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झांकी… लिफाफा ब्रांड सम्मेलन!

जैसे किसी कथा वगैरह में आयोजन के बाद प्रसाद के लिए सारे संयम टूट जाते हैं कुछ ऐसा ही नजारा था मध्य प्रदेश के सागर जिला स्थित राहतगढ़ में भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन का। मंडी परिसर में आयोजित इस कार्यकर्ता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल भी आये थे। यूं तो जाहिर तौर पर विकास कार्यों का भूमिपूजन आदि का कार्यक्रम हुआ पर असल वजह थी सुरखी विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव। सुरखी विधानसभा क्षेत्र में होने जा रहे उपचुनाव को लेकर भाजपा लगातार सागर क्षेत्र में कार्यकर्ता सम्मेलन और बैठक आयोजित कर रही है। इस कार्यकर्ता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल के अलावा प्रदेश के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह, कैबिनेट मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह सहित क्षेत्र के तमाम बड़े भाजपा नेता मौजूद थे। लोगों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि बैठक के बाद वापसी के लिए उनको पेट्रोल के खर्च के लिए लिफाफे दिए जाएंगे। जब कार्यक्रम समाप्त हुआ तो उसके बाद मंडी प्रांगण के दरवाजे पर पैसे बंटना शुरू हुआ। लिफाफे लेने की ऐसी होड़ मची कि मंडी प्रांगण के दरवाजे पर लोग एक साथ जमा हो गए। पैसे लेने के लिए धक्का-मुक्की भी हुई और सोशल डिस्टेंसिंग का जमकर मखौल उड़ाया गया। नेताओं की तरफ से बताया गया कि सम्मेलन में शामिल होने आए लोगों को पेट्रोल के बढ़ते दामों के चलते १००-१०० रुपए खर्च के लिए दिए गए।
कूड़े में भविष्य!
सरकार कोरोना के कारण भुखमरी के कगार पर पहुंचे ८० करोड़ देशवासियों को मुफ्त गेहूं, चावल, चना देने की घोषणा कर चुकी है। बड़ी-बड़ी राहत घोषणाओं के मुंह पर तमाचा मारनेवाली तस्वीर बिहार से आई है। जिन बच्चों के हाथों में किताब-कापी होनी चाहिए थी, मिड-डे मील के चक्कर में स्कूल जानेवाले वे बच्चे कचरा बीन कर अपने पेट भरने की जुगाड़ कर रहे हैं क्योंकि कोरोना संकट के चलते स्कूल बंद हैं। ये बच्‍चे रोजाना कूड़े से प्‍लास्टिक बीनते हैं और उसको बेचकर जो दस-बीस रुपए आते हैं, उससे वह अपना पेट भरते हैं। भागलपुर जिले बड़बिल्ला गांव का मुसहरी टोला एक महादलित बस्‍ती है। बस्ती के बच्‍चे शुक्रवार को कभी स्‍कूल जाना नहीं भूलते थे क्‍योंकि शुक्रवार को उन्‍हें स्‍कूल में खाने के लिए अंडा मिलता था। इसके अलावा खाने में रोटी, सब्‍जी, दाल, चावल और सोया भी मिलता था। तीन महीने से ज्‍यादा समय से स्‍कूल बंद होने के कारण बच्चों को मिड-डे मील मिलना भी बंद हो गया। बस्‍ती में करीब एक महीने पहले प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण योजना के तहत कुछ सरकारी बाबू उन्‍हें ५ किलो चावल, गेहूं और एक किलो दाल दे गए थे। इसके बाद से वहां कोई नहीं आया है। बच्‍चों के बेहतर पोषण और शारीरिक विकास के लिए सरकार की तरफ से सभी सरकारी स्‍कूलों में मिड-डे मील की योजना को शुरू किया गया था। इस पर जिला प्रशासन का दावा है कि सरकार की योजना के तहत मिड-डे मील की जगह नगद राशि बच्‍चों या उनके अभिभावकों के खातों में सीधे भेजी जा रही है। सरकार ने १४ मार्च को आदेश जारी किए थे। इस आदेश के बाद से बच्‍चों या अभिभावकों के खातों में राशि भेजी जा रही है। पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा के छात्रों में १५ दिन के लिए ११४.२१ रुपए और कक्षा ६ से ८ के बच्‍चों के लिए इसी अवधि के लिए १७१.११ रुपए भेजे जा रहे हैं। सवाल यह है कि लॉकडाउन २५ मार्च से लागू हुआ था तब बिहार सरकार ने एडवांस में ही इन बच्चों के भोजन की व्यवस्था कर दी? इधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले पर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय और बिहार सरकार को नोटिस भेजा है।
मायके-ससुराल में झगड़ा
मूलत: उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहनेवाले अरुण कुमार यादव २०११-१२ में इंडो-चाइनीज स्कॉलरशिप के तहत चीनी विश्वविद्यालय में मंदारिन भाषा की पढ़ाई करने गए थे। वहीं पढ़ाई के दौरान बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई कर रही यीन ह से उनकी मुलाकात हुई। यह मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती और प्यार के रास्ते शादी पर खत्म हुई। बीजिंग की रहनेवाली यीन फिलहाल नव नालंदा महाविहार में पाली भाषा में डॉक्टरेट कर रही हैं। इन दिनों चीनी बहू यीन भारत-चीन के विवाद से काफी आहत हैं। वे हिंदी तो अभी ठीक से नहीं बोल पाती हैं, लेकिन वे कहती हैं कि जिस दिन गलवान घाटी में खून बहा, उस दिन खूब रोयी। ऐसा लगा कि मेरे माता-पिता व सास-ससुर में झगड़ा हो गया है। बुद्ध को मानने वाली यीन कहती हैं कि भारत से ही शांति व अहिंसा का संदेश चीन गया। सांस्कृतिक व वैचारिक रूप से चीन भारत के सबसे करीब है। मैं चीन में पैदा हुई, जबकि शादी भारत में हुई। शांति व इंसानियत दोनों देशों का मूलमंत्र है। भले ही भारत व चीन में विवाद चल रहा है पर हमें खूब सम्मान मिल रहा है। यीन को संयुक्त परिवार की भारतीय परंपरा खूब पसंद है। भारत-चीन मित्रता की पक्षधर यीन ने अपने तीन साल के बेटे का नाम मैत्रेय रखा है।
शी का हमशक्ल बैन
जाने-माने चीनी ओपेरा गायक लियू कीकिंग की शक्ल-सूरत चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग से मिलती है, जिसका खामियाजा उन्हें बार-बार ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर बैन होकर भुगतना पड़ता है। डेलीमेल डॉट को डॉट यूके में प्रकाशित खबर के अनुसार टिक-टॉक जैसे चीनी प्लेटफॉर्म डॉयिन पर ६३-वर्षीय लियू कीकिंग के सोशल मीडिया एकाउंट को अधिकारियों ने कई बार ब्लॉक किया है, क्योंकि `वह नेता के चेहरे-मोहरे से जुड़े नियमों का उल्लंघन करते हैं। चीन को राष्ट्रपति शी चिनफिंग की छवि को सुरक्षित रखने के जुनून के चलते कई बार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। इससे पहले चीन में `विनी द पूह’ को भी बैन किया जा चुका है, क्योंकि नेटीजन ने शी की तुलना भालू से करनी शुरू कर दी थी। जर्मनी के बर्लिन में रहनेवाले गायक लियू कीकिंग अपनी गायकी के ट्यूटोरियल वर्ष २०१९ से अपने डॉयिन एकाउंट पर पोस्ट करते आ रहे हैं, जिस पर उनके ४१,००० फॉलोअर हैं। अपलोड की गई वीडियो क्लिपों में लियू को ओपेरा परफॉर्मेन्स देते हुए देखा जा सकता है, जिसमें वे बहुत हद तक चीनी राष्ट्रपति जैसे दिखते हैं। न्यूयार्क टाइम्स की एक अन्य खबर के मुताबिक लियू ने पहले डॉयिन पर एक और एकाउंट भी बनाया था लेकिन उसे अधिकारियों ने अचानक ही डिलीट कर दिया, क्योंकि उनकी प्रोफाइल पर लगी तस्वीर राष्ट्रपति की आधिकारिक तस्वीरों में से कुछ से मिलती-जुलती थी।