" /> जानलेवा खुले नालों से मनपा है अनजान

जानलेवा खुले नालों से मनपा है अनजान

शहर में जगह-जगह खुले नाले हादसों को दावत दे रहे हैं। इन नालों में जहां आए दिन लोग गिरते हैं और इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है, वहीं खुले नालों की वजह से लोगों की इनमें गिरकर मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद महानगरपालिका का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। ऐसा लगता है जैसे मनपा किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है।
महानगरपालिका ने शहर भर में करोड़ों रुपए खर्च करके कई जगहों पर नालों का निर्माण कराया है लेकिन एक भी नाला ऐसा नहीं है, जिसे ढंका गया हो। जिस दुकानदार की दुकान का रास्ता नाले के ऊपर से होकर निकलता है, वे स्वयं ही नाले के ऊपर लोहे की जाली, लकड़ी के स्लैप डालकर काम चलाते हैं। लकड़ी के ये स्लैप भी ज्यादा मजबूत नहीं होते हैं, ये कभी भी टूट जाते हैं।
विरार इलाके में चंदनसार, कातकरी पाड़ा, फुलपाड़ा, मनवेल पाड़ा, बोलिंज, गोकुल टाउनशिप, एमबी इस्टेट, नारंगी, नालासोपारा के नागिनदास पाड़ा, मोरेगांव, प्रगतिनगर, संतोष भुवन, बिलाल पाड़ा, धानिव बाग, निलेमोरे, समेल पाड़ा, हनुमान नगर, श्रीप्रस्थ, वसई के वालिव, आनंद नगर, कोलीवाड़ा, मानिकपुर या अन्य दूसरे मार्ग सब जगह यही हाल है। नगरपालिका ने जहां कहीं भी नाले बनाए हैं, सब जगह ये खुले हुए हैं।
शहर की सड़कों की चौड़ाई कम है और ऊपर से वाहनों का दबाव बढ़ गया है, इसके कारण पैदल चलनेवालों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बची-खुची कसर नालों के ऊपर अतिक्रमण करनेवाले पूरी कर देते हैं। ज्ञात हो कि गत शनिवार को गटर में गिरने से ७५ वर्षीय एक वृद्ध व्यक्ति की मौत हो गई थी, वहीं पिछले महीने नालासोपारा, वसई इलाके में पांच और आठ वर्षीय बच्चे की नाला में गिरने से जान चली गई। बता दें कि पिछले वर्ष बरसात के समय संतोष भुवन, विरार और नायगांव इलाके में तीन मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है।
कई बार शिकायत करने के बाद भी मनपा गटर को ढंकने काम नहीं करती। मनपा ने जो ढक्कन लगाए हैं, वो ठक्कन निष्क्रिय दर्जे के हैं।
– रवि यादव निवासी
मनपा में कई बार गटर के ढक्कन बंद करने के लिए पत्रव्यवहार किया गया लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला। कई बार बच्चों, बुजुर्ग महिलाओं की गिरने से मौत भी हो चुकी है। – संदीप दुबे, समाजसेवक
नालों को ढंकने के लिए महानगरपालिका काम कर रही है। ऐसा नहीं है कि नगरपालिका ने नालों को ढंका नहीं है। कई जगह नाले ढंके हुए भी हैं।
– राजेंद्र लाड वसई-विरार शहर अभियंता