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झांकी… भाजपा में भी बाड़ेबंदी

भाजपा में भी बाड़ेबंदी
राजस्थान के लगातार बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में अब भाजपा के भीतर भी घबराहट की सूचना है। खबर है कि भाजपा के २३ विधायक गुजरात शिफ्ट कर दिए गए हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महासचिव बीएल संतोष से मुलाकात की। इन मुलाकातों में राजस्थान के राजनीतिक हालात पर चर्चा होने के संकेत मिले हैं। राजे पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में हैं। उधर भाजपा ने अब तक २३ विधायकों को गुजरात भेजा है, जिनमें से १८ पोरबंदर में हैं। इन भाजपा विधायकों की पोरबंदर में ही बाड़ेबंदी की जा रही है। चर्चा है कि ७५ में करीब ४० विधायकों की बाड़ेबंदी पोरबंदर में की गई है। ये वे विधायक हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि गहलोत गुट ने उनसे संपर्क साधा है। अब भाजपा आरोप लगा रही है कि उनके विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। इन विधायकों को कल यानी ११ अगस्त को पोरबंदर से जयपुर लाकर फिर बाड़ेबंदी में रखा जाएगा। इससे पहले शुक्रवार को भाजपा के १२ से अधिक विधायक गुजरात में अमदाबाद के पास एक रिसोर्ट में पहुंचे थे। इन विधायकों के सोमनाथ यात्रा की भी सूचना है। इनमें निर्मल कुमावत, गोपीचंद मीणा, जब्‍बर सिंह सीरीज, गुरुदीप शाहपिनी, गोपाल शर्मा और धर्मेंद्र मोची के नाम शामिल हैं। एक विधायक निर्मल कुमावत ने पोरबंदर एयरपोर्ट पर स्थानीय मीडिया से कहा कि राजस्‍थान में कांग्रेस सरकार हमें उनके पक्ष में मतदान करने के लिए दबाव डाल रही है। इधर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया किसी भी तरह की बाड़ेबंदी से इंकार करते हुए कह रहे हैं कि विधायक गुजरात घूमने गए हैं।
पहला प्रसाद हरिजन को
अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन के बाद अब प्रतीकों के माध्यम से राजनीतिक हेतु साधने का क्रम शुरू हुआ है। इसलिए लड्डू, रामचरितमानस की प्रति और तुलसी की माला की प्रसादी लेकर मुख्यमंत्री का विशेष हरकारा जब महावीर हरिजन के दरवाजे पर पहुंचा तब यह आभास दिलाने की कोशिश की गई कि दलित समुदाय का आदर था/है/रहेगा। कभी इन्हीं महावीर के घर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ भी आतिथ्य ग्रहण कर चुके हैं। प्रदेश में दलित उत्पीड़न की घटनाओं से उद्वेलित दलित समाज की पीड़ा पर मरहम लगाने का काम इस प्रसादी ने किया। भूमिपूजन का पहला प्रसाद पाकर महावीर हरिजन का गदगद होना स्वाभाविक है। महावीर को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जब घर मिला था तब योगी आदित्यनाथ उनके घर भोजन करने गए थे। महावीर को उम्मीद है कि अब राज्य में जातीय भेदभाव समाप्त होगा और हर कोई विकास तथा सबके कल्याण के बारे में सोचेगा। चूंकि कोविड-१९ प्रोटोकॉल के चलते भूमिपूजन के लिए काफी कम लोग आमंत्रित थे, इसलिए अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एवं प्रशासन अधिक से अधिक लोगों तक प्रसाद वितरित कर रहा है। अयोध्या में मुख्यमंत्री के निर्देश पर पहला प्रसाद महावीर के परिवार के पास भेजा गया था। जबकि भूमिपूजन के लिए आमंत्रित सभी लोगों को चांदी का सिक्का भेंट किया गया, जिस पर राम दरबार का चित्र और ट्रस्ट का लोगो अंकित है।
राम के सामने परशुराम
अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन के बाद अब उत्तर प्रदेश में प्रतिमाओं के माध्यम से राजनीति जोर पकड़ने लगी है। सरकार ने अयोध्या में भगवान राम की २५१ मीटर ऊंची प्रतिमा लगाने की कवायद तेज कर हिंदू मतों के ध्रुवीकरण को दोगुनी गति से शुरू किया है। दूसरी तरफ प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर शुरू जोर-आजमाइश में समाजवादी पार्टी खुलकर सामने आ गई है। सपा का दावा है कि राज्य में ब्राह्मणों के लिए सबसे ज्यादा काम सपा ने किया है। इसी क्रम में अब सपा भगवान परशुराम की प्रतिमा लगाकर ब्राह्मणों का सम्मान बढ़ाएगी। दावा किया जा रहा है कि लखनऊ में स्थापित होनेवाली परशुराम की यह प्रतिमा राज्य की सबसे ऊंची और भव्य होगी। इसकी ऊंचाई १०८ फिट होगी। परशुराम चेतना पीठ ट्रस्ट के तहत निर्मित होनेवाली इस प्रतिमा के लिए समाजवादी पार्टी के नेता जयपुर जाकर देश के बड़े मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति और अटल बिहारी वाजपेयी जी की मूर्ति बनाने वाले राजकुमार से भी बातचीत कर चुके हैं। प्रतिमा के लिए समाजवादी पार्टी चंदे से धन जुटाएगी। दूसरी तरफ सरदार पटेल की १८३ मीटर ऊंची प्रतिमा के शिल्पकार नोएडा के मूर्तिकार राम सुतार को भगवान राम की मूर्ति के निर्माण का काम सौंपा गया है। मूर्तिकार राम सुतार और उनके बेटे अनिल सुतार `पद्म भूषण’ से सम्मानित हो चुके हैं। इन दिनों राम सुतार भगवान राम की मूर्ति के निर्माण में व्यस्त हैं। भगवान राम की मूर्ति की डिजाइन के पारित होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बातचीत की, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मूर्ति पूरी तरह से स्वदेशी होनी चाहिए।
सृजन घोटाला चर्चा में
बिहार में चुनाव नजदीक आते ही सृजन घोटाले के ताबूत पर पड़ी गर्द फिर उड़ने लगी है। तीन साल से ठंडे बस्ते में पड़े इस घोटाले की जांच को लेकर सीबीआई की सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं। अब तक इस घोटाले के मुख्य आरोपी अमित कुमार और प्रिया कुमार की गिरफ्तारी तो दूर सीबीआई उनका पता तक नहीं लगा पाई है। अलबत्ता इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी भी एक-एक कर जमानत पर रिहा हो रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राज्य के एक बड़े भाजपा नेता के तार इस घोटाले से जुड़े हैं इसलिए सीबीआई जांच की कसरत दिखावा मात्र है। दो हजार करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी राशि के अवैध हस्तांतरण से जुड़े इस मामले में तीन साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी आदेश तितरमारे ने पहली एफआईआर दर्ज कराई थी। विभिन्न विभागों की सरकारी राशि को राष्ट्रीयकृत बैंक से सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड में अवैध हस्तांतरण से जुड़े इस घोटाले को बिहार के सबसे बड़े घोटाले के रूप में जाना जाता है। सृजन की संस्थापिका मनोरमा देवी की मौत के बाद संस्था के कर्ताधर्ता बने अमित कुमार और प्रिया कुमार को गिरफ्तार करने में जांच एजेंसी अब तक सफल नहीं हो पाई है। सृजन घोटाला मामले में भागलपुर समेत बांका और सहरसा में कुल २३ मामले दर्ज हैं। मामले में १८ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सिफारिश के बाद चंद बैंककर्मियों और सरकारी अधिकारियों की गिरफ्तारी और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के अलावा इस मामले में सीबीआई को कोई खास बड़ी कामयाबी नहीं मिली। धीरे-धीरे गिरफ्तार आधा दर्जन से अधिक आरोपी जमानत पर रिहा भी हो गए हैं।