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झांकी… बकरे के लफड़े!

बकरे के लफड़े!
कानपुर पुलिस महानता के सारे रिकॉर्ड तोड़कर ही दम लेने का मन बना चुकी है इसलिए आदमी हो या जानवर सबके साथ एक जैसा व्यवहार कर रही है। वैसे भी उत्तर प्रदेश में प्रति सप्ताह शुक्रवार की रात से सोमवार की भोर तक ५५ घंटे का कड़क लॉकडाउन लागू है ऐसे में मजाल है कि कोई दुंबा (दुम वाला) भी सड़क पर दिखे। इसलिए बिना मास्क का बकरा दिखा तो धर लिया गया। बकरे को पता नहीं था कि उसे भी मास्क पहनकर सड़क पर निकलना है। बेकनगंज थाने की पुलिस सप्ताहांत लॉकडाउन के दौरान बिना मास्क के घूम रहे एक बकरे को पुलिस जीप में डालकर थाने ले आई। इसके बाद मालिक को बकरे को घर में रखने की हिदायत देकर छोड़ा। पुलिस की इस जबरदस्त (?) सतर्कता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस को फजीहत से कौन बचा सकता है? वायरल वीडियो में पुलिसवाले एक बकरे को सरकारी जीप में डालकर ले जाते हुए दिख रहे हैं। दावा किया गया कि पुलिस वाले बिना मास्क लगाए घूमने के अपराध में बकरे को पकड़कर थाने ले गए। जानकारी मिलने पर बकरा मालिक ने थाने पहुंच कर बकरा छोड़े जाने के लिए गुहार लगाई। तब बकरे को आवारा न छोड़ने की हिदायत देकर पुलिसकर्मियों ने बकरे को उसके मालिक के हवाले कर दिया। मामले पर अनवरगंज के सर्कल ऑफिसर सैफुद्दीन बैग ने सफाई दी कि गश्त के दौरान बिना मास्क लगाए बकरा लेकर जाते एक युवक पुलिस को देख कर बकरा छोड़कर फरार हो गया। लावारिस हालत में बकरे को देख पुलिस उसे जीप में लाद कर थाने ले आई। बाद में बकरा मालिक के थाने में पहुंचने पर बकरा उसके हवाले कर दिया गया। अनधिकृत जानकारी यह है कि इस मामले में असली बकरा तो मालिक ही था। समझ तो गये होंगे!
प्रियंका गांधी का नया पता
परसों यानी ३१ जुलाई को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को दिल्ली लोधी एस्टेट स्थित सरकारी बंगला खाली करने की समय सीमा खत्म हो रही है। इसलिए अब प्रियंका गांधी का नया पता गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड स्थित आरालिया सोसायटी होगा। दिल्ली से नजदीक होने के चलते प्रियंका गांधी की न सिर्फ दिल्ली में मौजूदगी रहेगी, बल्कि देश की राजनीती में भी सक्रिय रहेंगी। वो दिल्ली गुरुग्राम के बीच सफर कर सकती हैं। साथ ही अपने सभी वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी कर सकती हैं। इसी सुविधा को ध्यान में रखते हुए लखनऊ जाने की उनकी योजना निरस्त कर दी गई है। खबर है कि प्रियंका का सामान इस सोसाइटी में शिफ्ट कर दिया गया है। विशेष सुरक्षा समूह की सुरक्षा हटने के चलते उनसे लोधी स्टेट स्थित सरकारी बंगला खाली करवाया गया है। नियमानुसार जिसके पास एसपीजी सुरक्षा कवच नहीं होता है, उसे सरकारी बंगला नहीं मिलता है। संभवत: १ अगस्त से पहले प्रियंका गांधी गुरुग्राम में रहने चली जाएंगी। गुरुग्राम की सबसे महंगी इस सोसायटी में बिल्डर की तरफ से त्रिस्तरीय सुरक्षा प्रदान की गई है। इसके साथ-साथ प्रियंका गांधी की अपनी सुरक्षा होगी और शायद इसीलिए इस सोसाइटी को चुना गया है। चूंकि प्रियंका गांधी को पूरे देश की राजनीति पर नजर रखनी है, इसीलिए उन्होंने दिल्ली के नजदीक गुरुग्राम की दहलीज पर घर लिया है। इस बीच नए घर में जाने से पहले प्रियंका ने भाजपा सांसद अनिल बलूनी को चाय पर आमंत्रित भी किया। यह बंगला बलूनी को ही आवंटित किया गया है। बलूनी ने स्वास्थ्य कारणों से प्रियंका के न्योते को स्वीकार करने में असमर्थता जाहिर की। इस संबंध में प्रियंका ने ट्वीट किया, ‘अनिल बलूनी और उनकी पत्नी से बात हुई। मैं ईश्वर से उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करती हूं। उन्हें नए घर की शुभकामनाएं देते हुए आशा करती हूं कि उन्हें भी इस घर में उतनी ही खुशियां मिलें, जितनी मुझे और मेरे परिवार को मिलीं।’
हनुमत शरणं
जीव विज्ञान के शोधार्थी चाहें तो चिकित्सा क्षेत्र में नया शोध कर सकते हैं। शोध इस बात पर किया जाए कि किस मंत्र के प्रभाव से मंद नेत्र ज्योति बढ़ती है। फिर इस बात पर भी शोध हो कि हनुमान चालीसा के पांच बार पाठ से कोरोना किस तरह भागेगा? इसके लिए उन्हें जरूरत हो तो भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर से मार्गदर्शन ले सकते हैं। उन्होंने कोरोना वायरस महामारी से छुटकारे के लिए अनूठा `मंत्र’ दिया है। ठाकुर ने आह्वान किया है कि देश से कोरोना वायरस की महामारी को समाप्त करने के लिए वे ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करें। प्रज्ञा ने ट्वीट किया, ‘आइए हम सब मिलकर कोरोना वायरस महामारी को समाप्त करने के लिए और लोगों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए एक आध्यात्मिक प्रयास करें। ५ अगस्त तक प्रतिदिन शाम ७:०० बजे अपने घरों में हनुमान चालीसा का पांच बार पाठ करें। ५ अगस्त को अनुष्ठान का रामलला की आरती के साथ घरों में दीप जलाकर समापन करें।’ यह अलग बात है कि मई में उनकी गुमशुदगी के पोस्टर जब भोपाल में लगे तब अगले दिन ३१ मई को उन्होंने वीडियो संदेश के जरिए कहा था कि उनकी हालत ठीक नहीं है। उन्हें एक आंख से दिखना बंद हो गया है। दूसरी से भी धुंधला और केवल २५ प्रतिशत दिख रहा है। साथ ही ब्रेन से लेकर रेटीना तक में सूजन और पस है। डॉक्टरों ने उन्हें बातचीत करने से मना किया था। वे दिल्ली के एम्स अस्पताल में इलाज करा रही थी।
जंगीर की जंग
देशभक्ति का उभार तात्कालिक ज्यादा है। राजनीति के लिए तो इसका प्रयोग कब किया जाता है? यह कमोबेस हर भारतीय जानता है। ‘देश के लिए जान दे दूंगा’ और देश के लिए जान दे देने के बीच का अंतर देखना है तो पंजाब के ‘सफेद सोने के क्षेत्र’ कहे जाने वाले मानसा जिले के कुसला गांव चलें। यह जिला कपास उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहां कारगिल की लड़ाई में शहीद हुए १५ सिख लाइट इन्फेंट्री के नायक निर्मल सिंह की ८० साल की मां जंगीर कौर अपना पेट पालने के लिए मनरेगा मजदूर के तौर पर काम कर रही हैं। शहीद की बुजुर्ग मां सरकार की अनदेखी और शहीद के अंतिम संस्कार के मौके पर खोखले वादों के ऐलान के बाद आज तंगहाली की जिंदगी काटने और एक टूटे घर में जिंदगी के बचे दिन गुजारने को मजबूर हैं। आलम यह है कि ८० वर्ष की यह वीर मां अपना पेट भरने के लिए मनरेगा और खेतों में दिहाड़ी करती हैं। बेटे की शहादत के वक्त सरकारों ने ५ लाख रुपए मकान बनाने के लिए, राशन-पानी मुफ्त, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और बस परमिट देने का आश्वासन दिया था, लेकिन हकीकत में इस बुजुर्ग मां को कुछ नहीं मिला और अगर कुछ मिला तो सिर्फ मनरेगा में दिहाड़ी। बरसात ने घर में घुसकर छत ढहा दी है। पिछले साल पंजाब की वर्तमान सरकार ने एक निजी संस्था के सहयोग से गांव में निर्मल सिंह की प्रतिमा लगवा दी। गांव के स्कूल का नाम भी शहीद के नाम पर किया जाना था मगर वह नाम सिर्फ बोर्ड पर लिखकर लटक गया। अधिकृत मंजूरी अब तक नहीं मिली है। केंद्र सरकार शहीदों के परिवारों का कितना ध्यान रख रही है? जंगीर कौर से बेहतर कौन जानेगा। देश पर बेटा न्योछावर करनेवाली इस मां की जीवन के लिए जंग अब भी जारी है।