" /> झांकी…मिले सुर मेरा तुम्हारा

झांकी…मिले सुर मेरा तुम्हारा

बिहार में कोरोना खतरे को देखते हुए चुनाव टालने की मांग उठने लगी है। पहले राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस मांग को परोक्ष रूप से उठाया तो अब उनके सुर में सुर मिलाते हुए लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने भी चुनाव टालने की वकालत की है। चिराग ने ट्वीट के जरिए कहा है कि चुनाव के नाम पर बड़ी आबादी को खतरे में झोंकना ठीक नहीं है। आयोग को इन बातों पर ध्यान रखकर पैâसला लेना चाहिए। धुर विरोधी खेमों के युवा नेताओं के सुर मिलने के पीछे चिराग की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा है। दरअसल नीतीश कुमार के रवैये पर लोजपा खासी नाराज है और इसीलिए जब दिल्ली में पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने बिहार के अपने प्रमुख नेताओं के साथ मंथन किया तो उसका निचोड़ यह था कि पार्टी के पास बिहार विधानसभा चुनाव में खोने के लिए कुछ नहीं है। बहुत बुरा हुआ तो भी स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर होगी। चिराग की पीड़ा यह है कि उनके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करना आसान है लेकिन नीतीश कुमार से बात करना मुश्किल। इसीलिए पार्टी बड़ा दांव खेलने की भूमिका में है क्योंकि फिलहाल बिहार में पार्टी के दो विधायक हैं। पार्टी का मानना है कि अगर अकेले चुनाव लड़ी तो इससे ज्यादा सीटें आएंगी। वजह यह है कि फरवरी २००५ में पार्टी ने अकेले चुनाव लडा था और २९ सीटें आयी थीं। जाहिर है यदि आगामी चुनाव में राजग से अलग लड़ने पर लोजपा की सीटें बढ़ती हैं तो नई विधान सभा में एकाध मंत्री पद भी मिल सकता है। इसलिए सीटें बढ़ाने के लिए चिराग किसी भी हद तक जाने की तैयारी में नजर आ रहे हैं। चिराग ने अपनी पार्टी के नेताओं को सभी २४३ सीटों पर उम्मीदवारों की तलाश करने का काम सौंपा है। तेजस्वी के सुर से सुर मिलना संयोग मात्र है।
कार नहीं तो पहिया सही
भागते भूत को लंगोटी बहुत वाली कहावत उन चोरों पर लागू हो रही है, जो कोरोना संकट में चोरी करने से भी नहीं चूक रहे हैं और जो हाथ लगे, चुरा रहे हैं। तेजी से बढ़ती बेरोजगारी और वित्तीय समस्याओं ने देश के कई हिस्सों में चोरी और छीनने के मामले को जन्म दिया है। इस दौरान कार चोरी की घटनाएं भी बढ़ी हैं। मगर दिल्ली में जब चोर कार न चुरा सके तो उनके पहिये ही लेकर चंपत हो गए। चोरों ने एक नई किआ सेल्टोस और न्यू हुंडई क्रेटा के चारों पहिये उड़ा दिए। चोरों ने दोनों एसयूवी को चारों ओर से र्इंटें लगाकर उठाया और पहिये निकालकर चलते बने। सुबह क्रेटा के मालिक राज कुमार गुप्ता और किआ सेल्टोस के मालिक पंकज गर्ग जब पार्विंâग की जगह पर पहुंचे तब सन्न रह गए। असुरक्षित पार्विंâग के खतरों को देखते हुए पुलिस ने सलाह दी है कि कार को ऐसी जगह पार्क करें जहां ज्यादा रोशनी हो। जब रोशनी रहेगी तो चोर खुद इस प्रकार की चोरी करने से डरेगा। इसके अलावा चोरों से बचने के लिए व्हील को ४५ डिग्री के कोण पर मोड़कर रखना सुरक्षित होता है क्योंकि इस स्थिति में कार के नीचे जैक लगाना मुश्किल होगा। पहियों को सुरक्षित करने का एक और तरीका यह भी है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्हील लॉक के एक सेट का इस्तेमाल करें।
निठल्ला पुरुषार्थ
सामान्यत: पति-पत्नी के बीच घरेलू हिंसा के मामले थानों तक पहुंचते हैं और पुलिस संबंधित कानून के सहारे इस तरह के मामलों का निपटारा करने की कोशिश करती है। मगर पटना का गर्दनीबाग महिला थाना इन दिनों एक अजब कशमकश में फंसा है। एक महिला को बच्चा चाहिए लेकिन उसका पति बच्चे के लिए तैयार नहीं है। इस मुद्दे पर पति-पत्नी के बीच बात इतनी बढ़ी कि दोनों महिला थाना पहुंच गए। पिछले साल शगुफ्ता का निकाह पटना सिटी में रहनेवाले सद्दाब से हुआ था। शगुफ्ता का टेंशन यह है कि उसके बाद उसकी छोटी बहन की शादी हुई और उसके एक बच्चा भी है जबकि शगुफ्ता को अब तक मां न बन पाने के कारण घर से लेकर बाहरवाले तक ताने देने लगे हैं। पति का कहना है कि वह अभी बच्चे की परवरिश के लिए तैयार नहीं है। बच्चे की ख्वाहिश और लॉकडाउन ने इन पति-पत्नी के रिश्ते में कड़वाहट डाल दी है। नतीजा यह है कि घर की बात थाने तक पहुंच गई है। महिला का थाने में आने की वजह तो बच्चे के लेकर विवाद था, लेकिन इस झगड़े के तह में कोरोना काल में हुई बेरोजगारी भी है। पत्नी अपने पति से इसलिए भी परेशान है क्योंकि वह आम दिनों में भी दिनभर घर में निठल्ला बैठा रहता है। इस पर सद्दाब का कहना है कि पत्नी के घरवालों ने सब कुछ देख कर शादी की है। उन्हें पता था कि मैं बेरोजगार हूं, इसलिए मैं काम नहीं करूंगा। फिलहाल इस मामले में पुलिस दोनों की काउंसिलिंग कर रही है और घर बचाने की कोशिश में जुटी है।
मुरैना, मामा और राजनीति!
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान क्या कोरोना आपदा को अवसर में तब्दील करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वजह यह है कि पूरे प्रदेश में इंदौर कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है और मुख्यमंत्री को अब तक इतनी फुरसत नहीं मिली कि इंदौर जाकर कोरोना का ऑडिट करते। इसके उलट शनिवार को मामाजी सिंधिया के गढ़ ग्वालियर-चंबल संभाग में कोरोना की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे तो कांग्रेस के कान खड़े हुए। कांग्रेस को लगता है कि कोरोना की चादर तले मुख्यमंत्री प्रदेश में २४ सीटों के लिए होनेवाले विधानसभा के उपचुनाव आगे खिसकाने की कसरत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब महाराज के क्षेत्र में नए-पुराने भाजपाइयों के बीच अंदरखाने तलवारें खिंची हुई हैं। खबर है कि कभी महाराज के खास रहे केपी यादव २०१९ में गुना से महाराज को पछाड़कर यह अविजित सीट भाजपा की झोली में डालने के बाद जिस तेजी से सिंधिया की बराबरी पर उतरे थे, अब महाराज के भाजपा में आने के बाद उनकी स्थिति फिर से अंडे के भीतर जानेवाली हो गई है। हालात ये हैं कि पार्टी के कार्यक्रमों में भी प्रोटोकाल के हिसाब से उनकी फोटो गायब रहती है और महाराज छाये हुए हैं। संभवत: शिवराज कोरोना के बहाने क्षेत्र में भाजपा कैडर की मंशा भी जानना चाहते हैं/थे, इसलिए उनका यह दौरा सवालों के घेरे में है। वैसे यह भी एक ध्रुव सत्य है कि उपचुनाव की १६ सीटें इसी क्षेत्र में हैं और पार्टी में यहीं सबसे ज्यादा उथल-पुथल मची है। मुख्यमंत्री का अचानक ग्वालियर-मुरैना जाना इसलिए ही सवाल खड़े करता है। इधर विपक्ष इस तरह की व्यूह रचना में लगा है, जिससे प्रदेश में उपचुनाव २० सितंबर से पहले ही हों और चुनाव टालने की राजनीति पर रोक लग सके।