जीवन एक सड़क

‘जीवन’ एक ‘सड़क’ है,
जिसे हम खुद ही ने है बनाई।
‘ऊबड़-खाबड़’ विचार
‘ईर्ष्या नफरत’ के गड्डे
‘जाति वाद’ का कूड़ा करकट,
‘लोभ-लालच’ की गदंगी
ऐसी ‘जीवन की सड़क’ पर
हम लोग चल रहे दिन-रात
जिससे ‘दुख-दर्द’ अशांति
‘भय-क्लेश’ सदा है बना रहता
तो मित्रों। आओ!
‘जीवन की सड़क’ को सुधारे
सौहार्द और भाईचारे की भावना अपनाएं।
ऊबड़-खाबड़ ‘विचारों’ से ‘मुक्त’ होएं
‘प्रेम मोहब्बत’ से पाट दें
ईर्ष्या-नफरत के गड्ढे
‘मनुष्य’ जाति है हमारी इस सोच से
‘जातिवाद’ का कूड़ा-करकट हटाएं।
‘मानवता’ की झाडू से
‘लोभ-लालच’ की गदंगी हटाएं।
तभी ‘जीवन की सड़क’ सुंदर होगी,
और सुख रूप से चल सकेंगे।
‘जीवन’ आनंदमय-खुशहाल होगा।
-आर.डी. अग्रवाल, ‘प्रेमी’ खेतवाड़ी