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जेसिका लाल अधूरा न्याय

दिल्ली की मॉडल जेसिका लाल के कातिल मनु शर्मा को दिल्ली के उप-राज्यपाल ने माफी देकर जेल से रिहा करवा दिया। २१ वर्ष पहले कातिल ने जेसिका को सरेआम गोली मारकर मौत के घाट उतारा था। केस हाई प्रोफाइल था इसलिए शुरू से चर्चाओं में रहा। कातिल के रिहा होते ही जेसिका को मिलने वाला न्याय अधर में लटक गया। उप-राज्यपाल के निर्णय ने जेसिका लाल की आत्मा को फिर एक बार मारने का काम किया है। जेसिका की आत्मा न्याय के लिए २१ साल से भटक रही थी। पर न्याय का सपना पूरा नहीं हो सका, दर्दनाक कहानी का दुखद अंत हुआ। कुल मिलाकर समाज में एक गलत संदेश गया है। अगर दोषियों को छोड़ने का फैसला ऐसे ही होता रहा तो कोई भी किसी की हत्या करके जेल में अच्छा व्यवहार दिखाकर छूट सकता है?

मनु शर्मा की रिहाई का कारण जेल में उसका अच्छा व्यवहार बताया गया। वैसे, कानून की नजर में ये तर्क शायद पर्याप्त नहीं हो सकता? जेसिका लाल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए मनु शर्मा को बीते सोमवार को दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा किया गया। दिल्ली सजा समीक्षा बोर्ड ने मनु शर्मा की समय से पहले रिहाई की सिफारिश एलजी से की गई थी। पांच बार पहले भी सिफारिशें की गर्इं थी, लेकिन तब असफलता साथ लगी। छठी कोशिश में उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने रिहाई पर मुहर लगा दी। मनु शर्मा शुरू से बिगड़ैल स्वभाव का रहा है। सजा के दौरान वकीलों की राय पर जेल में अच्छा व्यवहार दिखाता रहा। उसी को आधार बनाकर उन्हें जेल से आजादी भी दिलवा दी।
गौरतलब है, जेसिका का हत्यारा मनु शर्मा सियासी परिवार से ताल्लुक रखता है, उसके पिता विनोद शर्मा जो केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। इंडिया न्यूज चैनल के मालिक हैं। मनु शर्मा आपने दोस्तों के साथ ३० अप्रैल, १९९९ को दिल्ली के एक होटल में पार्टी कर रहा था। उसी दौरान उसने मॉडल जेसिका लाल से शराब परोसने को कहा। जेसिका उस होटल में काम करती थीं, शराब परोसने से जेसिका ने मना कर दिया। तभी मनु ने जेसिका को गोली मार दी, जिससे जेसिका की मौके पर ही मौत हो गई। उसके बाद मनु शर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। उस पूरी लड़ाई को जेसिका की बहन सबरीना लड़ी। लेकिन अब उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए, कोर्ट में जज के समक्ष कह दिया कि वह कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते-काटते थक गर्इं हैं इसलिए कोर्ट अगर मनु शर्मा को आजाद करना चाहे तो कर दे, उन्हें कोई अपत्ति नहीं? इसके बाद केस कमजोर हो गया।

उसके बाद मनु के वकीलों ने जज के सामने वही दलीलें रखीं कि जब पीड़ित पक्ष ही केस को नहीं लड़ना चाहता तो दोषी को जेल में क्यों रखा जाए? लेकिन न्यायतंत्र को कानून के मुताबिक ही काम करना चाहिए था, हत्या तो हुई ही है। अपराध के हिसाब से दोषी को सजा मिलनी चाहिए। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है सत्ता और शक्ति के समक्ष न्याय भी बौना साबित हो जाता है। ये हम नहीं, बल्कि जेसिका लाल का केस ताजा उदाहरण हमारे सामने है। मनु शर्मा ने सिर्फ जेसिका लाल को ही नहीं मारा था। उसका पूरा हंसता-खेलता परिवार ही खत्म कर दिया था। थोड़े विवरण में जाते हैं। पत्रकार विवेक शुक्ला ने भी उन दिनों की कुछ यादें ताजा की हैं।

साउथ दिल्ली का पॉश सफदरजंग एन्क्लेव एरिया, गुजरे १९९९ से लेकर अबतक वहां बहुत कुछ बदल गया। बहुत से पुराने घर नए बन गए। नए-नए लोग आ गए, कुछ पुराने चले गए, पर अब भी जो पुराने लोग रहते हैं, उन्हें बी-२/१३४ के ग्राउंड फ्लोर में रहने वाले लाल परिवार की यादें ताजा है। बेहद सज्जन और पढ़ा लिखा परिवार था लाल साहब का। वह एक निजी कंपनी में बड़े ओहदे पर काम करते थे। उनकी पत्नी माया लाल जो कान्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाती थीं। माया सफदरजंग एन्क्लेव के बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाया करती थे। वह उन्हें पढ़ातीं और फिर टॉफी देकर विदा करती। इलाके में लाल परिवार की तारीफ हुआ करती थी। इसी लाल दंपति की दो बेटियां जेसिका और सबरीना थीं। दोनों में कुछ कर गुजरने का जज्बा था, नाम कमाना चाहती थीं। जेसिका लाल के तमाम सपने थे, वह मॉडलिंग में अपना भविष्य बनाना चाहती थी। जेसिका और सबरीना ठेठ दिल्ली की लड़कियां थीं पर उनके पिता मूल रूप से पंजाब से और मां बंगाल से थीं। इसलिए उनके घर में अखिल भारतीय समाज बनकर उभरता था। दोनों बहनें धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलती थीं।

दोनों बहनें सफदरजंग एंक्लेव क्लब में होने वाले कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेती थीं। पड़ोसी अब भी बताते हैं कि लाल साहब के घर में खुशियां ही खुशियां हुआ थीं, गम-दुख दूर-दूर तक नहीं? घर में रोज दोस्तों-पड़ोसियों का आना-जाना होता था। पर, शायद किसी की नजर लग गई। नजर ऐसी लगी, देखते ही देखते पूरा हंसता-खेलता परिवार बिखर गया। जेसिका लाल का सरेआम कत्ल हो जाता है। उस दिल दहलाने वाली घटना ने लाल परिवार की मानो खुशियां ही छील लीं। जेसिका की हत्या के बाद मां माया लाल भी कुछ समय के बाद संसार से विदा हो जाती हैं। बेटी और पत्नी के बाद लाल साहब का भी चल बसते हैं। बाद में बहन सबरीना लाल भी सफदरजंग एन्क्लेव का घर छोड़कर कहीं और चली जाती हैं। फिलहाल तिहाड़ जेल से रिहा किए गए मनु शर्मा को ६ मई २०२३ तक अपना हर कदम फूंक-फूंककर रखना होगा। इस दौरान, अगर उनका कहीं किसी दूसरे अपराध में नाम आ गया तो उनकी जेल से यह रिहाई कैंसल हो सकती है।