टार्गेट पूरा नहीं किया तो प्रिंसिपल को लगेगी सरकारी `सुई’

मुंबई सहित पूरे देश में आज भी कई बच्चे खसरा (मीजल्ज) और रूबेला जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इसलिए सरकार ने २०२० तक मीजल्ज-रूबेला के संपूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। सभी स्कूलों में १५ वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण अनिवार्य किया गया है लेकिन कुछ स्कूल के प्रिंसिपल आना-कानी कर रहे हैं। ऐसे में सरकार ने एक सूचना जारी कर स्कूल के प्रिंसिपल को स्पष्ट रूप से कहा है कि वे सभी बच्चों को उक्त टीका लगाने का टार्गेट पूरा करें अन्यथा उन्हें सरकारी कार्रवाई की `सुई’ लगाई जाएगी।
बता दें कि राज्य के बच्चों का भविष्य स्वस्थ रखने के लिए उन्हें मीजल्ज और रूबेला का टीका दिया जा रहा है। राज्य में कुल ३.१ करोड़ बच्चों को यह टीका दिया जाना है लेकिन ८ जनवरी २०१५ तक २ करोड़ ४५ हजार बच्चों का ही टीकाकरण हुआ है। राज्य शिक्षा आयुक्त कार्यालय ने अपने पत्र में यह लिखा है कि मुहिम के अंतर्गत ९ महीने से लेकर १५ वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण होना चाहिए लेकिन कुछ प्रिंसिपल और शिक्षक अपनी भूमिका नहीं निभाते हैं, इस बात की जानकारी है। यह काफी निराशाजनक है, ऐसे में शेष बचे सभी स्कूलों के प्रिंसिपलों से यह अनुरोध किया जाता है कि वे अपने स्कूल में एक बार फिर मुहिम चलाएं। इसके बावजूद कोई स्कूल आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके प्रिंसिपल पर सरकार उचित कार्रवाई करेगी। इस संदर्भ में `मुंबई प्रिंसिपल एसोसिएशन’ के सचिव प्रशांत रेड्डीज ने कहा कि प्रिंसिपल और शिक्षकों की मेहनत के कारण कम खर्चे में लगभग ८० प्रतिशत टार्गेट पूरा किया गया है। अभिभावकों और बच्चों की स्वास्थ्य समस्या के कारण टीका का टार्गेट पूरा नहीं हो रहा है, इसमें हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।