झोपड़ावासियों का माल लूट रहे दलाल

स्टिंग में महाघोटाले का कबूलनामा बीसयूपी की लूट-खसोट योजना

बीएसयूपी (बेसिक सर्विसेज फारॅ अर्बन पूअर) योजना अब दम तोड़ने लगी है। इसे २००९ में जब शुरू किया गया था तो इसका उद्देश्य शहरी गरीब जो झोपड़पट्टी में रहते हैं, उनको इमारतों में अच्छे मकान देने का था लेकिन इन झोपड़ावासियों के हक का माल अब दलाल लूट रहे हैं। इसका खुलासा हाल में हुए एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए हुआ है, जिसके कारण यह योजना महज लूट-खसोट योजना बनकर रह गई है।
मीरा-भाइंदर में फ्लैट लेना अब आम आदमी के पहुंच से दूर हो रहा है लेकिन दलालों के पास जुगाड़ का माल तैयार है। ऐसे ही एक जुगाड़ का पर्दाफाश हाल में एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए हुआ, जिसमें एक महिला दलाल साढ़े चार लाख रुपए में यह फ्लैट दिलाने की हामी भर रही है। इस महिला दलाल ने बताया कि साढ़े चार लाख रुपए में से साढ़े तीन लाख रुपए मीरा-भाइंदर मनपा (एमबीएमसी) अधिकारियों को देना होगा और एक लाख रुपए में वह फ्लैट के खरीददार को १० साल पुराना राशन कार्ड, पैनकार्ड जैसे जरूरी कागजात बनवाकर देगी, जिससे बीएसयूपी के फ्लैट के लिए वह पात्र हो जाएगा। इस स्टिंग ऑपरेशन को मीरा-भाइंदर के एक पत्रकार अनलि नौटियाल ने किया है। अनिल नौटियाल ने इस संदर्भ में एमबीएमसी के सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता दीपक खांबित से शिकायत भी की है। हालांकि ‘दोपहर का सामना’ के संवाददाता ने जब इस बारे में दीपक खांबित से बात की तो उन्होंने संबंधित दलाल के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करने की बात कही।
ज्ञात हो कि झोपड़पट्टीवासियों के लिए २००९ में केंद्र सरकार ने बीएसयूपी योजना को लागू की थी। वर्ष २०११ में इसमें काशीमीरा के जनता नगर और काशी चर्च झोपड़पट्टीवासियों को पक्के मकान बना कर देने के लिए चयनित किया गया था। करीब ३३० करोड़ रुपए की लागतवाली इस योजना में ४ हजार १३६ झोपड़ाधारकों को पक्के मकान बनाकर देने के लिए चयनित किया गया था लेकिन ९ वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक सिर्फ १७९ लाभार्थियों को ही पक्का घर मिल पाया है।