" /> झांकी… राजे का वीटो

झांकी… राजे का वीटो

राजे का वीटो
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की दिल्ली यात्रा का असर यह हुआ कि महीने भर से अपनी पार्टी से नाराज चल रहे सचिन पायलट कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। खबर यह है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात में राजे ने साफ कर दिया कि पायलट के साथ इतने केबिन क्रू नहीं हैं कि भाजपा सत्ता की उड़ान भर सके। लगभग यही संदेश रक्षा मंत्री राजनाथ के साथ बातचीत में दिया गया। पार्टी फोरम पर राजे का वीटो चला और नतीजा यह हुआ कि हरियाणा के जिस सात सितारा होटल में पायलट गुट के विधायक ठहरे हुए थे, उस होटल ने उन विधायकों को बिल की याद दिलाना शुरू किया। इस बीच पहले सात विधायकों ने किसी न किसी माध्यम से सीधे आलाकमान से बात की। उसके बाद तीन और विधायक कांग्रेस के डेरे में वापस होते दिखे। मतलब पायलट गुट विभाजन की तरफ बढ़ रहा था। तब पायलट ने प्रियंका गांधी को फोन किया लेकिन प्रियंका ने कहा कि राहुल से बात करें। इसके बाद सोमवार को कांग्रेस के कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं से पायलट की बात-चीत हुई और अंतत: वे राहुल गांधी के सामने थे। इस मीटिंग में प्रियंका भी शामिल थीं। फिलहाल पायलट को कोई बड़ा आश्वासन न देकर इतना भर कहा गया है कि उनका सम्मान नहीं घटेगा। पायलट को पार्टी की प्राथमिकता भी बता दी गई कि सबसे पहले आगामी १४ अगस्त को शुरू हो रहे सत्र में गहलोत सरकार का बहुमत साबित हो। ताकि आगामी ६ माह तक सरकार को किसी भी तरह के शक्ति परीक्षण से न गुजरना पड़े। शाम होते-होते सचिन पायलट समर्थक विधायक भंवरलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। फिर मीडिया से कहा कि जब परिवार में कोई नाराज होता है तो खाना नहीं खाता। हमने एक महीने तक नाराजगी जाहिर की अब नाराजगी दूर हो गई है। पार्टी अब जनता से किए वादों को पूरा करेगी। इसके बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने फोन पर अशोक गहलोत से समन्वय के फार्मूले पर करीब २० मिनट तक बात की है। रात करीब ९.१५ बजे पायलट अपने सभी समर्थक विधायकों के साथ १५ गुरुद्वारा रकाबगंज रोड स्थित कांग्रेस के वॉर रूम पहुंचे जहां राहुल गांधी, अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल के साथ चर्चा की।
ब्राह्मणों पर डोरे
एक विज्ञापन बहुत चर्चित हुआ था कि उसकी कमीज मेरी कमीज से ज्यादा सफेद कैसे? ब्राह्मण मतों में पैठ बनाने के लिए विज्ञापन की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में पौराणिक चरित्रों की प्रतिमाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। राज्य में हर पार्टी अब ऊंची से ऊंची प्रतिमा लगाने की होड़ में कूद चुकी है। पिछले बुधवार को अयोध्या में राममंदिर भूमिपूजन के बाद सूबे की राजनीति में हिंदू मतों की राजनीति भी गहरा गई है। सत्ताधारी भाजपा ने एक बार फिर अयोध्या में भगवान राम की सबसे ऊंची (२५१ फीट) प्रतिमा बनाने का संकल्प दोहराया तो सपा ने ब्राह्मणों में पैठ बनाने के लिए भगवान विष्णु के अंशावतार परशुराम की सबसे ऊंची (१०८ फीट) प्रतिमा लखनऊ में बनाने की घोषणा की। फिर क्या था राजनीति में बहनजी की इंट्री हुई और बसपा अध्यक्ष मायावती ने प्रेस कांप्रâेंस कर ब्राह्मण कार्ड खेल दिया। लेकिन उन्होंने शर्त यह जोड़ी कि अगर २०२२ में सूबे की कमान बसपा के हाथ में आती है तो ब्राह्मण समाज की आस्था के प्रतीक परशुराम और सभी जातियों के महान संतों के नाम पर अस्पतालों व सुविधायुक्त ठहरने के स्थानों का निर्माण कराया जाएगा। बहनजी ने प्रतिमा लगाने से परहेज क्यों किया? जानकार बताते हैं लखनऊ में अपने कार्यकाल में आंबेडकर पार्क में मूर्तियां लगाने का उनका अनुभव अच्छा नहीं रहा है। इसलिए वे प्रतिमाओं की स्थापना से बच रही हैं। हालांकि कांग्रेस ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं मगर यह भी सत्य है कि प्रदेश की राजनीति में अचानक ब्राह्मण तत्व आया है, उसकी जड़ें कांग्रेस से ही जुड़ी हैं। इसलिए मायावती ने सपा से पूछ भी लिया कि सपा सरकार में ब्राह्मणों के लिए क्या किया गया। सवाल के साथ बसपा नेत्री ने अपनी पीठ भी खुद थपथपा ली कि चार बार बनीं बसपा की सरकार में सभी वर्गों के महान संतों के नाम पर अनेक जनहित योजनाएं शुरू की गई थीं, जिसे बाद में आई सपा सरकार ने बदल दिया।
सांसद खदेड़े गए
यह घटना उन सभी राजनेताओं के लिए सबक हो सकती है जो चुनाव के बाद अपने क्षेत्र के नागरिकों के लिए ईद का चांद हो जाते हैं। अभी यह भाजपा सांसद के साथ हुआ है आगे उन सभी के साथ भी हो सकता है जो अपने मतदाताओं की उपेक्षा करते हैं। जनता के गुस्से से नेताओं को डरना चाहिए। भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल अब यह समझ गए होंगे। रविवार को गोयापुर के हरायपुर में गोरियाकोठी पहुंचे सांसद पर लोग भड़क गए। बताया जा रहा है कि जब से बाढ़ आई है तब से सांसद लोगों से मिलने नहीं पहुंचे ना ही उनके लिए किसी तरह की मदद पहुंचाने का प्रयास उनकी तरफ से किया गया। गोरियाकोठी के पूर्व विधायक प्रत्याशी देवेश भी उनके साथ थे। लोगों का मानना है कि सांसद लोगों का दुख-दर्द बांटने नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आए थे। इस पर ग्रामीणों की बहस भी हो गई। देखते ही देखते लोग आक्रोशित हो गए और सांसद को खदेड़ने लगे। उनके साथ आए समर्थकों के साथ मारपीट भी की। लोगों ने आरोप लगाया कि इतने दिनों से जनप्रतिनिधि होते हुए उन्होंने उनके दुखों को अनसुनी कर दी और अब चुनावी मूड से आ रहे हैं।
ठेके पर भजन
जरूरी नहीं कि राम के भजन मंदिर के लिए हों, अच्छे मकसद के लिए शराब के ठेके पर भी राम भजन की धुन सुनी/सुनाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सप्ताहांत में ५५ घंटे का लॉकडाउन घोषित किया है। प्रति सप्ताह शुक्रवार रात १० बजे से सोमवार सुबह ५ बजे तक चलनेवाले इस लॉकडाउन में जरूरी वस्तुओं की बिक्री में शराब भी शामिल है। वैसे भी सरकार ने कोरोना काल में राजस्व के लिहाज से महत्वपूर्ण आबकारी विभाग को शराब और बियर की दुकानों को खोलने का आदेश दिया था। इसलिए जहां ठेके नहीं थे वहां भी ठेके खोले गए। मेरठ के कीर्ति महल इलाके में भी एक ठेका पिछले हफ्ते खुला तो इलाके की महिलाओं ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अपने इलाके में किसी भी कीमत पर ठेका न खुलने देने की मांग को लेकर महिलाओं ने ठेके पर धावा बोला और धरने पर बैठ गर्इं। इस ठेके को बंद कराने को लेकर कीर्ति पैलेस क्षेत्र में रहने वाले सभी लोग आंदोलित हैं। सभी का एकसुर में यही कहना है कि किसी भी सूरत में वो यहां शराब का ठेका नहीं खुलने देंगे। नतीजा ये हुआ कि शराब के ठेके का शटर डाउन हो गया। अब महिलाएं बंद शराब के ठेके के बाहर बैठकर राम भजन कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि वो अभी तक श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर राम भजन गा रही थीं, लेकिन अब अपने क्षेत्र में शराब के ठेके को बंद किए जाने को लेकर राम भजन कर रही हैं। इस दौरान महिलाओं ने दुकान पर लगे बैनर भी हटा दिए। मेडिकल थानाक्षेत्र में खुले इस बीयर और अंग्रेजी शराब के ठेके का पूरा मोहल्ला विरोध कर रहा है। संयुक्त आबकारी आयुक्त राजेश मणि त्रिपाठी द्वारा जिला आबकारी अधिकारी से मामले की रिपोर्ट मांगी गई है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।