" /> झांकी… चौराहे का बादशाह

झांकी… चौराहे का बादशाह

सदमे में भाजपा!
राजस्थान में कथित ‘ऑपरेशन लोटस’ की नाकामयाबी के बाद भाजपा जबरदस्त सदमे में है। जोड़-तोड़ के समीकरण बिगड़ने से सत्ता में वापसी की उम्मीदें फिलहाल तो खत्म हो गर्इं। अब पार्टी का ध्यान घरेलू मोर्चे पर मचे अंदरूनी घमासान और गुटबाजी को सार्वजनिक होने से बचाने पर केंद्रित हो गया है। पता चला है कि राजस्थान की राजनीति पर पैनी नजर रख रहे केंद्रीय नेतृत्व को अपने खुफिया तंत्र से खबर मिली थी कि गहलोत सरकार द्वारा वसुंधरा राजे समर्थक विधायकों से ही संपर्क किया गया है। इसके पीछे कारण यह है कि वसुंधरा राजे फिलहाल नाराज हैं और उनके समर्थक विधायक पाला बदल सकते हैं। संगठन की टीम और खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के बाद चौकन्नी हुई भाजपा ने अपने विधायकों को गुजरात भेजने की रणनीति बनाई। वर्तमान में भाजपा के ७२ विधायकों में ४५ विधायक राजे समर्थक माने जाते हैं। इनमें राजे के नजदीकी ३० विधायकों में भी १२ विधायक ऐसे हैं जिन्हें राजे का कट्टर समर्थक माना जाता है। इन १२ विधायकों पर भाजपा नेतृत्व की खुफिया आंख हर समय लगी रहती है। इसलिए दक्षिण राजस्थान के आदिवासी बहुल इलाके के विधायकों और गुजरात सीमा से सटे जालोर-सिरोही जिले के विधायकों को गुजरात भेजा गया था। जयपुर से विशेष चार्टर विमान में ६ विधायक ऐसे भी थे, जिनसे गहलोत कैंप ने संपर्क करने की कोशिश की थी। चूंकि अब बाजी पलट चुकी है इसलिए १४ अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति पर भी भाजपा काम कर रही है। कल जयपुर में बुलाई गई विधायक दल की बैठक में इस रणनीति के संकेत भी मिले।
चौराहे का बादशाह
मेरठ के एक चौराहे पर खड़े होकर यातायात नियंत्रण में जुटे इस शख्स का नाम बादशाह है। साप्ताहिक लॉकडाउन के दौरान बाकायदा डंडा लेकर चौराहे पर डटे बादशाह के सामने क्या मजाल कि कोई बिना मास्क के निकल जाए। बिना मास्क या लॉकडाउन का उल्लंघन करनेवालों को वह ऐसा सबक सिखाता है कि वे फिर कभी लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं करेंगे। इस सबक में कभी किसी को डंडा लेकर दौड़ाया तो किसी को इतनी खरी-खोटी सुनाई कि कोई भी व्यक्ति शर्म से पानी-पानी हो जाए। अपनी बदतमीजी के लिए कुख्यात किन्नर भी इस बादशाह के सामने घुटनों पर बैठे नजर आए। बादशाह ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले किन्नरों की टोली को इतना शर्मिंदा किया कि वे बैरंग लौट गए। आमतौर पर किन्नर अपनी पर आ जाएं तो अच्छे अच्छों की नहीं सुनते हैं। मगर बादशाह ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले किन्नरों को वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया। मजेदार बात यह है कि इस दौरान पुलिस अपने तरीके से लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों को सबक सिखा रही थी। किसी का चालान कर रही थी तो किसी के वाहन जब्त किए जा रहे थे, तो दूसरी तरफ बीच चौराहे पर खड़ा बादशाह सिर्फ एक डंडे के सहारे लोगों के होश ठिकाने लगा रहा था। कई-कई बार लगा कि कहीं ये पुलिस के सामने ही कानून हाथ में लेकर किसी को पीटने न लगे लेकिन इस शख्स ने डंडा दिखाकर ही अपना काम कर लिया। पुलिसवाले भी लॉकडाउन का पालन करने वाले इस दीवाने को देखकर मुस्कुराते हुए ही नजर आए।
शिक्षामंत्री और पढ़ेंगे
विरोधियों के तानों से तंग आकर झारखंड के शिक्षामंत्री ने अब पढ़ाई करने की ठानी है और इसके लिए बाकायदे ११वीं कक्षा में प्रवेश भी ले लिया है। सूबे के शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो के विरोधी उन पर दसवीं पास शिक्षामंत्री कहकर ताना मारते थे। मंत्री जी को बात लग गई और उन्होंने आगे की पढ़ाई करने का फैसला लिया है। महतो ने बोकारो के नावाडीह स्थित देवी महतो स्मारक इंटर महाविद्यालय में कला संकाय के छात्र के रूप में ११वीं में दाखिला लिया है। इसके लिए मंत्री जी खुद कॉलेज पहुंचे थे। अब इस कॉलेज के छात्रों विशेषकर मंत्री जी की कक्षा के सहपाठियों का रुतबा बढ़ गया है। वे बड़ी शान से कह सकते हैं कि मंत्री जी उनके सहपाठी हैं या वे मंत्री जी के सहपाठी हैं। कॉलेज के छात्र- छात्राएं चकित हैं कि अब मंत्री जी उनके साथ शिक्षा ग्रहण करेंगे। नावाडीह स्थित इस कॉलेज की फीस भी मंत्री जी ने भर दी है, जिसकी तस्दीक कॉलेज में प्रवेश के लिए उनके द्वारा भरा गया फॉर्म (नं. ६८५०१) पर चस्पां उनकी तस्वीर और उनके द्वारा भारी गई फीस की रकम करती है। कॉलेज की छात्रा आरती कुमारी और प्रियंका कौशल को यह सुनकर अच्छा लगा कि उनके साथ मंत्री जी भी क्लास में बैठकर पढ़ाई करेंगे। शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो ने १९९५ में मैट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। लेकिन जब राज्य के शिक्षामंत्री के रूप में उन्होंने शपथ ली तब विपक्षी नेताओं ने उन्हें दसवीं पास शिक्षामंत्री बताते हुए मजाक उड़ाया था।
ऑटो पर घर!
जो लोग कश्मीर गए हैं उन्होंने वहां शिकारे पर दिन जरूर गुजारे होंगे। डल झील में शिकारों पर ही ठहरने की व्यवस्था होती है। पानी पर तैरते ये घर/होटल अब पुरानी बात है। नया यह है कि एक व्यक्ति ने चलता-फिरता घर तैयार किया है। वैसे मुंबइया फिल्मी दुनिया में चलते-फिरते आरामगाह को वैनिटी वैन कहते हैं मगर यह घर है। चेन्नई के अरुण प्रभु ने इस अनोखे घर को बनाया है। वह भी ऑटोरिक्शा की ३६ वर्ग फुट जगह में। इस चलते-फिरते घर में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अरुण प्रभु साल २०१९ से मुंबई में झुग्गी बस्तियों पर रिसर्च कर रहे हैं। रिसर्च में पता चला कि मुंबई में झोपड़ी बनाने में ५ लाख रुपए तक का खर्च आता है। इस झोपड़ी में शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं भी नहीं होती हैं। ऐसे में उन्होंने इस समस्या का हल निकालने के बारे में सोचा और सिर्फ एक लाख रुपए खर्च कर बना डाला ‘सोलो ०.१’ नाम का घर। बहुत ही खूबसूरती से बनाए गए इस आशियाने में बेडरूम, लिविंग रूम, किचन, बाथटब, टॉयलेट और ऑफिस भी है। सबसे खास बात इस घर में ६०० वॉट का सोलर पैनल, २५० लीटर पानी का टैंक, दरवाजे, सीढ़ियां और कपड़े सुखाने की जगह भी है। इस घर को बनाने में २३ साल के अरुण प्रभु ने केवल १ लाख रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने इस घर का नाम ‘सोलो ०.१’ रखा है। हर किसी का सपना होता है एक अदद घर लेकिन कई लोग जीवन भर इसी सपने के पीछे भागते रहते हैं। अरुण ने ऐसे लोगों के सपने पूरे करने की दिशा में अभिनव प्रयोग किया है। कमाने के साथ ही अपना आशियाना भी साथ रहे तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। इंस्टाग्राम पर द बिलबोर्ड कलेक्टिव पेज पर अरुण प्रभु का यह घर आप देख सकते हैं।