टीबी की `जादुई’ दवाई, ४५ दिन,५० मरीज

जानलेवा दवा प्रतिरोधी (एमडीआर) टीबी से जूझ रहे जो रोगी `जादुई’ दवा के नाम से मशहूर `बेडाक्यूलिन’ से कन्नी काटते थे, वे अब इलाज के लिए सामने आ रहे हैं। मनपा के शिवड़ी टीबी अस्पताल में महज ४५ दिन के भीतर ५० से भी अधिक रोगियों ने `बेडाक्यूलिन’ दवाई का डोज लिया।
बता दें कि ट्यूबरक्यूलोसिस बैक्टीरिया यानी क्षयरोग से हर वर्ष औसतन ३० हजार लोग प्रभावित होते हैं। इनमें से कई ऐसे रोगी होते हैं, जो मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) में तब्दील हो जाते हैं यानी इन पर टीबी की कुछ दवाइयां असर नहीं करती हैं। ऐसे में `बेडाक्यूलिन’ दवाई का आविष्कार हुआ। दवाई का सेवन करनेवाले एमडीआर टीबी के रोगियों में सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले लेकिन पहले रोगियों को उक्त दवाई का ट्रीटमेंट शुरू करने के लिए १५ दिन अस्पताल में भर्ती होना पड़ता था। उस दौरान अनेक प्रकार की जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। ऐसे में गरीब कामकाजी रोगी काम छोड़ १५ दिन अस्पताल में वैâसे एडमिट रहेंगे, उनकी जीवनी वैâसे चलेगी? इसके अलावा कई अन्य समस्याओं के चलते मरीज उक्त इलाज के लिए आगे नहीं आते थे। इसी के मद्देनजर उपचार के नियमों में बदलाव किया गया और रोगियों को भर्ती करने के बजाय ओपीडी में बुलाकर उनकी जांच और दवाइयां दी जाने की बात मुंबई टीबी नियंत्रण कक्ष की प्रमुख डॉ. दक्षा शाह ने कही। उन्होंने बताया कि मरीजों को दिक्कत न हो और वें अपना पूरा इलाज करवाएं, यही हमारा ध्येय है।