" /> झांकी… राबड़ी की कुर्सी पर खतरा

झांकी… राबड़ी की कुर्सी पर खतरा

बिहार विधान परिषद के चुनाव से पहले राजद के आठ विधायकों में से टूट कर पांच के जदयू में शामिल होने और उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्तीफे से लालू की पार्टी भौंचक है। गणित बिगड़ने से राबड़ी देवी से विपक्ष का नेता पद छिन सकता है। नये नियम के मुताबिक, सदन में नेता विरोधी दल होने के लिए ७५ सदस्यीय बिहार विधान परिषद की कुल सीट का दस फीसदी या न्यूनतम आठ सीट होना चाहिए। राजद के पास मात्र तीन विधायक बचे हैं। विधान परिषद चुनाव में राजद कोटे के तीन सदस्य जीत जाते हैं, तो पार्टी के छह विधायक हो जाएंगे। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से विधान परिषद में विरोधी दल नेता का सम्मान छिन सकता है। वैसे जानकार मानते हैं कि विधान परिषद के नियमों के मुताबिक दूसरे विरोधी दलों के साथ सामंजस्य बैठा कर वे नेता विरोधी दल की कुर्सी पर बैठी रह सकती हैं। दूसरी तरफ रघुवंश प्रसाद सिंह सहित पार्टी के कई बड़े नेता बाहुबली रामा सिंह को पार्टी में शामिल कराए जाने की खबर से नाराज हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो पार्टी के कई बड़े नेता भी आने वाले समय में राजद का दामन छोड़ सकते हैं। लोजपा के पूर्व बाहुबली सांसद राम किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह की तेजस्वी यादव से हुई मुलाकात से राजद सहित बिहार की राजनीति में तूफान आ गया है। २०१४ के लोकसभा चुनाव में रघुवंश प्रसाद सिंह वैशाली से खड़े हुए थे तो उनके खिलाफ मैदान में यही रामा सिंह थे। इस चुनाव में रघुवंश बाबू एक लाख से ज्यादा वोटों से हार गये थे। आगामी सोमवार को रामासिंह राजद का दामन थामने वाले हैं। सवर्णों में अच्छी पैठ रखने वाले रामा सिंह की गिनती लोजपा के बड़े नेताओं में की जाती है। २०१९ के चुनाव में लोजपा ने वैशाली से उनकी जगह वीणा देवी को मैदान में उतारा था। उसी वक्त से यह कयास लगाए जा रहे थे कि आने वाले दिनों में रामा सिंह लोजपा को नमस्कार कर किसी बड़ी पार्टी में जा सकते हैं। किसी समय रामासिंह लालू के भी घोर विरोधी थे। जाहिर है रघुवंश बाबू लालू के करीबी होने के बावजूद रामा सिंह की राजद में आमद रोक नहीं पा रहे थे इसलिए इस्तीफ़ा ही अंतिम विकल्प था।
चाइना से हिना टाउन
जब से गलवान सीमा पर भारत-चीन विवाद बढ़ा है देश में चीन निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार की मुहिम बड़ी तेजी से चल रही है। मजेदार बात यह है कि सोशल मीडिया पर अंगुलियों के सहारे चीन के खिलाफ बहिष्कार क्रांति करने वाले जिन मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं उनमें अधिकतर बिना चीनी सामान के बन ही नहीं सकते। बहरहाल इस बहिष्कार की पहली मार उन पर पड़ी है जो चायनीज खाने की दुकान चलाते हैं। लोगों के प्रकोप से बचने के लिए चायनीज खाने के स्टाल/दुकान वालों ने अपने प्रतिष्ठान के नाम बदलना शुरू किया है। एक निजी टीवी चैनल के पत्रकार ने ऐसे ही एक चायनीज स्टाल का फोटो ट्वीटर पर साझा किया है, जिसने अपना नाम बदला है। पहले उसका नाम चाइना टाउन रहा होगा। स्टाल वाले ने स्पेलिंग का पहला अग्रेजी अक्षर ‘सी’ को मिटा दिया। जिससे अब उसका नाम हिना टाउन हो गया। इसी तरह चायनीज फूड भी बदलकर हाईनीज फूड हो गया। अब लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक ने लिखा, ‘इसमें अब मुसलमान वाला ट्विस्ट आएगा, देख लीजिएगा। चाइना भेजने वाले भाई लोग पाकिस्तान भेजने लगेंगे।‘ तो एक अन्य ने लिखा, ‘चाइना टाउन में तो सिर्फ माल का खतरा है, हिना टाउन में तो जान का भी खतरा है।‘ इसी क्रम में एक भाई ने लिखा कि जो लोग कहते हैं कि नाम में क्या रखा है, देखो भाई देखो ये है उदाहरण। किसी ने लिखा, ‘भाई (ब्रो) लेकिन हिना भी सुरक्षित नहीं है। और किसी ने इसी बहाने राजकपूर की एक फिल्म का गीत का मुखड़ा याद किया, ‘मैं हूं खुशरंग हिना…. प्यारी खुशरंग हिना …. जिंदगानी में कोई रंग नहीं मेरे बिना…! मतलब यह है कि देश में जिस तरह से धर्म के नाम पर सियासी खेल चल रहा है उससे लोग डरे हुए हैं। चीनी सामान का बहिष्कार अपनी जगह है लेकिन चायनीज खाद्य पदार्थ बनाकर जीवन यापन करने वाले तो भारतीय ही हैं। उनके द्वारा प्रयोग की जाने वाली सामग्री भी देश में ही उत्पादित है। क्या हम चीन के विरोध में अपने ही खिलाफ तो नहीं खड़े हो रहे हैं!
अजब पुलिस, गजब कहानी!
उत्तर प्रदेश में भाजपा का राज आने के बाद प्रदेश में बदमाशों के खिलाफ एनकाउंटर नीति अमल में आई। हर एनकाउंटर के बाद पुलिस का तर्क होता था कि बदमाश पुलिस का हथियार छीनने की कोशिश कर रहे थे। मजा यह है कि जब से कानपुर में राजकीय बालिका संरक्षण गृह में ५७ बच्चियों के कोरोना पॉजिटिव के साथ-साथ ७ बच्चियों के गर्भवती होने की कहानी सामने आई है, स्वरूपनगर थाने की पुलिस बौखला गई है और यह कांड उजागर करने वाले पत्रकारों पर ही पिल पड़ी। मामला बिगड़ने पर कह रही है कि पत्रकार थाने में घुसकर पुलिस का हथियार छीन रहे थे इसलिए उनको पकड़कर थाने लाया गया था। इस घटनाक्रम का सीधा संबंध बालिका गृह कांड से जुड़ा है। लीपा-पोती में लगा तंत्र पत्रकारों की आवाज दबाने में जुट गया। घटना की जानकारी लेने गए पत्रकारों को ही थाने के अंदर जमकर धुन दिया गया। पत्रकार बालिका गृह कांड से जुड़े कुछ पहलुओं की जानकारी करने स्वरूप नगर थाने पहुंचे थे उसी दौरान ड्यूटी पर तैनात पहरेदार ने उन्हें रोका तो पत्रकारों ने जब मामले की जानकारी करने के संबंध में अंदर जाने देने की बात कही तो पहरेदार ने पत्रकारों पर टिप्पणी करना शुरू कर दिया। जब मामला बढ़ने लग गया मौके पर कई पुलिसकर्मी आ गए, जिन्होंने पत्रकारों को बंधक बना लिया। जिसके बाद पत्रकारों के साथ पुलिसकमिर्‍यों ने जमकर मारपीट की। इतना ही नहीं थाने के मुंशी ने पहरेदार से कहा ‘तुम इन पत्रकारों के खिलाफ फर्जी मुकदमे लिखवा दो और मुकदमे में बोलो पत्रकारों ने मेरी बंदूक छीनने का प्रयास किया, मैं इन्हें जेल भिजवा दूंगा’। और तो और थाने में मौजूद एक चौकी इंचार्ज ने पत्रकारों से कहा, ‘अगर पहरेदार तुम्हें गोली मार देते तुम यही मरे पड़े रहते इनका क्या कुछ कर पाते..?’ रात ११:०० बजे से देर रात १:३० बजे तक पत्रकारों को बंधक बनाकर मारपीट की गई उसके बाद जबरन इंस्पेक्टर के कमरे में बैठा कर समझौता लिखवा कर उन्हें छोड़ा गया। जब पत्रकार संगठनों ने इस मारपीट की घटना पर विरोध दर्ज कराया तब इसकी जांच एसपी साउथ डॉ. अनिल कुमार को सौंपी गई। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी दिनेश कुमार पी ने एक सब इंस्पेक्टर और तीन कॉन्स्टेबल को लाइन हाजिर कर दिया है। पत्रकारों द्वारा पुलिस के हथियार छीने जाने की कहानी की हवा निकल गई।
सांप लड़े तो गांव लड़े
युद्ध दो सांपों के बीच चल रहा था कि देखते-देखते दो गांवों के बीच दंगल हो गया। वह भी इन लड़ाके सांपों की खातिर। घटना उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र की है। नाहरघाटी और बरुआहार गांव के बीच। एक खेत में दो सांप आपस मे लड़ रहे थे। तभी वहां से गुजरते हुए कुछ लड़के उन सांपों को मारने लगे। वहां मौजूद कुछ ग्रामीणों ने उनको मारने से मना किया। जब हमलावर युवक नहीं माने तो नाहरघाटी और बरुआहार गांव के लोग आपस में भिड़ गए। घटना में १० लोग घायल हुए। जिनको पुलिस ने अस्पताल भेजा। ६ गांव वालों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र प्रसाद के अनुसार दोनों गांव में तनाव का माहौल देखते हुए भारी फोर्स तैनात किया गया है। फिलहाल अभी शांति व्यवस्था बनी हुई है।