जोर का तमाचा

वाह भाई वाह! क्या जबरदस्त तमाचा मारा है? हमारे शेर जमीन सूंघ गए। कहने को बड़े-बड़े सूरमा थे, विराट कोहली, शिखर धवन और रोहित शर्मा! गेंदबाजी के उस्ताद चहल, बुमरा और रहस्यमयी चाइनामैन कुलदीप लेकिन ऑस्ट्रेलिया के नए छोकरों ने इनकी नाक पकड़कर धूल में रगड़ दी। छट्ठी का दूध याद दिला दिया और औसान हवा कर दिए। जिन रणबांकुरों ने कुछ समय पहले ही ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में घुसकर नानी याद करा दी थी, उसने आज हमारे घर में घुसकर दादी-काकी सब याद करा दी। स्टार विहीन ऑस्ट्रेलिया का दल इतना मजबूत वैâसे हो गया कि सितारों से भरी हमारी टीम को घुटनों पर ले आया? पिछवाड़े में पूंछ दबाकर कुंकुआते श्वान को अगर अचानक पलट कर नाहर की गरदन दबोचते देखने पर जो आश्चर्य हो सकता है, वही आश्चर्य लोगों को हो रहा है। पहले जब टी-२० सीरीज में हमारा दल हारा तो उसे तुक्का मान लिया गया कि हो सकता है, जैसे कभी अंधे के हाथ बटेर लग गई थी वैसे ही ऑस्ट्रेलियंस के हाथ टी-२० की ट्रॉफी लग गई हो लेकिन एक दिवसीय मुकाबलों में दो शून्य से पिछड़ने के बाद उन्होंने जैसा पलटवार किया है उसने क्रिकेट पंडितों को भी सकते में ला दिया है। वैसे मुझे इन परिणामों से बड़ी खुशी हुई। अगर हम ये सीरीज घिसटते हुए जीत जाते तो हमारी खामियां छुपा दी जाती और कमियों पर जीत का पर्दा पड़ जाता। मेरे विचार में बहुत सही समय पर हमारे गाल पर तमाचा पड़ा है। यह तमाचा विश्वकप उठाने में हमारी टीम की मदद कर सकता है। बड़े खिलाड़ी होने का अभिमान अगर आहत हुआ तो वही परिवर्तित होकर सकारात्मक परिणाम दे सकता है।