" /> जिएं तो जिएं कैसे?, दहिसरवासियों का दर्द

जिएं तो जिएं कैसे?, दहिसरवासियों का दर्द

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। मुंबई के व्यापारियों ने विश्वभर के सबसे नामचीन और अमीर लोगों में अपना नाम बनाया है, लेकिन इसी मुंबई की एक और सच्चाई है। मुंबई की आलीशान बड़ी इमारतों के पीछे झुग्गी-झोंपड़ियां और बस्तियां मुंबई की अर्थव्यवस्था का काला सच हैं। ऐसे में दहिसर में भी इसी प्रकार की कई झोपड़पट्टियां स्थित हैं। एक तरफ जहां कोरोना वायरस ने विश्वभर में अपना जाल बिछा रखा है, जिसके कारण अपने आसपास सफाई रखना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। उसी समय में इन झोपड़पट्टियों के शौचालय की हालत बेहद खस्ता है। जब ‘दोपहर का सामना’ संवाददाता ने जाकर इन झोपड़पट्टियों के शौचालय की हालत खुद देखी तो पता चला कि यहां के लोग गंदे और टूटे-फूटे शौचालयों से काफी ज्यादा परेशान हैं।

दहीसर पूर्व के चेक नाका के पास स्थित झोपड़पट्टियों के लोगों का कहना है कि उन्हें शौच जाने के लिए सुबह लंबी कतार में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा शौचालय की दीवारें और दरवाजें भी टूटी-फूटी हालत में हैं। शौचालय के ऊपर के छज्जे का निर्माण काफी ज्यादा घटिया माल से किया गया है, जिसके कारण वह कभी भी टूट सकता है। छज्जे से समय-समय पर टूटकर कई हिस्से नीचे गिरते रहते हैं, जबकि दीवार से चूना तो हर समय गिरता रहता है। लोगों का कहना है कि उनकी किस्मत अभी तक अच्छी थी कि इससे कोई भी घायल नहीं हुआ। इसके अलावा शौचालय की नियमित रूप से सफाई न होने के कारण इससे बदबू आती रहती है, साथ ही शौचालय में पानी की भी कमी देखने को मिलती है। इन शौचालयों पर लगे दरवाजों की कुंडी भी टूट गई है, जो लोगों की समस्याओं को और अधिक बढ़ा देती है। ऐसे में लोगों की प्रशासन से विनती है कि या तो वे जिन शौचालयों में अभी जा रहे हैं, उनकी मरम्मत करवा दी जाए या फिर उनको घर में ही शौचालय बनाने की अनुमति दी जाए। इस तरह टूटे-फूटे और गंदे शौचालयों में रोजाना जाने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधित कई प्रकार की बीमारियों का शिकार होना पड़ सकता है। प्रशासन को इस विषय को ध्यान में रखकर लोगों की मांगें पूरी करनी चाहिए।
शौचालय के ऊपर की दीवार टूटी हुई है, इसके अलावा इससे बहुत ज्यादा बदबू भी आती रहती है। यहां पर शौचालय जाने के अलावा हमारे पास अन्य कोई और विकल्प भी नहीं है, जिसके चलते हमें काफी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं।
– प्रमोद कुमावत (निवासी)
शौचालय के दरवाजे की कुंडी तक टूटी हुई है। इसके अलावा यहां काफी ज्यादा गंदगी है और यहां पर शौचालय जाना महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है। प्रशासन द्वारा इस विषय को गंभीरता से लेते हुए उसकी मरम्मत और नियमित रूप से साफ-सफाई करवानी चाहिए। – मीना कालेर (निवासी)
लोगों द्वारा की गई शिकायतों को नोट कर संबंधित विभाग को सूचना दे दी गई है। मनपा द्वारा पहले से ही झुग्गी-झोपड़ियों में रहनेवाले लोगों के लिए पुराने शौचालय तोड़कर नए शौचालय बनाने की योजना बनाई गई है। इस पर काम जारी है।
– मनपा अधिकारी