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झांकी…बांस पर टिकी सांस

आ गए रुपल्ली पर
सरासर बेइज्जती इसे कहते हैं। कहां तो एक-एक विधायक की कीमत ३५ करोड़ रुपए की खबरें और कहां विधायक से मानहानि का हर्जाना सिर्फ एक रुपया। इतनी तेजी से तो बादल से पानी की बूंद भी नीचे नहीं गिरती। जैसे ही बसपा से कांग्रेसी बने विधायक गिरिराज सिंह मलिंगा ने आरोप लगाया कि बागी सचिन पायलट ने उन्हें भाजपा में जाने के लिए ३५ करोड़ रुपए की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया था। पायलट ने मलिंगा की सेवा में कानूनी नोटिस रवाना कर दिया, जिसमें उन्‍होंने गिरिराज से माफी मांगने और एक रुपया की राशि देने की मांग की है। साथ ही कहा है कि अगर सात दिनों में माफी नहीं मांगी तो दीवानी और आपराधिक मानहानि का मामला दाखिल कर अदालती परिक्रमा करा देंगे। सवाल यही है कि पायलट ने यह वैâसे मान लिया कि जो ३५ करोड़ में नहीं मिला-बिका, वह सिर्फ एक रुपया में मान जाएगा। मलिंगा ने इसके अलावा कहा था कि यह दिसंबर से हो रहा है, यह कोई नई बात नहीं है। मैंने उनसे कहा था कि मैं ऐसा नहीं कर सकता। मैंने बसपा को ऐसी ही बातों के कारण छोड़ दिया। अगर मैंने कांग्रेस छोड़ दी, तो मैं जनता को क्या बताऊं?’ इस बारे में अपना पक्ष रखते हुए पायलट ने कहा था कि ऐसे आरोपों से मैं उदास हूं, मगर हैरान नहीं हूं। ऐसा करके मुझे बदनाम करने की साजिश की जा रही है। दरअसल ये असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
बड़े मंत्रिमंडल को चुनौती
मध्य प्रदेश में सत्ता की लड़ाई अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गई है। राज्य के मंत्रिमंडल के आकार को घटाने के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सवाल उठाया है कि शिवराज मंत्रिमंडल का आकार विधानसभा में सदस्यों की संख्या को देखते हुए वैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। नियमत: वर्तमान विधानसभा सदस्यों की संख्या के मुताबिक ३४ मंत्री नहीं बनाए जा सकते। विधानसभा में जितनी सदस्य संख्या है उसके हिसाब से विधानसभा सदस्यों की १५ प्रतिशत संख्या से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते। लेकिन शिवराज मंत्रिमंडल में तय संख्या से ज्यादा मंत्री बनाए गए हैं। प्रजापति के वकीलों कपिल सिब्बल और विवेक तनखा की दलील है कि प्रदेश में हुआ मंत्रिमंडल विस्तार संविधान के अनुच्छेद १६४ए का स्पष्ट उल्लंघन है। अनुच्छेद ३२ के तहत दायर याचिका में मुद्दा उठाया गया है कि हाल ही में शिवराज सरकार ने २८ मंत्रियों की नियुक्ति के साथ पूर्व में पहले से ही छह मंत्री मिलाने पर मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या ३४ हो गई है। धारा १६४ए के तहत विधानसभा की कुल सदस्यों के १५ प्रतिशत सदस्य ही मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसका कुल आंकड़ा सिर्फ ३० मंत्रियों का होता है। इसके बावजूद चार मंत्री ज्यादा बना दिए गए हैं।
किस्सा कुर्सी का..
उत्तर प्रदेश में सब सुखी हैं। जैसे कल्पवृक्ष के नीचे बैठते ही इच्छाएं साकार होने लगती हैं वैसे उत्तर प्रदेश सचिवालय की एक कुर्सी है। मगर इस कुर्सी पर अपनी मर्जी से बैठना भारी भी पड़ सकता है। मामला सचिवालय के एक अनुसचिव द्वारा अतिरिक्त मुख्य सचिव सचिवालय (प्रशासन) की कुर्सी पर बैठने का है। सचिवालय के मुख्य परिसर में अपर मुख्य सचिव सचिवालय (प्रशासन) का कार्यालय कक्ष है। गत सोमवार की सुबह करीब सवा १० बजे सचिवालय में अनुसचिव (अंडर सेक्रेटरी) स्तर के कर्मचारी मुशर्रफ हुसैन रिजवी अपर मुख्य सचिव सचिवालय (प्रशासन हेमंत राव) के कक्ष में पहुंचा और कुर्सी पर बैठ गया। स्टाफ ने मना किया तो भी नहीं हटा। काफी देर तक हंगामा मचा रहा। इसी बीच अपर मुख्य सचिव राव कक्ष में दाखिल हुए और मुशर्रफ को अपनी कुर्सी पर बैठा देखा तो पूछा, आप कौन तो उसने भी पलटकर पूछ लिया आप कौन? इसके बाद उसे कुर्सी से हटाकर वेटिंग रूम में बंद कर दिया गया। राव को सचिवालय सुरक्षा अधिकारियों और स्टाफ से बातचीत के बाद पता चला कि मुशर्रफ मानसिक रूप से अस्वस्थ है, लिहाजा उसे रिहा करवा दिया।
बांस पर टिकी सांस
वर्चुअल रैलियों में नेताजी बिहार को स्वर्ग से भी ज्यादा सुंदर बताते नहीं थक रहे हैं। राशन भले न मिले मगर बिहारवासियों को चुनाव पूर्व भाषण जरूर परोसे जा रहे हैं। इन भाषणों से लगता है कि बिहार में विकास की गंगा बह रही है। लेकिन दिल्ली दरबार के एक बड़के मनसबदार के गांव तक इस गंगा की जगह कोसी का पानी हर साल आता है और सबको पानी-पानी कर जाता है। मोदी सरकार में मंत्री आरके सिंह का पैतृक गांव बासबट्टी सुपौल जिला मुख्यालय से मात्र ६ किलोमीटर दूर है। इसी बासबट्टी पंचायत के मुसहरी गांव के करीब ३ हजार लोगों की जिंदगी एक चचरी पुल पर टिकी है। इस बांस के चचरी के सहारे लोग साइकिल, मोटरसाइकिल लेकर पार होते हैं, जो बेहद खतरनाक है। थोड़ी भी चूक हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है। इस गांव के लोग हर साल चंदा करके चचरी पुल को बनाते हैं। हर साल बारिश और बाढ़ में यह चचरी पुल टूटकर बिखर जाता है। गांववाले कई साल से एक पुलिया बनाने की मांग कर रहे हैं पर आजतक किसी ने इन गांववालों की बात नहीं सुनी। केंद्रीय मंत्री का गांव होने के नाते लोगों को उम्मीद थी कि चचरी के पुल से छुटकारा मिलेगा, पर अभी तक ऐसा नहीं हो सका है और गांव की पूरी आबादी इसी पुल के सहारे जीने को विवश है।