" /> जिला प्रशासन से प्रवासियों का सवाल-साहब, हम घर कैसे जाएंगे?

जिला प्रशासन से प्रवासियों का सवाल-साहब, हम घर कैसे जाएंगे?

-पांच हजार लोगों ने किया कॉल

-रजिस्ट्रेशन के लिए कर रहे थे पूछताछ

-प्रशासन ने धैर्य बनाए रखने की अपील

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद गौतमबुद्ध नगर में रहनेवाले प्रवासी लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। शुक्रवार शाम से लेकर शनिवार तक जिला प्रशासन की हेल्पलाइन पर पांच हजार से अधिक लोगों ने फोन कर पूछा कि वे अपने घर कैसे जा सकते हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रवासी लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है।

कोरोना महामारी के दौरान लोगों की मदद के लिए जिला प्रशासन ने अत्याधुनिक कंट्रोल रूम तैयार कराया था। यह कंट्रोल रूम एचसीएल कंपनी में चल रहा है। सभी विभागों के लिए यह ‘ऑल इन वन’ कंट्रोल रूम है। इसका नंबर प्रशासन ने जारी किया था। इस नंबर पर लोगों की शिकायतें सुनी जाती हैं। कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार शाम पांच बजे से श्रमिकों और प्रवासियों की फोन कॉल आनी शुरू हो गई थीं। शनिवार तक पांच हजार कॉल आईं। लोग फोन कर अपने गृह जनपद जाने के लिए रजिस्ट्रेशन के बारे में पूछताछ करते रहे थे। इनमें से अधिकांश लोग भंगेल, सलारपुर, सेक्टर-88, ममूरा, हरौला, छलेरा, बरौला, बाजीपुर, नांगवली गांव, सर्फबाद, वाजिदपुर, सेक्टर-62 के गांवों में किराये पर रहनेवाले थे। दादरी, जेवर, बिसरख से भी लोगों ने हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया। लोगों का कहना था कि काम बंद होने से रोजी-रोटी का संकट हो गया है इसलिए अपने गृह जनपद लौटना चाहते हैंl प्रवासियों ने कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारियों से घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन के बारे में सर्वाधिक पूछताछ की। इसके बाद गाड़ियों में सीट की बुकिंग करने की प्रक्रिया के बारे में पूछा। इसके अलावा बस मिलने का स्थान और घर से बाहर से निकलने के लिए पास के बारे में पूछताछ की। लोगों ने बस के किराये के बारे में जानकारी ली। उनसे धैर्य बनाए रखने की अपील की गई है।

रोजी-रोटी के संकट से परेशान

कॉल सेंटर पर फोन करनेवाले अधिकांश लोगों ने बताया कि वे राशन की कमी और पैसे की तंगी से परेशान हैं इसलिए घर जाना चाहते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों ने काम न मिलने की चिंता और लॉकडाउन के अवधि बढ़ने को भी परेशानी का कारण बताया। कुछ लोगों ने कहा कि यदि इस माह वेतन न मिला तो परिवार भूख से मर जाएगा।