" /> झांकी… अंग्रेजी में देशी घोटाला

झांकी… अंग्रेजी में देशी घोटाला

पढ़ गए पूत कुम्हार के सोलह दूनी आठ वाली स्थिति है। द ग्रेट बिहार में सुशासन बाबू ने महादलितों को साधने के लिए महादलित विकास मिशन शुरू किया था। महादलितों का विकास अपनी जगह रह गया लेकिन गरीब बच्चों को बोलचाल की अंग्रेजी (स्पोकन इंग्लिश) सिखाने में आईएएस अफसरों ने अपने घर भर लिए। मिशन के तहत विभिन्न कार्य प्रशिक्षण व शैक्षणिक कार्यक्रमों को लेकर अक्टूबर २०११ में विज्ञापन निकाला गया था, जिसमें २० शिल्प संबंधी विषयों सहित स्पोकेन इंग्लिश भी था। लेकिन इंग्लिश सिखानेवाले का जिम्मा लेनेवाले ब्रिटिश लिंगुआ के निदेशक डॉ. बीरबल झा मिशन के अधिकारियों के साथ फर्जी कागज तैयार कर साल २०१२ से लेकर २०१६ तक विभाग से पैसा लेता रहा। ब्रिटिश लिंगुआ को जिम्मा देने में खासी गड़बड़ी हुई। पूरा कोर्स सिर्फ कागज पर ही पूरा करा दिया गया। एक ही छात्र के दो-दो नाम, एक ही छात्र के दो रोल नंबर दिए गए। इस तरह सरकारी खजाने को ७ करोड़ ३० लाख रुपए से अधिक रुपए का चूना लगाया गया है। विजिलेंस ने घोटाले के आरोप में बिहार में निलंबित आईएएस अधिकारी एसएम राजू और तीन सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राघवेंद्र झा, राज नारायण लाल और रामाशीष पासवान पर मामले दर्ज किए हैं। तत्कालीन राज्य परियोजना पदाधिकारी देव जानीकर, ओएसडी अनिल कुमार सिन्हा, मिशन को-ऑर्डिनेटर शशि भूषण सिंह, ओएसडी हरेंद्र श्रीवास्तव, सहायक मिशन निदेशक वीरेंद्र चौधरी तथा ब्रिटिश लिंगुआ के निदेशक डॉ. बीरबल झा पर भी केस दर्ज किया गया है।
कमल ही नाथ!
लगता है मध्य प्रदेश में २५ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने तक कांग्रेस किसी बड़ी उठा-पटक के पक्ष में नहीं है इसलिए विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को ही विपक्ष का नेता तय कर दिया है। पार्टी ने नेता विपक्ष पर उनके नाम की चिट्ठी विधानसभा सचिवालय को भेज दी है। इस तरह इतने दिनों से इस पद के लिए जारी घमासान भी थम गया है। पहले सिंधिया की जगह भरने के लिए ग्वालियर चंबल के बड़े नेता डॉक्टर गोविंद सिंह का नाम उछला था, लेकिन उनके नाम पर पार्टी के अंदर सहमति न बन पाने के कारण किसी भी तरह के असंतोष को थामने के लिए पार्टी ने सदन में कमलनाथ के चेहरे पर ही दांव लगाना उचित समझा। इस बीच विधानसभा का २० जुलाई से प्रस्तावित मॉनसून सत्र सर्वसम्मति से स्थगित हो गया है। सत्र को लेकर शुक्रवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में यह पैâसला लिया गया। इस फैसले की जानकारी राज्यपाल को देने के बाद राजभवन द्वारा अधिसूचना जारी की जाएगी। मार्च में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिराकर दोबारा सत्ता में आने के बाद से शिवराज सिंह चौहान की सरकार का पहला बजट भी पेश होना था, लेकिन अब एक बार फिर बजट पेश नहीं किया जा सकेगा। बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व स्पीकर एनपी प्रजापति और संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी मौजूद थे। मतलब यह हुआ कि बतौर नेता विपक्ष कमलनाथ को मिलनेवाली सुविधाएं फिलहाल नहीं मिलेंगी।
गरीबनवाज
तमिलनाडु के इरोड जिले में रहनेवाले नेत्रहीन दंपति को बीते सोमवार तक यह पता नहीं था कि हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद हुए साढ़े तीन साल से ज्यादा समय बीत चुका है। अगरबत्ती बेचकर आजीविका कमानेवाले सोमू (५८) और उनकी पत्नी पलानीअम्मल ने दस साल से भी अधिक समय में जितनी बचत की थी, उसे जमा कराने बैंक पहुंचे थे। तब उस रकम में हजार और पांच सौ के पुराने नोट भी शामिल थे, जिन्हें केंद्र सरकार नवंबर २०१६ में ही बंद कर चुकी है। बैंक ने पुराने नोट लेने से मना कर दिया। नेत्रहीन होने के कारण दंपति को यह पता ही नहीं चला कि उनके द्वारा की गई बचत में एक हजार और पांच सौ के नोट चार साल पहले ही बंद कर दिए गए थे। तब सोमू ने जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार से मदद की गुहार लगाई। जिलाधिकारी सी. कतरावन ने दो दिन अच्छे नागरिक की भूमिका का निर्वाह करते हुए वाहन भेजकर दंपति को कार्यालय बुलाया और उन्हें अपनी निजी बचत में से २५ हजार रुपए का चेक सौंपा। यह रकम दंपति की रकम से एक हजार रुपए ज्यादा थी। उन्होंने २४,००० रुपए मूल्य के पुराने नोटों को जिले के प्रमुख बैंक में जमा कराने का निर्देश दिया। सोमू और उनकी पत्नी ने तात्कालिक सहायता के लिए अधिकारी को धन्यवाद दिया। इस घटना का दुखद पहलू यह है कि आंखवाले लोग अपने पुराने नोट इस दंपति के पास चलाते रहे। उन्हें इनकी गरीबी पर भी रहम नहीं आया। सी. कतरावन से इन्हें सीख लेनी चाहिए। इस दंपति के लिए वे गरीबनवाज बनकर उभरे हैं।
बदसूरत विकास की खूबसूरत तस्वीर
ठेले पर बैठकर डॉ. अमरेंद्र कुमार जलविहार नहीं कर रहे हैं। यह तस्वीर सुशासन बाबू के विकास मॉडल पर लाइव तंज कस रही है। दो दिन पहले ही जोड़ रास्ते पर बनी पुलिया भ्रष्टाचार की बरसात में बह गई थी तब सरकार के मंत्री हंसते हुए कह रहे थे कि आपदा में ऐसा तो होता ही रहता है। लेकिन यह तस्वीर आपदा के साथ-साथ बिहार की बीमार पड़ी स्वास्थ्य व अन्य जनसेवाओं का मसिर्‍या पढ़ रही प्रतीत होती है। बरसात में कोविड सेंटर तक जाने के रास्ते पर मानों बरसाती नदी उफन आई है। हालात ये हैं कि परिसर में घुटने तक पानी है। ऐसी स्थिति में नर्स को भी अंदर जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। तब यह ठेला ही मददगार बनकर डॉक्टर और नर्सों को परिसर में जमा पानी को पार कर अंदर पहुंचाता है। सुपौल के कोविड केयर सेंटर से आ रही यह तस्वीर बिहार की बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ शासन-प्रशासन के इलाज की दरकार कर रही है। इसे लेकर स्वास्थ्य प्रबंधक एस अदीब अहमद ने जलजमाव की समस्या के बाबत वरीय अधिकारियों को सूचित कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है।