" /> ट्यून बदलो!

ट्यून बदलो!

कांग्रेस के एक विधायक ने केंद्र को सूचित किया है कि कोरोना ट्यून को सुन-सुनकर कान के परदे खराब हो गए हैं। राजस्थान के इस विधायक महोदय का कहना है कि मोबाइल से इस कॉलर ट्यून को हटाओ। ‘कोरोना वायरस से पूरा देश लड़ रहा है। लेकिन याद रखिये हमें बीमारी से लड़ना है, बीमार से नहीं’, जैसे ट्यून से लोग उकता गए हैं। उसी प्रकार चीन के मामले में भाजपा और कांग्रेस में शुरू ट्यून युद्ध से भी लोग उकता गए हैं। ‘हमें चीन से लड़ना है, सरकार के विरोधियों से नहीं।’ ऐसी एक कॉलर ट्यून दिल्ली में किसी को लगातार बजानी चाहिए।’ सीमा पर गलवान घाटी में चीन की घुसपैठ और अवैध निर्माण जारी है। सरकार उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने की बजाय सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को करारा जवाब दे रही है। राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से धन प्राप्त हुआ। चीन और कांग्रेस के बीच क्या संबंध है? ऐसे सवाल भाजपा ने पूछे। इस पर कांग्रेस ने जवाबी हमला किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चीनी कंपनियों से प्रधानमंत्री केयर्स फंड में करोड़ों रुपए आए हैं और विदेशमंत्री जयशंकर के बेटे के खाते में भी चीनी कंपनी से आए पैसे जमा हुए हैं। मतलब हम जो कहना चाहते हैं वो यही मुद्दा है। चीन सीमा पर चौकियां तथा बंकर बना रहा है और देश में हर दिन भाजपा-कांग्रेस की जंग चल रही है। हमें चीन से लड़ना है, शायद सब ये भूल गए हैं। इन सभी युद्धों में शरद पवार ने भी एक ज्वलंत बात रखी, ‘किसी को भी राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह अच्छा नहीं है।’ पवार का यह कटाक्ष कांग्रेस या राहुल गांधी के लिए है, ऐसा भाजपा प्रणीत सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। चीनी घुसपैठ पर किसी को राजनीति नहीं करनी चाहिए, पवार का यह कहना सही है! लेकिन वास्तव में ऐसी राजनीति कौन कर रहा है? चीन की घुसपैठ को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पूछे गए सवाल पानी के बुलबुले नहीं हैं। ये वो सवाल हैं जो शरद पवार के जहन में भी हो सकते हैं। चीन ने हमारी जमीन पर आक्रमण नहीं किया तो हमारे २० सैनिक कैसे शहीद हो गए? क्या चीन हमारी सीमा में घुस आया है? ये सब सवाल तो हैं ही। इस बारे में प्रधानमंत्री का जवाब है, ‘हिंदुस्थान की ओर टेढ़ी नजर से देखनेवालों को ठोस जवाब मिला है।’ प्रधानमंत्री ने जो कहा है, वह सही है। चीन का नाम लिए बगैर प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी के संदेह को दूर कर दिया। उसी दौरान ‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हिंदुस्थान कोरोना और चीन के खिलाफ लड़ाई जीतेगा।’ गृह मंत्री अमित शाह ने ऐसा बयान दिया। हम श्री शाह को शुभकामनाएं देते हैं। उन्हें इन दोनों लड़ाइयों पर ध्यान देना चाहिए। विरोधी दल जो कुछ भी कर रहा है, उस पर ध्यान न दें। उन्हें बीमारी से लड़ना चाहिए। मरीजों से लड़कर देश का समय और पैसा बर्बाद नहीं करना चाहिए। विपक्ष द्वारा पूछे गए सवालिया तोपों से इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है। ‘हमें चीन के मुद्दे पर किसी भी चर्चा से डर नहीं। हम १९६२ से हिंदुस्थान-चीन संबंधों पर संसद में बोलने के लिए तैयार हैं।’ ऐसी घोषणा गृह मंत्री शाह ने की।वास्तव में, क्या हमें १९६२ तक गहरे जाने की आवश्यकता है? उस अतीत को भूल जाओ। चीन का संकट फिर से शुरू हो गया है और हम वर्तमान में इसका सामना करना चाहते हैं और राष्ट्र के भविष्य को आकार देना चाहते हैं। १९६२ में पंडित नेहरू ने गलतियां की भी होंगी, १९६२ अब क्यों लेकर बैठे हो? अब २०२० की सुबह में दुनिया आगे बढ़ चुकी है। यह महत्वपूर्ण है कि आज की सरकार ने चीन के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। चाहे वह प्रधानमंत्री नेहरू हों या मोदी, चीन की पूंछ टेढ़ी ही रहेगी। पंडित नेहरू एक अलग आदर्शवाद के नेता थे। उनकी हिंदुस्थान सरकार के घोषवाक्य ‘सत्यमेव जयते’ पर श्रद्धा थी। प्रधानमंत्री मोदी आध्यात्मिक शक्ति और भाईचारे में विश्वास करते हैं। मोदी कहते हैं कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, हिंदुस्थान के संस्कार निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा देते हैं। तो उनके भक्तों को विरोधियों को टेढ़ी नजर से देखने की आवश्यकता नहीं है। मोदी चीन के बारे में बात करते हैं और उनके लोग विपक्ष की ओर टेढ़ी नजर से देखते हैं। कुछ गड़बड़ है! कोरोना की तरह यहां भी ‘ट्यून’ बदलनी ही चाहिए!