" /> झांकी…होली पर भरत मिलाप

झांकी…होली पर भरत मिलाप

पोल-खोल
जयपुर गए कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला गुरुवार को अचानक अपने शहर इंदौर में प्रकट हुए तो कमलनाथ सहित सबके कान खड़े हो गए। तड़का तब लगा जब वे सीधे पितरेश्वर हनुमान के दर्शन करने पहुंचे। भाजपा नेता वैâलाश विजय वर्गीय की संकल्पना से बने इस धार्मिक क्षेत्र की परिक्रमा करने पहुंचे शुक्ला जी वैसे भी भाजपा से नजदीकी के कारण सत्ता पक्ष के रडार पर रहते हैं। बुधवार को ही सभी कांग्रेसी विधायकों के साथ जयपुर गए संजय शुक्ला की निगरानी के लिए कमलनाथ ने शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय वाकलीवाल को लगा दिया, जो पूरे समय उनके साथ चिपके हुए दिखे। इस बीच शुक्ला ने भाजपा द्वारा जारी कुछ वीडियो की पोल खोल दी है। उनके अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थनवाले वीडियो भी पुराने हैं। वीडियो जारी करने से कुछ नहीं होगा, उनमें से ज्यादातर विधायक हमारे साथ हैं। भाजपाई बंगलुरु में उनके सिर पर सवार हैं। अगर वो स्वतंत्र हैं तो मीडिया और फिर घरवालों से बात करने दिया जाना चाहिए क्योंकि उनके घरवाले परेशान हो रहे हैं। भाजपा ने उनको वैâद कर रखा है। खुद कांग्रेस में बने रहने की बात कहते हुए शुक्ला बोले कि मैं गरीबी से ऊपर उठा हूं और ज्योतिरादित्य सिंधिया शुरू से सिंहासन पर बैठे हैं वो कार्यकर्ताओं की दिक्कत नहीं जानते हैं।
रजनीकांत की नई पारी
मुख्यमंत्री न बनने के एलान के साथ ही सुपरस्टार रजनीकांत ने गुरुवार को अपनी राजनीतिक पार्टी और पारी शुरू करने की घोषणा कर दी। अब कम से कम तमिलनाडु की राजनीति में युवा नेताओं को निराश नहीं होना चाहिए। इस संदर्भ में चेन्नई में अपने स्वामित्व वाले सभाग्रह में गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्प्रâेंस में उन्होंने कहा, `कई लोग मेरी ओर से राजनीतिक पार्टी शुरू करने की प्रतीक्षा कर रहे थे इसलिए मैंने सभी अटकलों को समाप्त करने का पैâसला किया है। साल २०१७ में मैंने कहा था कि जब भगवान चाहेंगे तब मै राजनीति में आऊंगा। मेरी पार्टी के ५०-६०फीसदी लोगों में ५० साल से कम उम्र के लोग शामिल होंगे। युवाओं को पार्टी और सरकार में जगह मिलना इन दिनों मुश्किल है। मैं विधानसभा में बैठने की कल्पना नहीं कर सकता और मुख्यमंत्री पद के बारे में कभी नहीं सोचा। मैं खुद को मुख्यमंत्री के रूप में पेश नहीं करके कोई बड़ा बलिदान नहीं दे रहा हूं। रजनीकांत ने रजनी मक्कल मंदरम के सभी जिला पदाधिकारियों को गुरुवार को चेन्नई बुलाया था।
चुनावी नाकेबंदी
बिहार में राज्यसभा के लिए दो सवर्णों को मैदान में उतारकर राष्ट्रीय जनता दल ने आगामी विधानसभा चुनावों की नाकेबंदी शुरू कर दी है। पार्टी ने प्रेमचंद्र गुप्ता और एकदम अपरिचित अमरेंद्रधारी सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। राजद के रेसकोर्स पर राज्यसभा की दौड़ में अमरेंद्र ने पैâसल अली को पछाड़ दिया है। राज्यसभा चुनाव के लिए यह नाम चौंकानावाला है क्योंकि इस नाम से कोई परिचित नहीं था। यहां तक कि पार्टी के कई नेता भी इस नाम को नहीं जानते हैं। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के अनुसार अमरेंद्र समाज के प्रतिष्ठित समाजसेवी व्यक्ति व मूल रूप से पटना जिले के बिक्रम इलाके के रहनेवाले हैं। दुल्हिन बाजार स्थित एनखां गांव के रहनेवाले भूमिहार अमरेंद्र का इलाके में अच्छा रुतबा है और वह रियल स्टेट समेत, केमिकल सेक्टर के कई कारोबार से जुड़े हैं। बिहार के पूर्व डीजीपी और सुपर-३० के संस्थापक रहे अभयानंद के भी काफी करीबी अमरेंद्र ने उर्मिला सिंह प्रतापधारी सिन्हा फाउंडेशन के बैनर तले सामाजिक काम करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अमरेंद्र को राजद का कोई विधायक नहीं जानता। राजद ने पहले क्षत्रिय को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर अपनी राजनीतिक जमीन बढ़ाने की कवायद शुरू की थी।
होली पर भरत मिलाप
दो साल बाद सैफई में होली के मंच पर भरत मिलाप हो रहा था। मुलायम सिंह यादव और प्रो. रामगोपाल यादव के चरणों पर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल यादव नत मस्तक थे। दोनों बड़े भाइयों का आशीर्वाद भी मिला। भतीजे अखिलेश ने भी मौका नहीं चूका और चाचाश्री के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। पूरा परिवार इस बार होली में शामिल रहा। इस बीच शिवपाल और अखिलेश के एक मंच पर आते ही कार्यकर्ता चाचा-भतीजा जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। नारेबाजी सुनकर अखिलेश नाराज हो गए और उन्होंने कहा कि इस तरह की नारेबाजी करोगे तो अगली बार से यहां होली खेलने नहीं आऊंगा। दो साल बाद सैफई की होली पर रंगोत्सव की बयार में मुलायम कुनबे की दूरियां कम हुई हैं। सोमवार को प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह की गैरमौजूदगी तल्खी का संकेत दे रही थी, पर मंगलवार सुबह चाचा शिवपाल ने मंच साझा कर सियासी खेमे में हलचल मचा दी। मुलायम के पैतृक आवास पर मंगलवार सुबह सजे होली मंच पर मुलायम, अखिलेश के अलावा शिवपाल और उनके बेटे आदित्य, भाई राजपाल और उनके बेटे अभिषेक, पूर्व सांसद धर्मेंद्र, पूर्व सांसद तेज प्रताप भी मौजूद थे। पूरे मुलायम कुनबे ने फूलों की होली खेली और फाग का आनंद लिया। देखना यह है यह भरत-मिलाप रामराज लाएगा या यादवी युद्ध की विरासत पर चलेगा।