" /> झांकी… कोरोना कवच

झांकी… कोरोना कवच

कोरोना कवच
मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार कोरोना कवच धारण कर २६ मार्च तक वेंटिलेटर पर जिंदा रहेगी। सारा दारोमदार उन बागी १६ विधायकों पर टिका है, जिन्हें वापस अपने खेमे में लाने के लिए कांग्रेस जी-तोड़ व्यूह रचना में जुटी है। आनन-फानन में अभिभाषण पढ़कर विधानसभा से राज्यपाल के जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई को २६ मार्च तक स्थगित कर दिया। महत्वपूर्ण यह है कि इसी दिन राज्य सभा चुनाव होने हैं और जिन विधायकों के इस्तीफे मंजूर नहीं हुए हैं उनके ऊपर व्हिप की तलवार लटकी है। राज्यसभा चुनाव की रणनीति में सदन के दोनों धड़े अपनी-अपनी कोशिश में लगे हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की चौखट खटखटा दी है। डायरी नंबर ९६८९/२०२० में दर्ज याचिका में विधानसभाध्यक्ष को प्रतिवादी बनाया गया है।
गुजरात का गणित
राज्यसभा चुनाव के मुहाने पर गुजरात कांग्रेस के पांच विधायकों के इस्तीफों से राज्यसभा चुनाव का गणित उलझ गया है। चार सीटों के राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तीन उम्मीदवार अभय भारद्वाज और रमीला बेन बारा और नरहरि अमीन को मैदान में उतारा है जबकि मतदान चार सीटों पर होना है और विधायकों की संख्या के लिहाज से भाजपा और कांग्रेस के दो-दो उम्मीदवार जीत सकते थे। शक्ति सिंह गोहिल और भरत सिंह सोलंकी कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपनी-अपनी जीत का दावा किया है। ऐसे में कांग्रेस के ५ विधायकों के इस्तीफों के बाद सदन में जीत के लिए हर प्रत्याशी को (१७५/५) अर्थात ३५ फीसदी वोट पहली वरीयता के चाहिए। १८२ सदस्योंवाली गुजरात विधानसभा में मौजूदा विधायकों के आंकड़ों के लिहाज से दोनों ही पार्टियों को दो-दो सीटें मिलने के आसार हैं। भाजपा के पास १०३ विधायक हैं, जबकि राकांपा से एक और बीटीपी के २ विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस को अपने ७३ विधायकों के साथ ही एक निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी का समर्थन प्राप्त है। चूंकि २ विधायक कानूनी प्रक्रिया में हैं इसलिए १८० के सदन में यदि कांग्रेस के ५ विधायक और घटा दें तब भी कांग्रेस, राकांपा और बीटीपी तथा निर्दलीय मिलाकर ७२ विधायक बनते हैं। ऐसे में नरहरि यदि जीतते हैं तो यह संयोग का अद्भुत प्रयोग होगा।
लोजपा लांचिंग पैड
लगता है निकट भविष्य में बिहार की लोक जनशक्ति पार्टी नेतापुत्रों के लिए लॉन्चिंग पैड की भूमिका निभानेवाली है। पाटलिपुत्र सीट से भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव के बेटे अभिमन्यु यादव की चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोजपा से गुटरगूं शुरू हो चुकी है। खबर है राज्यसभा चुनाव के अगले दिन अभिमन्यु लोजपा की सदस्यता हासिल करेंगे। `टीम अभिमन्यु’ नाम से अपनी एक संस्था के माध्यम से वे पूरे पटना जिले के ग्रामीण इलाकों में सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेते रहते हैं। लोजपा में उनके प्रवेश को विधानसभा चुनाव में पटना की फतुहा सीट से दावेदारी को लेकर भी देखा जा रहा है। रामकृपाल यादव का पटना के ग्रामीण इलाकों खास कर यादव बाहुल्य क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। चूंकि भाजपा एक ही परिवार से दो लोगों को चुनावी टिकट नहीं देती इसलिए वे अपने बेटे के लिए लोजपा के माध्यम से भी लॉन्चिंग पैड तैयार कर रहे हैं।
झारखंड में झंझट
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी शहजादा अनवर ने नामांकन तो दाखिल कर दिया है लेकिन उनकी ही पार्टी के विधायक ने उनकी हार की भविष्यवाणी कर कांग्रेसी रणनीति की बखिया उधेड़ना शुरू कर दी है। पिता फुरकान अंसारी का पत्ता कटने से नाराज कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने कहा है कि किसी भी सूरत में शहजादा को जीत नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं उन्होंने प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह पर आरोप जड़ा कि अल्पसंख्यक समाज को छलने की कोशिश की गई है। राहुल गांधी को सही फीडबैक नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यूपीए उम्मीदवारों की जीत को लेकर पूरी तरह आशान्वित हैं। दूसरी सीट के लिए भाजपा का पलड़ा भारी दिखता है। बता दें कि झारखंड में दो सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होना है। एक सीट पर झामुमो प्रत्याशी शिबू सोरेन की जीत पक्की है जबकि दूसरी सीट के लिए दीपक प्रकाश और शहजादा अनवर में मुकाबला होगा।