टैंक पर नशेड़ियों का कब्जा!, निकल रहा है चरस का धुआं

हिंदुस्थान और पाकिस्तान के बीच १९७१ में हुई जंग में पाकिस्तानी सेना के खेमे में भारी तबाही और बर्बादी मचानेवाला ऐतिहासिक युद्धक टैंक विजयंता पर नशेड़ियों ने कब्जा जमा रखा है। चरसी यहां बैठकर सुट्टा मारते हैं और धुआं छोड़ते हैं, जिसे देखकर प्रबुद्ध मुंब्रावासी कहते हैं कि टैंक के पास चरस का धुआं उड़ा रहा है। शहीद स्मारक बनाने के नाम पर लाए गए इस टैंक के आस-पास कचरों का ढेर लगा हुआ है। जिस चबूतरे पर टैंक रखा गया है उस चबूतरे को भिखारियों ने खाने-पीने तथा सोने का अपना अड्डा बना लिया है।
सौंदर्यीकरण और शहीद स्मारक
मुंब्रा स्टेशन के सामने स्थित परिसर का वर्ष २०१३-१४ में सुधारीकरण एवं सौंदर्यीकरण किया गया था। इसके तहत देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करनेवाले परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद, शहीद मेजर पीतांबरे तथा देश के अन्य शहीद जवानों की स्मृति में शहीद स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया था। स्थानीय विधायक जितेंद्र आव्हाड के आग्रह पर तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटील ने विजयंता टैंक को मुंब्रा स्थित शहीद स्मारक के लिए दिया था। वर्ष १९६५ तथा १९७१ में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में इस विजयंता टैंक ने भाग लिया था और पाकिस्तानियों के दांत खट्टे कर दिए थे।
टैंक पर बैठकर खींचते हैं चिलम
३९ हजार किलो वजनी इस टैंक को मुंब्रा स्टेशन के ठीक सामने एक विशाल चबूतरे पर रखा गया है। जिस समय इस टैंक को मुंब्रा में लाया गया था, उस समय टैंक पर बैठकर सेल्फी और फोटो खींचनेवालों की हमेशा भीड़ लगी रहती थी। यह सेल्फी प्वाइंट के रूप में विख्यात था पर अब सबकुछ बदल चुका है। टैंक के आसपास बची चबूतरे की जगह पर रात में भिखारी सोते हैं और खाना खाते हैं। खाना खाकर दूर फेंकने की बजाय वे प्लास्टिक की थैलियों में बचे हुए खाने को टैंक की पहियों के आसपास फेंक देते हैं। इसकी वजह से टैंक के नीचे कचरों का अंबार लगा हुआ है। टैंक का चबूतरा इस समय चरसियों का अड्डा बन गया है। कभी चबूतरे पर तो कभी टैंक पर बैठकर वे देर शाम तक चिलम खींचते नजर आते हैं। शहीदों के नाम पर बना यह स्मारक अपनी बदहाल स्थिति पर आंसू बहा रहा है। स्थानीय प्रशासन उदासीन है।