" /> झांकी… गजब का शोध!

झांकी… गजब का शोध!

गुस्से का औजार
कानपुर शूट आउट का खलनायक अब गुस्सा निकालने का भी औजार बन गया है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के किशनी थाना क्षेत्र स्थित दौलतपुर गांव के एक दामाद को अपने ससुर पर इस बात पर ताव आ गया क्योंकि उन्होंने उसकी पत्नी को विदा नहीं किया। दामाद जी ने किशनी के थानेदार को फोन घुमा दिया और बताया कि कानपुर कांड का मुखिया विकास दुबे का एक साथी गांव दौलतपुर का रहनेवाला नवल किशोर है जो हत्याकांड के समय कानपुर में मौजूद था, लेकिन अब भागकर अपने घर आकर छुप गया है। इंस्पेक्टर ने एसपी अजय कुमार पांडेय को घटना की जानकारी दी और एसपी से निर्देश मिलने के बाद किशनी थाना प्रभारी अजीत सिंह भारी पुलिस बल के साथ नवल किशोर के घर पहुंचे और उसे पकड़कर थाने ले आए। पूछताछ में नवलकिशोर ने खुद के विकास दुबे से किसी भी तरह के संपर्क होने से मना किया। जब पुलिस ने सूचना देनेवाले का फोन नंबर बताया तो नवल किशोर चौंक गए क्योंकि यह उनके दामाद मनोहर का नंबर था जो बेबर के पास मथपुरा में रहता है। नवलकिशोर ने पुलिस को बताया कि मनोहर अपनी पत्नी को विदा करने आया था तो मैंने कुछ दिन बाद ले जाने की बात कही थी। इसी बात से उसने गुस्से में आकर पुलिस को झूठी सूचना दी। पूरी तरह से संतुष्ट होने पर नवल किशोर हवालात से बाहर किए गए। अब पुलिस झूठी सूचना देनेवाले दामाद की तलाश में जुट गई है।
मजबूर मामा!
मंत्रिमंडल विस्तार के एक सप्ताह बाद भी मध्य प्रदेश के नए मंत्री बिना विभाग के मंत्री बने हुए हैं और मुख्यमंत्री हर विभाग के मंत्री। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कारण मिली सत्ता की चौथी पारी में महाराज को साधकर चलना मुख्यमंत्री की मजबूरी है। प्रदेश में मंत्रियों के विभाग वितरण में हो रही देरी पर शिवराज ने कहा है कि सारे विभाग मुख्यमंत्री में होते हैं इसलिए मैं सारे विभागों का मंत्री हूं। विभागों के बंटवारे के लिए दिल्ली की दूसरी बार परिक्रमा करके लौटे मुख्यमंत्री अब भी विभागों का बंटवारा करने में असमर्थ हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह के साथ माथा-पच्ची करने के बाद भी कोई फार्मूला इजाद नहीं हो पाया है, जिससे महाराज के साथ-साथ पार्टी की भी इज्जत बनी रहे। सिंधिया ७ कैबिनेट मंत्रियों के लिए बड़े विभाग मांग रहे हैं, साथ ही ४ राज्यमंत्रियों के लिए वे विभागों का स्वतंत्र प्रभार भी चाह रहे हैं। सिंधिया ने अपनी बात केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष को बता दी है। लिहाजा हाईकमान ने विभागों की सूची भी अपने पास रखकर प्रदेश संगठन से भी राय मांगी है। ऐसी खबर है कि राजस्व, स्वास्थ्य, परिवहन, जल संसाधन, नगरीय विकास, पीडब्ल्यूूडी, पीएचई, वाणिज्यिक कर, आबकारी, स्कूल शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग को लेकर पेंच फंसा हुआ है। प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे के सामने भी सिंधिया अपनी मंशा जाहिर कर चुके हैं। लगता है कि शिवराज अपने रिकॉर्ड में बढ़ोत्तरी कर रहे हैं। सबसे लंबे समय तक अकेले सरकार चलाने का रिकॉर्ड अपने नाम करने के बाद सिर्फ ५ मंत्रियों के साथ सरकार चलाई। शपथ लेने के ९९ दिन बाद मंत्रिमंडल विस्तार किया और अब पूरे सप्ताह भर बाद भी सभी नए मंत्री बिना विभाग के मंत्री बनकर रह गए हैं।
चीन का डर
गलवान के मोर्चे से पीछे हटने के पीछे चीन के अंदरूनी हालात भी जिम्मेदार हैं। अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट में चीन कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व नेता के बेटे तथा सिटिजन पावर इनीशिएटिव फॉर चाइना के संस्थापक और अध्यक्ष जियानली यांग ने लिखा है कि चीन को डर है, गलवान में मारे गए सैनिकों की बात कबूली तो विद्रोह हो सकता है। बकौल यांग पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी लंबे समय से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की ताकत का आधार स्तंभ है। यदि वर्तमान में पीएलए में कार्यरत कैडरों की भावना आहत होती है और वे लाखों पूर्व सैनिकों के साथ खड़े हो जाते हैं, जो कि पहले से ही शी जिनफिंग से नाखुश चल रहे हैं तो वह शक्तिशाली ताकत बन सकते हैं, जो शी जिनपिंग की सत्ता को चुनौती देने में सक्षम होगी। सीसीपी नेतृत्व पूर्व सैनिकों को शासन के विरोध में सामूहिक और सशस्त्र कार्रवाई शुरू करने की क्षमता को कम करने का जोखिम नहीं उठा सकता है। इसलिए दबाव और नौकरशाही के उपायों के बावजूद पूर्व सैनिकों के विरोध की निरंतर घटनाएं आ रही हैं, जो कि शी जिनपिंग और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व के लिए चिंता का कारण है। गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद चीन ने झड़प में मारे गए अपने सैनिकों के बारे में सार्वजनिक तौर पर जानकारी देने से इनकार कर दिया जबकि भारत ने पूरे सम्मान के साथ अपने जवानों की कुर्बानी को याद किया। यांग का मानना है कि चीन के इस डर की वजह पीएलए के ५.७ करोड़ पूर्व सैनिकों के दिलों-दिमाग में भड़क रहा आक्रोश है। यही कारण है कि घरेलू विद्रोह के डर से चीनी नेतृत्व पीछे हटने पर मजबूर हुआ है।
गजब का शोध!
चूंकि लॉकडाउन ३१ जुलाई तक जारी रहनेवाला है इसलिए अपने-अपने घरों में बैठे-बैठे भी धांसू विचार करने की पूरी आजादी है। इसी विचार करने की शक्ति से शोधकर्ताओं ने तमाम शोध किए हैं। एक ठाणेकर का गजब का शोध पढ़िए। क्या आपने कपूर का कुआं देखा है? उत्तर ठाणे में मिलेगा ‘कापुर बावड़ी। भले ही वाघ मांद में रहते हों लेकिन ठाणे में तो बिल है वाघ के लिए। यह अलग बात है कि इस ‘वाघबिल’ में एक भी वाघ नहीं मिलता। आपने कोयले की खान के बारे में सुना होगा। कोयला खान से ही निकलता है। सोचिए अगर कोयला खेत में हो या कोयले का ही खेत हो। ठाणे के ‘कोलशेत’ सिर्फ नाम से ही कोलशेत है। कोयला अब भी खदान से ही आता है। संसार में मानव जाति के दो ही हाथ होते हैं। भगवान चतुर्भुज हो सकते हैं लेकिन तीन हाथ सिर्फ ठाणे में ही ‘तीनहात’ (नाका) मिलेंगे और हां, सिर्फ ठाणे में ही बस कंडक्टर से एक ‘कैडबरी’ (टिकट) मांग सकते हैं। जिसे ऋषि मुनि जप-तप करते हुए भी सहज नहीं पा सकते वह ‘तत्वज्ञान’ (विद्यापीठ) ठाणे में ही मिलता है। जाहिर है तत्वज्ञान के बाद ही ‘ब्रह्मांड’ समझ में आता है, जो बस का आखिरी स्टाप है। मुस्कराइए कि आप ठाणे पर नया शोध पढ़ रहे हैं। मुंबई के बारे में तो डॉन फिल्म में अमिताभ बच्चन बता ही चुके हैं कि ई है मुंबई नगरिया तू देख बबुआ।