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जानें महामारी एक्ट को वर्ना बन जाएंगे अपराधी!

हिंदुस्थान में कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या ११६ पर पहुंच चुकी है। देश के १४ राज्यों में कोरोना के मरीज मिल चुके हैं। अब तक दो की मौत भी हो चुकी है। इन सब के बीच कोरोना पर काबू पाने के लिए भारत सरकार कई तरह के एहतियात बरत रही है। जगह-जगह क्वारंटाइन और आइसोलेशन कैंप्स बन रहे हैं, लोगों की जांच हो रही है। इसके अलावा हिंदुस्थान सरकार ने देशभर में महामारी एक्ट की मदद लेने का भी निर्देश जारी किया है। बता दें कि महामारी एक्ट के तहत यूपी के आगरा जिले में पहला केस दर्ज किया गया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार वैâबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा की समीक्षा बैठक में ये पैâसला लिया गया। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को महामारी बीमारी कानून १९८७ के सेक्शन २ के प्रावधानों की मदद लेने के लिए कहा है। इस कानून के तहत यूपी के आगरा में एक केस दर्ज भी किया जा चुका है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल एथिक्स ने २००९ के एक पेपर में इस कानून को ‘उपनिवेशी भारत में स्वच्छता के लिए अपनाया गया सबसे निर्दयी कानून’ बताया था। बता दें कि ये कानून आज से १२३ साल पहले साल १८९७ में बनाया गया था, जब हिंदुस्थान पर अंग्रेजों का शासन था। तब बॉम्बे में ब्यूबॉनिक प्लेग नामक महामारी पैâली थी। जिस पर काबू पाने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने ये कानून बनाया गया था। महामारी वाली खतरनाक बीमारियों को पैâलने से रोकने और इसकी बेहतर रोकथाम के लिए ये कानून बनाया था। इसके तहत तत्कालीन गवर्नर जनरल ने स्थानीय अधिकारियों को कुछ विशेष अधिकार दिए थे। ये कानून हिंदुस्थान के सबसे छोटे कानूनों में से एक है। इसमें सिर्फ चार सेक्शन बनाए गए हैं। पहले सेक्शन में कानून के शीर्षक और अन्य पहलुओं व शब्दावली को समझाया गया है। दूसरे सेक्शन में सभी विशेष अधिकारों का जिक्र किया गया है जो महामारी के समय में केंद्र व राज्य सरकारों को मिल जाते हैं। तीसरा सेक्शन कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा १८८ के तहत मिलनेवाले दंड-जुर्माने का जिक्र करता है। चौथा और आखिरी सेक्शन कानून के प्रावधानों का क्रियान्वयन करनेवाले अधिकारियों को कानूनी संरक्षण देता है। इसमें महामारी के दौरान सरकार को मिलनेवाले विशेषाधिकारों का जिक्र किया गया है। इसके अनुसार सरकार जरूरत महसूस होने पर अधिकारियों को सामान्य प्रावधानों से अलग अन्य जरूरी कदम उठाने के लिए कह सकती है। सरकार के पास रेलवे या अन्य साधनों से यात्रा कर रहे लोगों की जांच करने का अधिकार है। जांच कर रहे अधिकारी को अगर किसी व्यक्ति के संक्रमित होने का शक भी होता है तो वह उसे भीड़ से अलग किसी अस्पताल या अन्य व्यवस्था में रख सकता है। सरकार किसी बंदरगाह से आ रहे जहाज या अन्य चीजों की पूरी जांच कर सकती है, उसे डिटेन भी कर सकती है। महामारी कानून के सेक्शन ३ के तहत इसका जिक्र किया गया है। इसके अनुसार कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर दोषी को ६ महीने तक की वैâद या १००० रुपए जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती है।
पाक में एक ही दिन में ४१ नए मामले आए
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में कोरोना वायरस संक्रमण के ४१ नए मामले सामने आने के साथ ही सोमवार को देश में इसका आंकड़ा बढ़कर ९४ हो गया। रविवार तक कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या ५३ थी। सभी नए मामलों का पता दक्षिणी सिंध प्रांत में चला, जहां सरकार के प्रवक्ता मुर्तजा वहाब ने कहा कि ये वह लोग थे, जिन्हें ईरान की सीमा पर ताफतान से सिंध स्थानांतरित किया गया था। वहाब ने कहा कि और नतीजे आए हैं। इस तरह सिंध में संक्रमितों की संख्या ७६ तक पहुंच गई है। इन ७६ मरीजों में से दो की सेहत में सुधार हुआ और बाकी ७४ को अलग रखा गया है।

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