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जियें तो जियें  कैसे…, नहीं रहे एस. पी.बालासुब्रमण्यम

साउथ की फिल्म इंडस्ट्री में सफलता का परचम लहराने के बाद बॉलीवुड में अपनी असीम छाप छोड़नेवाले और अपनी सुमधुर गायकी के लिए विख्यात सुप्रसिद्ध गायक एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम हमारे बीच नहीं रहे, ये दुर्भाग्यपूर्ण खबर जैसे ही २५ सितंबर, २०२० को दोपहर १ बजे के दौरान पूरे देश में फैली संगीत जगत में अंधेरा व्याप्त हो गया। इसमें कोई दो राय नहीं कि बालासुब्रह्मण्यम के पास मीठा कंठ था, परंतु उन्हें उनकी सुमधुर आवाज के साथ ही संगीत जगत में उनके प्यारे स्वभाव, इंसानियत के गुणों से लबरेज होने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनकी सेहत अगस्त महीने से नासाज थी। १४ अगस्त को न्यूमोनिया और कोविड के लक्षणों के चलते एमजीएम अस्पताल चेन्नई में उन्हें दाखिल कराया गया था। ईश्वर का ये कैसा खेल था। बालासुब्रह्मण्यम ४ सितंबर को कोविड टेस्ट में नेगेटिव पाए गए। उनके हजारों फैंस सहित संगीत जगत ने राहत की सांस ली, परंतु ये खुशी महज २० दिनों तक कायम रही। आख़िरकार, उन्हें पिछले ४-५ दिनों से वेंटिलेटर पर रखा गया था। इस धुरंधर गायक ने अपने फैंस को सोशल मिडिया के जरिए अपने कोरोना पॉजिटिव होने की बात से ५ अगस्त को अवगत कराया था। उन्होंने अपने चाहनेवालों को सोशल मिडिया पर निवेदन किया कि ‘चिंता करने की जरूरत नहीं है। सीने में जकड़न और हल्का बुखार है। बाकी मैं ठीक हूं।’
एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम ने १९६६ में तेलुगु फिल्म ‘श्री श्री मर्यादा रमणा’ से अपनी प्ले बैक की पारी शुरू की और पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी आवाज में मिश्री की मिठास, एक कशिश, एक दर्द था। ऐसा कॉम्बिनेशन वाकई दुर्लभ है। इस महान गायक ने वैसे तो डेब्यू किया एम.एस. विश्वनाथन की फिल्म ‘हॉटेल रम्बा’ के लिए। लेकिन यह फिल्म रिलीज हुई १९६९ में।
महज दो दिन पहले सलमान खान ने अपने चहीते गायक एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम के अच्छे स्वास्थ्य की ट्विटर पर शुभकामनाएं दी थीं। सलमान के लिए उनकी सबसे बड़ी हिट फिल्म, जिसे वो अपना डेब्यू ही मानते हैं वो थी, ‘मैंने प्यार किया’। इस फिल्म की सफलता में बहुत बड़ा योगदान था बालासुब्रह्मण्यम द्वारा गाए रोमांटिक गीतों का। सलमान के लिए उनकी आवाज एक सफल सुपर-डुपर कॉम्बिनेशन बन गई। सलमान की कई फिल्मों के लिए वे प्लेबैक दे चुके हैं।
अब तक १६ भारतीय भाषाओं में ४०,००० गीत गा चुके एस.पी. बालासुब्रह्मण्यम का यह रिकॉर्ड ‘गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में शामिल हो चुका है। राष्ट्रीय पुरस्कार पाना किसी भी फनकार के लिए फख्र की बात होती है और उन्होंने बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का राष्ट्रीय पुरस्कार ६ मर्तबा पाया। ७ बार फिल्मफेयर पुरस्कार पा चुके इस गुणी गायक को तमिलनाडु राज्य का बेहतरीन गायक का पुरस्कार ४ मर्तबा आंध्र प्रदेश का सन्माननीय नंदी पुरस्कार २५ बार, कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार ३ बार प्राप्त हुआ है। २००१ में पद्मश्री और २०११ में उन्हें पद्मविभूषण पुरस्कार से नवाजा गया था। फिल्मों की चकाचौंध भरी मायानगरी में भी सादगी भरा पारिवारिक जीवन अपनी अर्धांगिनी सावित्री, बेटी पल्लवी और बेटे चरण के साथ उन्होंने व्यतीत किया।
आशा भोसले- इस मनहूस वर्ष २०२० ने हमसे एक और नायाब हीरा (गायक एस.पी.) छीन लिया। बालू चला गया लेकिन उसकी आवाज मेरे कानों में हमेशा गूंजती रहेगी। दीदी (लता मंगेशकर) के गीतों के साथ बालू की आवाज का कॉम्बिनेशन कोई श्रोता भला कैसे भूल सकता है? बालू, तुम्हे कैसे भुलाया जा सकता है? असंभव है हर संगीत प्रेमी के लिए तुम्हें भुलाना। संगीत क्षेत्र की अपरिमित हानि हुई है!
सलमान खान- मैं कल्पना ही नहीं कर सकता कि मुझे बेशुमार पॉप्युलैरिटी देनेवाली आवाज अचानक खुदा को प्यारी हो गयी। वो तो धीरे-धीरे ठीक हो रहे थे फिर यह सब कैसे हुआ? मुझे पारिवारिक और रोमांटिक हीरो बनाने में बालासुब्रह्मण्यम साहब का सबसे बड़ा श्रेय है। उनका यह योगदान मैं कभी नहीं भूल सकता!
निर्माता ए. कृष्णमूर्ति- मैंने अपने बैनर ‘टीना फिल्म्स’ के लिए ९० और २००० के दशक में कई सुपर हिट फिल्म्स का निर्माण किया। २००८ में बालासुब्रह्मण्यम का म्यूजिकल नाइट मुंबई के षणमुखानंद हॉल में था। मैं और मेरी पत्नी इस प्रोग्राम को देखने के लिए चले गए। दूसरे रो में बैठे शो को एन्जॉय कर रहे थे। बालासुब्रह्मण्यम स्टेज पर गाने में लीन थे कि अंधेरे में उनकी नजर मुझ पर गई और अनपेक्षित तरीके से उन्होंने स्टेज पर मेरा नाम अनाउंस करते कहा, दोस्तों मुझे बेहद ख़ुशी है कि आज मेरे भाई साहब (ए. कृष्णामूर्ति) भी यहां पधारे हैं। उन्होंने कुछ और प्यारे अल्फाज कहते हुए मुझे स्टेज पर आमंत्रित किया। उनका ये बर्ताव उम्मीद से ज्यादा दिल को छू गया। ऐसा दिल का साफ और विनम्र गायक हमने आज तक नहीं देखा। उनकी कमी हमेशा खलेगी!