" /> झांकी… बेलगाम तानाशाही!

झांकी… बेलगाम तानाशाही!

तमाम जागरूकता अभियान के विरार पू. शनि मंदिर के पास स्थित कुलस्वामिनी नगरी घासकोपरी सोसाइटी की यह तस्वीर सोचने पर विवश करती है। इस इमारत की दूसरी मंजिल पर बाणेश्वर राणा अपने परिवार के साथ रहते हैं। लॉकडाउन के चलते किसी तरह गुजारा किया और अंतत: पास में कहीं खिचड़ी बंटती थी, उस पर निर्भर हो गए। अनलॉक-१ शुरू हुआ तो बेटे रूद्र ने काम ढूंढा और उसे घरों तक दवा पहुंचाने का काम मिला। इसी दौरान कोरोना की चपेट में आ गए और पिता व छोटा भाई भी संक्रमित हो गया। बहन की रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन उसे भी अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। इलाज के बाद ठीक होने पर रूद्र उसकी बहन को घर भेज दिया गया। पिता और छोटा भाई अभी भी अस्पताल में हैं। मगर सोसाइटी का नजरिया बेहद गैरजिम्मेदाराना है। कोरोना को हरा कर वापस लौटे भाई-बहन का हौसला बढ़ाने की बजाय उनका सामाजिक बहिष्कार कर रखा है। घर का सामान लाने के लिए नीचे नहीं उतरने दिया जाता और और यदि उसके दोस्त उसे कुछ देने आते हैं, तो उन्हें ऊपर नहीं जाने दिया जाता। इसके अलावा बरामदे पर लकड़ी के बांस के साथ घर से बाहर निकलने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। बहन को पानी भी भरने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में थोक के भाव में फर्जी कोरोना योद्धाओं को अवार्ड बांटने वाले भी गायब हैं। असल में कोरोना को हराकर लौटे इन भाई-बहन को अवॉर्ड न दें पर उनको सम्मानित जीवन जीने का अवसर तो दें। विरार पुलिस और जन-प्रतिनिधियों को इस संदर्भ में पीड़ितों की मदद करना चाहिए।
भूखे से जेल भली…!
समझिए हालात कितने खराब हो सकते हैं जब भर पेट खाने के लिए लोग जेल जाना बेहतर समझने लगें। इसके लिए चोरी भी करने में उनको कोई गुरेज नहीं है। बिहार के कैमूर जिले की यह घटना इसलिए सोचने पर विवश करती है जब हम केंद्र व राज्य स्तर पर गरीबों के कल्याणार्थ लगातार सरकारी मुनादी सुनते हैं। शायद ८० करोड़ परिवारों (?) तक राशन पहुंचाने का दावा करने वाली केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की दूरबीन से ये लोग वंचित रह गए। यहां पर कुछ चोर इसलिए चोरी करते हैं ताकि जेल में जाने पर उन्हें भरपेट खाना मिल सके। खास बात यह है कि पकड़े जाने पर चोरों ने पुलिस अधीक्षक के सामने ये बातें कही हैं। चोरों ने एसपी के सामने चोरी करने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि सर हम लोग मुर्गा, पनीर खाना चाहते हैं। लेकिन जेल में बिना काम किए ही अच्छा खाना मिल जाता है। २३ जून को करमचट थाने के थिलौई गांव स्थित एक घर में हुई चोरी में चोरों ने लाखों रुपए के जेवर सहित नकदी रकम पर हाथ मारा था। चोरी के आरोप में एक दुकानदार साहित ८ लोग गिरफ्तार किए गए। इनमें शामिल गुड्डू मुसहर ने बताया कि घर में काम करने वाले नौकर ने खुद पैसे के लालच में चोरी कराई थी। हम भी पैसे के लालच में पड़ गए। घर पर रहते हैं तो हमे कोई काम भी नहीं देता है। गरीबी के कारण रूखे- सूखे खाना खाना पड़ता है। किसी मामले में जेल जाते हैं भरपेट खाना मिलता है। उसने कहा कि जितने दिन जेल में रहते हैं अच्छा खाने की व्यवस्था हो जाती है। इसके उलट कुछ लोगों का कहना है कि कामचोरी के शिकार ये लोग जान-बूझकर अपराध कर जेल जाते हैं।
चमकेशी मोर्चा
कोरोना लॉकडाउन के बाद धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों में ढील के बीच बिजली के बिलों को लेकर सामान्य जनता में रोष है। बताया जा रहा है कि मीटर रीडिंग के बाद जो वास्तविक बिल उपभोक्ताओं को भेजे जा रहे हैं वे सामान्य से बहुत ज्यादा हैं। मुंबई सहित सारे देश में बिजली कंपनियों की लूट के खिलाफ जनता गुस्से में है। होना भी चाहिए। इसलिए कांदिवली पूर्व के विधायक ने राजनीति चमकाने के लिए बिजली बिलों में बढ़ोत्तरी के खिलाफ जो मोर्चा निकाला उसमें बिजली कंपनी के खिलाफ एक भी शब्द बोलना गवारा न समझा। मुंबई के उपनगरों के अधिकांश क्षेत्र में अदानी इलेक्ट्रिसिटी द्वारा बिजली आपूर्ति की जाती है। अब विधायक ठहरे भाजपा के, दिंडोशी स्थित बिजली कंपनी के क्षेत्रीय कार्यालय तक मोर्चा तो ले गये लेकिन अदानी के खिलाफ नारेबाजी की हिम्मत न जुटा सके। केवल पश्चिमी द्रुतगति महामार्ग पर थोड़ी देर की चमकेशी राजनीतिक, शोशेबाजी और फोटू-शोटू खिंचने-खिंचाने के बाद क्रांतिकारी मोर्चा समाप्त हुआ। हां, इस्तीफा सरकार से मांग रहे थे जबकि राज्य सरकार की बिजली आपूर्ति कंपनी महावितरण है। महावितरण मुंबई के उत्तरी उपनगर में आपूर्ति भी नहीं करती। अदानी से पंगा लेने की हिम्मत वो भी भाजपाई करे, भूल जाओ।
दहेज में सांप!
मध्यप्रदेश के गौरिया समुदाय के लोग अपने दामाद को दहेज में २१ जहरीले सांप देते हैं। उनका मानना है कि अगर कोई पिता शादी में अपने दामाद को जहरीले सांप न दे तो उसकी बेटी की शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चलती। पेशे से संपेरा यह समुदाय मुख्यत: सांप पकड़ने का काम करता है। उनकी आजीविका पूरी तरह सांपों पर ही टिकी होती है। इस समुदाय में जब भी किसी बेटी की शादी तय होती है तब लड़की का पिता जहरीले सांपों को इकट्ठा करने में जुट जाता है। बेटी के पिता द्वारा दामाद को सांप इस वजह से दिए जाते हैं, ताकि वह परिवार का पेट पाल सके। बेटी को दहेज में २१ सांप देने की परंपरा इस वजह से ही चल रही है। गौरिया समुदाय के लोग सांप को परिवार का सदस्य मानते हैं। इस समुदाय में यदि कोई सांप पिटारे में मर जाता है तो पूरा परिवार अपना मुंडन करवाता है। साथ ही सांप की मृत्यु पर परिवार को पूरे समुदाय के लिए भोज का आयोजन करना पड़ता है। ये सभी नियम सांप को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए हैं।