" /> झांकी…कसम से….! 

झांकी…कसम से….! 

उम्मीद बाकी है!
राजस्थान के सत्ता संग्राम पर हाईकोर्ट का फैसला कल तक सुरक्षित रख लिया गया है। भाजपा को अभी भी २४ जुलाई को अच्छा निर्णय (?) आने की उम्मीद है। पार्टी का मानना है कि २४ जुलाई को सियासी उठापटक के १२ दिन पूरे हो जाएंगे और इसी दिन कोर्ट का पैâसला आएगा। भाजपा के इस आत्मविश्वास का कारण उसी को मालूम होगा मगर यदि फैसले के बाद भी गहलोत सरकार बची रह गई तो ? खबर यह है कि राजगढ़ पुलिस थाने के वरिष्ठ अधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई आत्महत्या प्रकरण को लेकर सीबीआई ने कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया और मुख्यमंत्री के ओएसडी देवाराम सैनी से पूछताछ की है। सवाल पूछताछ से ज्यादा इस कसरत की टाइमिंग को लेकर है। दूसरी तरफ कांग्रेस में आए बसपा विधायकों के मसले पर भी भाजपा में मंथन चल रहा है। भाजपा विधायक मदन दिलावर ने १३ मार्च को विधानसभा अध्यक्ष के सामने अपील दी थी, जिसमें बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को असंवैधानिक बताया गया था। अध्यक्ष ने अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है जबकि ताजा सियासी घटनाक्रम में पायलट खेमे के विधायकों को उसी आधार पर तुरंत नोटिस भेज दिए गए हैं। दिलावर को प्रदेशाध्यक्ष से हरी झंडी का इंतजार है ताकि इस मसले को हाईकोर्ट में ले जा सकें। सवाल यह है कि जिन राज्यों (गोवा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश आदि) में भाजपा अन्य दलों के विधायकों को अपने साथ लेकर सरकार चला रही है, क्या वे संवैधानिक हैं?
कसम से….!
एक सप्ताह में दो विधायकों के इस्तीफों से मध्य प्रदेश कांग्रेस में छाई निराशा की लहर को संभालने और डैमेज कंट्रोल के लिए प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधायक दल की बैठक में विधायकों को पार्टी में ही रहने की शपथ दिलाई। कमलनाथ ने विधायकों से कहा अब कोई भी पार्टी से नहीं टूटेगा। पूरी शिद्दत से कांग्रेस सरकार की वापसी में एकजुटता से सारे विधायक जुटेंगे। सभी को कांग्रेस को मजबूत करने की दिशा में काम करना होगा। कमलनाथ की अपील पर सभी विधायकों ने हाथ ऊपर कर कांग्रेस में रहने की शपथ ली। पिछले सप्ताह मलहरा से विधायक प्रद्युम्न लोधी और नेपानगर विधायक सुमित्रा कासेडकर ने विधायकी से इस्तीफा दे दिया था। लोधी भाजपा में शामिल होकर मंत्री दर्जे के निगम अध्यक्ष भी बन गए हैं। दरअसल बैठक के बहाने कांग्रेस विधायकों के मन की थाह लेने की कोशिश की गई। कमलनाथ ने विधायकों से एक-एक कर अलग-अलग चर्चा में कहा कि भाजपा के छलावे में मत आना। कमलनाथ ने १९७७ और १९९६ में कांग्रेस की हार का जिक्र करते हुए विधायकों में जोश भरा कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, उनको हराकर सोनिया गांधी ने धमाकेदार वापसी की थी। कमलनाथ ने प्रदेश में सत्ता वापसी के संदर्भ में कहा कि मेरा उद्देश्य सिर्फ कांग्रेस पार्टी को मजबूत करना है। इसीलिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद फैसला किया कि मैं आप लोगों के बीच रहूंगा और छिंदवाड़ा तक नहीं गया। कांग्रेस विधायकों को निराश नहीं होना है, बल्कि जीत के लिए मजबूती से आगे बढ़ना है।
दरियादिल लालू
बात १९९४ की है। बिहार के औरंगाबाद जिले का रहनेवाला एक युवक दारोगा बनने हेतु सिफारिश के लिए वह तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू के दरबार में पहुंचकर बोला, ‘सर दारोगा बनवा दीजिए।’ लालू ने हंस कर कहा कि थाने का दारोगा बनकर क्या करोगे, तुमको हम बिहार का दारोगा बना देंगे। संपर्क में रहना। आते-जाते रहना। बात आई गई हो गई। १९९५ में बिहार विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों के लिए इंटरव्यू चल रहा था। वह युवक भी लालू से मिला तो लालू ने कहा कि तुम ही आए थे न जी दारोगा में पैरवी के लिए? युवक ने कहां, ‘हां पर अब हम चुनाव लड़ेंगे आपकी पार्टी से।’
लालू ने कहा कि चुनाव वैâसे लड़ोगे, पैसा है तुम्हारे पास क्या? चुनाव में खर्च बहुत होता है। तुम को वोट देगा कौन? युवक बोला कि सर, पैसा तो नहीं है मेरे पास और रही बात वोट की तो हमको कौन वोट देगा, वोट तो आपके नाम पर मिलता है। अगले दिन के अखबार में राजद उम्मीदवारों की सूची में उस युवक का नाम देवघर (सुरक्षित) विधानसभा सीट के उम्मीदवार के तौर पर दर्ज था। चुनाव लड़ने के लिए लालू ने उसे डेढ़ लाख रुपए भी दिए। युवक जीत गया। सरकार बनने पर उसे राबड़ी सरकार में मंत्री भी बना दिया गया। लालू के दिए हुए पैसों में से बचे २५ हजार रुपए वापस करने जब वह लालू के पास गया तब लालू ने कहा कि ये तुम्हारे हिस्से का पैसा है, रख लो भविष्य में काम आएगा। उस युवक का नाम था सुरेश पासवान, जो बाद में झारखंड में भी मंत्री बने थे।
उमर उखड़े
आखिर देर से सही लेकिन राजस्थान की सियासी जंग में अब कश्मीरी जाफरान का तड़का भी लग गया है। सोमवार को दक्षिण भारत आधारित एक अंग्रेजी अखबार में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का साक्षात्कार प्रकाशित हुआ। बघेल ने राजस्थान के वर्तमान सत्ता संकट के संदर्भ में कहा था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला की रिहाई किसी न किसी रूप से सचिन पायलट और राजस्थान की वर्तमान राजनीतिक उठापटक से जुड़ी हुई है। उमर इसी साल जनवरी में रिहा किए गए थे। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस विवाद में कूदते हुए कहा है कि राजस्थान में जारी खींचतान में उन्हें और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला को जबरन घसीटा जा रहा है। अब्दुल्ला ने इस संदर्भ में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनौती भी दी है। उमर ने ट्वीट दागा- ‘मैं इस तरह के झूठे दुर्भावनापूर्ण और झूठे आरोप से तंग आ गया हूं कि सचिन पायलट जो भी कर रहे हैं वह किसी न किसी तरह से इस साल की शुरुआत में मेरे या मेरे पिता की रिहाई से जुड़ा था। अब बहुत हो गया है। भूपेश बघेल मेरे वकील आपको जवाब देंगे।’ अब्दुल्ला ने ट्वीट में राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी और रणदीप सुरजेवाला को भी टैग किया है। ध्यान रहे उमर की बहन सारा सचिन पायलट की पत्नी हैं।