल जाएं और पढ़ाई शुरू हो जाए। कीचड़ में कमल की मिसाल को सार्थक कर रहे हैं नीरज।