" /> टीबीएम का तिलिस्म!,  पूरी मशीन एक साथ शिफ्ट

टीबीएम का तिलिस्म!,  पूरी मशीन एक साथ शिफ्ट

 ऐसा पहली बार हुआ
कोरोना काल में विकास की राह पर मुंबई का बुनियादी ढांचा तो मजबूत ही हो रहा है, साथ ही मुंबई के ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम को भी विकास की रफ्तार मिल रही है। मुंबई में सबसे लंबी अंडर ग्राउंड मेट्रो का निर्माण कार्य हो रहा है। ये मेट्रो लाइन जब बनकर तैयार हो जाएगी तो इसे देश की सबसे लंबी अंडर ग्राउंड मेट्रो का दर्जा प्राप्त होगा। मुंबई की कोख में लगातार मेट्रो के निर्माण के लिए टनल बोअरिंग मशीन (टीबीएम) से खुदाई हो रही है। मुंबई के भूगर्भ में टीबीएम के तिलिस्म का जादू दिख रहा है। और लगातार मेट्रो टनल अपने टारगेट को पूरा करने की ओर बढ़ रही है। इस काम के दौरान हाल ही में अंडर ग्राउंड मेट्रो निर्माण साइट से एक ऐसी खबर आई, जो अब तक न देखने को मिली थी और न ही सुनने को। अमूमन जब टीबीएम से एक छोर की खुदाई पूरी हो जाती थी तो उसके सैकड़ों नट बोल्ट, कटर हेड, प्रâंट शील्ड, मिडल शील्ड, टेल स्किन को खोलकर अलग कर दिया जाता है और फिर किसी टीबीएम को दोबारा शाफ्ट में डालने के लिए इन सारे कलपुर्जों को दोबारा जोड़ा जाता है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब किसी टीबीएम मशीन के कलपुर्जे खोले बगैर वरली से साइंस म्यूजियम में शिफ्ट किया गया, जोकि एमएमआरसीएल और उनसे जुड़े इंजीनियर और मजदूरों का बड़ा कारनामा है।

ढाई किमी की दूरी ५ घंटे में तय
वरली से साइंस म्यूजियम की दूरी करीब ढाई किमी की है लेकिन पूरे टीबीएम को शिफ्ट करने के लिए वरली से साइंस म्यूजियम की दूरी तय करने में ५ घंटे का समय लग गया। ये एक चैलेंजिंग वर्क था, जिसे पूरा करने से पहले काफी तैयारी की गई थी। ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरे टीबीएम को एक जगह से दूसरे जगह बिना जोड़-तोड़ के शिफ्ट किया गया हो।

बरती गई सावधानी
टीबीएम मशीन को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने से पहले सभी सावधानियों का खयाल रखा गया। इस काम को शुरू करने से एक दिन पहले एक मॉकड्रिल की गई। ताकि ये पता लग सके कि जब टीबीएम को शिफ्ट किया जाएगा तो क्या अड़चनें आ सकती हैं? सारी सावधानियां बरतने के बाद बेस्ट, मनपा और ट्रैफिक पुलिस की मदद से ओवर हेड वायर, ट्रैफिक सिग्नल और पार्क किए गए वाहनों को हटाया गया। ताकि टीबीएम को आसानी से शिफ्ट किया जा सके।

स्टेशनों के काम की स्थिति
पहला चरण (बीकेसी टू सिप्ज)
एमएमआरसीएल से प्राप्त मेट्रो स्टेशनों के विकास के ताजा आंकड़ों को देखें तो पहले चरण के तहत आनेवाले मेट्रो स्टेशनों में सिप्ज स्टेशनों के काम ६७ फीसदी, एमआईडीसी स्टेशन ७८ फीसदी, मरोल नाका- ६९, छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट टी-२ – ५६ फीसदी, सहार रोड- ५८ फीसदी, छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट टी-१ – सांताक्रुज स्टेशन ६३ फीसदी, विद्यानगरी ५८ फीसदी, बीकेसी- ४८ फीसदी काम पूरा हो चुका है।

दूसरा चरण (बीकेसी टू कफ परेड)
धारावी स्टेशन- ४८ फीसदी, शीतलादेवी- २१ फीसदी, दादर- ३७ फीसदी, सिद्धिविनायक- ६७ फीसदी, वरली-३८ फीसदी, आचार्य अत्रे- १४ फीसदी, साइंस म्यूजियम- ५७ फीसदी, महालक्ष्मी- २८ फीसदी, मुंबई सेंट्रल- ४० फीसदी, ग्रांट रोड- १८ फीसदी, गिरगांव- कालबादेवी ७.५ फीसदी, सीएसएमटी- ६४ फीसदी, हुतात्मा चौक- ५६ फीसदी, चर्चगेट- ५५ फीसदी, विधान भवन- ७३ फीसदी, कफ परेड- ५७ फीसदी स्टेशन का काम पूरा हो चुका है।

कुलाबा-बांद्रा-सिप्ज के बीच मुंबई में ३३.५ किमी लंबा मेट्रो का भूमिगत मार्ग तैयार किया जा रहा है। मेट्रो-३ कॉरिडोर के मार्ग पर कुल २६ स्टेशनों का निर्माण कार्य भी चल रहा है। स्टेशन निर्माण के लिए महानगर के कई स्थानों पर खुदाई की गई है। भूमिगत मेट्रो के लिए जमीन से करीब १५ से २० मीटर नीचे तक खुदाई की गई है। मुंबई की पहली भूमिगत मेट्रो के लिए करीब ८५ प्रतिशत टनल निर्माण का काम पूरा कर लिया गया है। २६ मेट्रो स्टेशनों का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है।

टनल निर्माण की स्थिति
पहले चरण का काम तीन पैकेजों में किया जा रहा है।
ये पैकेज, पैकेज-५, पैकेज-६ और पैकेज-७ हैं, जो कि
(बीकेसी टू सिप्ज) के बीच हैं।
पैकेज-७: सिप्ज, एमआईडीसी, मरोल नाका के टनल निर्माण का काम १०० फीसदी पूरा हुआ।
पैकेज-६: छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट टी-२, सहार रोड, छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट टी-१ का टनल निर्माण ७८ फीसदी पूरा हो चुका है।
पैकेज-५: बीकेसी, विद्यानगरी, सांताक्रुज का टनल निर्माण ९६ फीसदी पूरा हो चुका है।
अंडर ग्राउंड मेट्रो के दूसरे चरण का काम ४ पैकेजों में किया जा रहा है। ये पैकेज एक से चार तक है।

दूसरा चरण टनल निर्माण (बीकेसी टू कफ परेड)
पैकेज-१: हुतात्मा चौक, चर्चगेट, विधान भवन, कफ परेड का ७६ फीसदी टनल निर्माण पूरा।
पैकेज-२: ग्रांट रोड, गिरगांव, कालबादेवी, सीएसएमटी का टनल निर्माण ९९.९ फीसदी पूरा।
पैकेज-३: वरली, आचार्य अत्रे, साइंस म्यूजियम, महालक्ष्मी, मुंबई सेंट्रल का टनल निर्माण ५१ फीसदी पूरा हो चुका है।
पैकेज-४: शीतलादेवी, दादर, सिद्धिविनायक का ८४ फीसदी टनल निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।