टीबी मरीज लाओ रु. ५०० ले जाओ!

टीबी बीमारी को २०२५ तक हिंदुस्थान से खत्म करने का प्रण ले चुकी सरकार जल्द ही एक नई पहल करनेवाली है। संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) के तहत यदि कोई व्यक्ति टीबी के मरीज को जांच व इलाज के लिए लाता है तो उस व्यक्ति को सरकार ५०० रुपए देने की योजना बना रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो यह टीबी मरीज और इलाज के बीच बनी खाई को भरने का काम करेगा।
बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी किए गए वैश्विक टीबी रिपोर्ट २०१८ में यह खुलासा हुआ है कि हिंदुस्थान में टीबी की जांच करने, बीमारी की पुष्टि होने और इलाज में २६ प्रतिशत का गैप बना हुआ है। यह आंकड़ा इंडोनेशिया, नाइजीरिया और फिलीपींस की तुलना में अधिक है। जांच से लेकर पूर्ण इलाज के बीच बनी खार्ई को भरने के लिए सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्किम (डीबीटी) के तहत टीबी मरीजों को ५०० रुपए और सरकार को मरीज के बारे में सूचित करनेवाले डॉक्टरों को १००० रुपए देने की योजना बनाई। महाराष्ट्र स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के निदेशक डॉ. संजीव कांबले ने बताया कि अब तक सूचित किए जा चुके ७१ हजार २९१ टीबी मरीजों में से ४१,०२९ मरीजों के एकाउंट में हर माह ५०० रुपए भेजा जाता है। टीबी के मरीजों के बारे में सूचना देनेवाले २,७०० डॉक्टर को भी इनाम के तौर पर १,००० रुपए दिया गया है। उक्त पहल का सकारात्मक परिणाम देख अब सरकार आम लोगों को भी टीबी से जंग लड़ने के लिए प्रेरित करना चाहती है। यदि आप को संदेह है कि आप के आसपास रहनेवाले व्यक्ति को टीबी है तो इसे तुरंत आरएनटीसीपी केंद्र में ले जाकर उसकी मुफ्त जांच कराएं। टीबी की पुष्टि होती है तो मरीज का इलाज शुरू हो जाएगा और उसे हर माह ५०० रुपए मिलेंगे, साथ ही में जागरूक नागरिक की भूमिका निभानेवाले और मरीज को अस्पताल ले जानेवाले व्यक्ति को भी सरकार ५०० रुपए इनाम देने की योजना बना रही है।