" /> जेल में निर्भया के दोषियों  की रातों की नींद उड़ी

जेल में निर्भया के दोषियों  की रातों की नींद उड़ी

‘डाक्टर साहब मुझे बल्ब देखकर नींद नहीं आती। डाक्टर साहब मुझे बेहद कमजोरी महसूस हो रही है। मैं खाना नहीं खाऊंगा, मुझे भूख नहीं लगती।’ रात की जगह दिन में तीन बजे सोना और पूरी रात सलाखों के बाहर एकटक देखना और फिर घबरा कर चक्कर लगाने लगना।’ तुम्हारी दया याचिका खारिज हो गई है’, ये बात सुनते ही एकदम सन्नाटे के साथ बतानेवाले अधिकारी को घूरते रहना। ये कुछ वाकये हैं, जो निर्भया के चारों दोषियों की मौत के अंतिम दिनों के दौरान घटित हो रहे हैं और अब जल्द ही इन वाकयों पर भी मौत का पहरा बैठनेवाला है।
निर्भया के चारों आरोपी जिन्हें कोर्ट ने सजा देते हुए कहा था कि ये सजा इनकी हैवानियत को देखकर दी जा रही है ऐसा जघन्य अपराध जो आज तक न देखा गया और न सुना गया। अपराध करते हुए तो ये जल्लाद हंस रहे थे लेकिन अब मौत को सामने देख कर ये जल्लाद मेमने बन गए हैं और तिहाड़ जेल की चारदीवारी के भीतर इनकी जिंदगी की पटकथा का अंतिम पैरा लिखा जा रहा है। आलम यह है कि चारों दोषी अब किसी भी आनेवाली आहट को मौत की आहट समझते हैं। तिहाड़ जेल सूत्रों के मुताबिक पहले इन चारों को उम्मीद थी कि कोई न कोई रास्ता निकल आएगा और फांसी से बच जाएंगे लेकिन जैसे ही चारों को पता चला कि सभी की दया याचिका खारिज हो गई है तो चेहरो पर सन्नाटा पैâल गया है और रातों की नींद उड़ गई है। सूत्रों के मुताबिक जैसे ही इन चारों को जेल नंबर तीन में लाया गया तब ही इन्हें अहसास हो गया था कि सब ठीक नहीं चल रहा है क्योंकि दूसरी जेलों में इन्हें दूसरे वैâदियो ने बताया था कि फांसी घर जेल नंबर तीन में ही है और अपने अंतिम समय में वैâदी को वहीं ले जाया जाता है। सूत्रों ने बताया कि जेल बदलने के साथ ही चारों दोषियों की शिकायतें और सवाल दोनों बढ़ने लगे हैं और अब ये चारों ऐसे-ऐसे हालात जेल अधिकारियों और डॉक्टरों को बताते हैं, जिनसे साफ पता चलता है कि इन लोगों में मौत का खौफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक इनमें से एक आरोपी ने स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान कहा कि डॉक्टर साहब मुझे बल्ब देखकर नींद नहीं आती और इनमें से ज्यादातर कुछ समय के लिए सोए हुए मिलते हैं और रातों को लगातार सलाखों के पीछे दूर देखने की कोशिश करते हैं और फिर घबरा कर फांसी सेल मे चक्कर काटने लगते हैं।